राम मंदिर महोत्सव | Kavita Ram Mandir Mahotsav

राम मंदिर महोत्सव

 

सुन लो सुन लो सारे जग वालों, आपस में लड़ने वालों,
रहो ईमान से।
राम आए हैं बताने ये जहान से।। राम मंदिर
बना है बड़ा सुंदर,
भारत में है महोत्सव ,
अवधपुर की शान से ।
आशा जागी हैं श्री राम भगवान से।

भारत में आईं हैं खुशियां सुहानी,
भारत में आईं हैं खुशियां सुहानी।
प्राण प्रतिष्ठा होने से,
झूमे है सरयू, अयोध्या दीवानी।
राम मंदिर के बनने से,
घर-घर देहरी,
घर-घर देहरी द्वार सजे हैं।
भगवा ध्वज लहराए।
देखो देखो रामलला आए,
सिया संग लाए, लखन शक्तिवान से। के राम आए हैं बताने ये जहान से।
सुन लो सुन……..

प्रीति नीति रीति भक्ति के पालक, प्रीति नीति रीति भक्ति के पालक।
राम लोक नायक प्यारे,
सत्य धर्म और न्याय निसर्ग के,
राम नींव धारक प्यारे,
संस्कृति के संवाहक पोषक,
संस्कृति के संवाहक पोषक,
दशरथ नंदन आए।
देखो देखो राम फिर आए ,
धर्म का गहना लाए,भरत शीलवान से। राम आए हैं बताने ये जहान से।
सुन लो सुन लो…..

श्रीमती अनुराधा गर्ग ‘ दीप्ति ‘

जबलपुर ( मध्य प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

आ गया फिर चुनाव उत्सव | Geet Chunaav Utsav

Similar Posts

  • दिल वालों की दिल्ली | Delhi

    दिल वालों की दिल्ली ( Dilwalon ki Dilli )    महाभारत काल से है दिल्ली, जो इंद्रप्रस्थ में थी पहले दिल्ली। पहला शहर तोमर राजा ने बनाया, जो लाल कोट शहर कहलाया।। हुमायु और मोहम्मद गोरी आया, तुर्को का आगमन वहां छाया। सात बार शहर बना और उजड़ा, सोमेश्वर राजा निड़र था योद्धा।। पृथ्वीराज ने…

  • शंकर दयाल सिंह | Shankar Dayal Singh par kavita

    शंकर दयाल सिंह ( Shankar Dayal Singh )   भगवती कृपा प्रसाद पाया शंकर दयाल नाम भवानीपुरा में जन्मे शंकर कीर्तिमान सरनाम साहित्य कमल पंखुड़ी सा सौरभ लुटाता रहा सांसद रहकर सत्ता में परचम लहराता रहा राष्ट्रप्रेम भरा दीवाना देश प्रेम को जीता था जीवन की धूप छांव प्रेम सुधा रस पीता था संस्कृति सनातन…

  • Kavita | प्यार

    प्यार  ( Pyar ) बड़ा-छोटा काला-गोरा मोटा-पतला अमीर-गरीब हर किसी को हो सकता है-किसी से प्यार , यह ना माने सरहदें, ना देखे दरो-दीवार, हसीं-बदसूरत,बुढ़ा-जवान,तंदरूस्त-बीमार, यहाँ सबके लिए खुले हैं – प्यार के किवार । मैं नहीं तुम नहीं आप नहीं हम नहीं एक है बंदा-संग लिए बैठा रिश्ते हज़ार, सिर्फ़ दिल की सुनो जब…

  • पितरों का श्राद्ध | Poem pitaron ka shraddh

    पितरों का श्राद्ध ( Pitaron ka shraddh )     विचारों का है प्रकटीकरण श्राद्ध पक्ष पूर्वजों को समर्पण पुरखों को कर दो तर्पण कुआं ताल पर जल अर्पण उड़द चावल से, आमंत्रण कुशा पैती किया धारण काले तिल मंत्र है उच्चारण दे रहे उन्हें है निमंत्रण अग्रजो का करें अनुकरण पूर्वजों का यह है…

  • स्तवन | Stavan

    स्तवन *सरस्वती शारद ब्रम्हाणी!जय-जय वीणा पाणी!!*अमल-धवल शुचि,विमल सनातन मैया!बुद्धि-ज्ञान-विज्ञानप्रदायिनी छैंया।तिमिरहारिणी,भयनिवारिणी सुखदा,नाद-ताल, गति-यतिखेलें तव कैंया।अनहद सुनवाई दो कल्याणी!जय-जय वीणापाणी!!*स्वर, व्यंजन, गण,शब्द-शक्तियां अनुपम।वार्णिक-मात्रिक छंदअनगिनत उत्तम।अलंकार, रस, भाव,बिंब तव चारण।उक्ति-कहावत, रीति-नीति शुभ परचम।कर्मठ विराजित करते प्राणीजय-जय वीणापाणी!!*कीर्ति-गान कर,कलरव धन्य हुआ है।यश गुंजाता गीत,अनन्य हुआ है।कल-कल नाद प्रार्थना,अगणित रूपा,सनन-सनन-सन वंदनपवन बहा है।हिंदी हो भावी जगवाणीजय-जय वीणापाणी!! संजीव सलिल यह…

  • बुद्ध हो गयें । Buddh ho Gaye

    बुद्ध हो गयें ( Buddh ho Gaye ) तन से मन से वचन से कर्म से मर्म से धर्म से जो शुद्ध हो गयें बुद्ध हो गयें। नरेन्द्र सोनकर ‘कुमार सोनकरन’ नरैना,रोकड़ी,खाईं,खाईं यमुनापार,करछना, प्रयागराज ( उत्तर प्रदेश ) यह भी पढ़ें :- माँ पर नरेन्द्र सोनकर की ४ कविताएँ

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *