कोई नहीं कहता

कोई नहीं कहता | Kavita Koi Nahi Kahta

कोई नहीं कहता

( Koi Nahi Kahta )

कोई नहीं कहता ,
जो कहना चाहिए ।
जो हो अन्दर ,
वही बाहर रहना चाहिए ।
सच को सच,
झूठ को झूठ ,
कहना चाहिए ।
तन के साथ ,
मन भी साफ,
रहना चाहिए।
कोई नहीं कहता,
घर ऐसा चाहिए ,
जिसमें केवल प्यार,
को ही रहना चाहिए ।
कोई नहीं कहता,
दुर्भावना हो खत्म ।
हर दिल में ,
सद्भावना को रहना चाहिए ।
हर तरफ हो सुकून ,
गुंजे किलकारियां ।
खुशियों का ही ,
बसेरा बस होना चाहिए ।
कोई नहीं कहता

Pragati Dutt

प्रगति दत्त

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