क्यूं है

क्यूं है | Kyon Hai

क्यूं है

( Kyon Hai )

जिस शख़्स से गिला है उससे ही प्यार क्यूं है
मुझको उसी बशर का अब इंतज़ार क्यूं है

उसके बगैर सूनी लगती है दुनिया मुझको
होता उसी से मेरा दिल खुशगवार क्यूं है

जिसने कभी तो कोई वादा नहीं निभाया
नादान दिल को उस पर फिर ऐतबार क्यूं है

खोयी रहूं सदा मै उसके ख़याल मे ही
ये हर घडी ही मुझको उसका खुमार क्यूं है

वैसे तो सारी दुनिया कितनी है खूबसूरत
सिमटा हुआ उसी तक मेरा दयार क्यूं है

नीलम वो बेवफ़ा है यह जानती हूंँ फिर भी
ये दिल उसी की खातिर अब बेकरार क्यू है

नीलम शर्मा

विकासनगर

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • घर की इज़्ज़त | Ghazal Ghar ki Izzat

    घर की इज़्ज़त ( Ghar ki Izzat )   यह हुनर दिल में ढाल कर रखना घर की इज़्ज़त सँभाल कर रखना हर तरफ़ हैं तमाशबीन यहाँ कोई परदा भी डाल कर रखना मैं भी दिल में तुम्हारे रहता हूँ अपने दिल को सँभाल कर रखना हर ग़ज़ल अंजुमन में छा जाये दर्द दिल का…

  • भरोसा टूट जाता है | Bharosa Toot Jata Hai

    भरोसा टूट जाता है ( Bharosa Toot Jata Hai ) मुसीबत जब भी आती है भरोसा टूट जाता हैसभी मुख मोड़ते हैं और रिश्ता टूट जाता है नहीं है खेल बच्चों का लगाना दिल किसी से भीज़रा सी ठेस लगने पर ये शीशा टूट जाता है सलीक़े से निभाओ आप रिश्तों को मुहब्बत केपरखिए मत…

  • खुमार सावन का | Ghazal Khumaar Sawan ka

    खुमार सावन का ( Khumaar Sawan ka ) बीता मौसम हज़ार सावन का आप बिन क्या शुमार सावन का बात बनती नज़र नही आती है अधूरा जो प्यार सावन का इक नज़र देख लूँ अगर तुमको । तब ही आये करार सावन का वो न आयेगा पास में मेरे क्यों करूँ इंतज़ार सावन का आप…

  • जाये यारो | Ghazal Jaye Yaro

    जाये यारो ( Jaye Yaro ) दिल की सरगोशी मिरी मुझको डराये यारो। हद कि बस याद वही याद क्यूं आये यारो। मुस्तकिल कह दो रहे उससे वो दिल में मेरे और जाना है तो फिर जल्द ही जाये यारो। मुझको मंजूर सज़ा जो वो मुक़र्रर कर दे शर्त बस ये की ख़ता मेरी बताये…

  • अजब दोस्ती के गजब चर्चे

    अजब दोस्ती के गजब चर्चे मुकद्दर से मिली छाह दोस्ती की lजिंदगी से बुलंद राह दोस्ती की ll मौत से भी छीन कर लाएँगे lदोस्त की दोस्ती सभ में जगाएँगे ll वफ़ा और दोस्ती का कोई मोल नहीं lजब पता चला तो ओ मेरे पास नहीं ll फिर से खड़ी हुई दुनिया मेरी lपहला दर्पण…

  • महक जिसकी | Mahak Jiski

    महक जिसकी ( Mahak Jiski ) नशे में है जवानी लिख रही हूँ हुआ है ख़ून पानी लिख रही हूँ महक जिसकी फ़िज़ाओं में बसी है वही गुल रात रानी लिख रही हूँ उजाड़ी जिसने मेरे दिल की बस्ती उसी की शादमानी लिख रही हूँ वफ़ादारी जो शिद्दत से निभा लें वहीं हैं खानदानी लिख…

One Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *