हमने देखा है

हमने देखा है | Humne Dekha Hai

हमने देखा है

मुस्कुराते गुलाब की मानिंद।
हर ख़ुशी है शराब की मानिंद।

हमने देखा है ग़ौर से इसको।
ज़िन्दगी है ह़बाब की मानिंद।

धुन है गर आसमान छूने की।
बनिए ज़िद्दी उ़क़ाब की मानिंद।

कैसे ढालूं मैं हाय रे ख़ुद को।
चश्मे-जानां के ख़्वाब की मानिंद।

कोई सानी ही जब नहीं उनका।
किसको लिक्खूं जनाब की मानिंद।

मिल न पाएगा आपको कोई।
हम से ख़ाना ख़राब की मानिंद।

उनको देखा जो साथ ग़ैरों के।
जल गया दिल कबाब की मानिंद।

क्या कोई शय फ़राज़ है जग में।
उनके ह़स्न-ओ-शबाब के मानिंद।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • वफ़ादार नहीं थे | Wafadar Shayari

    वफ़ादार नहीं थे ( Wafadar nahi the )  बहर-मफऊल -मुफाईल-मुफाईल-फऊलुन   कुछ दोस्त हमारे ही वफ़ादार नहीं थे वरना तो कहीं हार के आसार नहीं थे ख़ुद अपने हक़ों के हमीं हक़दार नहीं थे हम ऐसी सियासत के तलबगार नहीं थे झुकने को किसी बात पे तैयार नहीं थे क्यों हम भी ज़माने से समझदार…

  • एक दिलदार अपना | Ek Dildar Apna

    एक दिलदार अपना ( Ek Dildar Apna ) रखा है सहेजे हुए प्यार अपनाक़िताबों में गुल एक दिलदार अपना मुहब्बत कसौटी पे बिल्कुल ख़री हैतभी तो जताया है अधिकार अपना सनम देवता मैंने माना तुम्हीं कोकरो तुम भी इक रोज़ इज़हार अपना फ़लाने की बेटी सगी से भी बढ़करजो अस्मत लुटी दिल है बेज़ार अपना…

  • है इबादत मुहब्बत | Hai Ibadat Muhabbat

    है इबादत मुहब्बत ( Hai Ibadat Muhabbat ) है इबादत मुहब्बत, मुहब्बत करें शहर में क्यों किसी से अदावत करें मुल्क पर राज करना अलग बात है हो सके तो दिलों पर हुकूमत करें आँच आने न देंगें वतन पर कभी मिल के हम नेकियों की हिदायत करें दोस्तों से कहो आज फिर मुल्क के…

  • मुहब्बत का गुल | Muhabbat ki Poetry

    मुहब्बत का गुल ( Muhabbat ka gul )    करे तेरा रोज़ ही इंतिज़ार है गीता हुआ दिल तो खूब ही बेक़रार है गीता ख़फ़ा होना छोड़ दे तू मगर ज़रा दिलबर मुहब्बत की ही कर देगी बहार है गीता बना ले तू उम्रभर के लिये अपना मुझको मुहब्बत में तेरी डूबी बेशुमार है गीता…

  • चाहिए | Ghazal Chahiye

    चाहिए ( Chahiye )   जब से दिल धड़का है वो गुलफ़ाम तबसे चाहिए एक बस हां एक ही वो शख़्स रब से चाहिए। मेरी ज़िद है वो निगाहों से समझ ले बात सब उस दिवाने को मगर इज़हार लब से चाहिए। भर ले तू परवाज़ लेकिन क़ैद होना है तुझे बस बता बांहों की…

  • ज़फ़रुद्दीन ज़फ़र की ग़ज़लें | Zafaruddin Zafar Poetry

    “नभ में बिछड़ा सपना” ✈️ उड़ा था एक सपना आसमान की ओर,उम्मीदों से भरा, मुस्कानों का संजोर।अहमदाबाद से लंदन की थी राह,किंतु विधि ने रच दिया दुखों की चाह। हवा में था विश्वास, प्रगति की बात,किंतु पल में टूटा सब, हो गई रात।धुएं के गुबार में छुप गया जहान,जलते हुए आकाश में बुझ गई पहचान।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *