पहला प्यार (तीसरा भाग ) | Pahla pyar Hindi Kahani

पहला प्यार (तीसरा भाग )

#FIRST LOVE
             (An one sided love story)
         #पार्ट-3
                   #फेयरवेल पार्टी
                  ★★★★★★★
हम सब कोचिंग से लौटकर मेरे रूम पर आए। मेरे अलावा विनय,अंकुर,पवन चौरसिया, शैलेष निगम और आशीष हैं। हम लोगों ने साथ मे होटल में समोसे तो कई बार खाये हैं लेकिन सब मिलकर पार्टी आज पहली बार ही कर रहे हैं। हमने रास्ते से 2 लीटर की 2  Mountain Dew , कुरकुरे के पैकेट, डिस्पोजल ग्लास  खरीद लिए हैं। हम सब रूम पर आए। आंटी जी हमे आंखे फाड़े देखती रहीं। मैंने उनसे कहा कि हम सब पढ़ने आये हैं।
मैंने चटाई बिछा दी।वह सब वहीं पसर गए। मैं मेजबान होने के नाते अपने मेहमानों के लिए ग्लास भरने लगा। मैंने देखा शैलेश ने जेब से सिगरेट निकाली और सुलगा ली। मैंने इससे पहले उसे सिगरेट पीते हुए नही देखा था।
उसने दो कश लगाने के बाद सिगरेट आशीष को आफर की और वह बारी-बारी से उस सिगरेट को गोल घेरे में घुमाने लगे। मुझे और पवन को छोड़कर बाकी सभी ने अपने फेफड़ों की फ़िक्र किये बगैर घातक निकोटीन का डोज लिया। अब वह अधिक गम्भीर लग रहे हैं।
हम लोगों की चर्चा Physics, Chemistry, टॉप कालेज,रैंक से गुजरते हुए राजनीति, क्रिकेट और बाद में लड़कियों तक पहुंच गई। सबने अपनी-अपनी प्रेमकहानी सुनाई।मुझसे भी पूछा गया, मैंने टाल दिया। विनय मेरी किताबों की अलमारी में खोजबीन करने में लगा हुआ था। वह मेरी डायरी लेकर पढ़ने लगा। मैं थोड़ा डरा कि कहीं यह मेरी गोपनीय चीजें न पढ़ डाले।
“देखो इसे…कह रहा है मेरी कोई प्रेमकहानी नही है जबकि जनाब पूरी डायरी इसी से रंगे हुए हैं।” उसने  मेरे जज्बातों की परवाह किये बगैर डायरी का मुख्य पृष्ठ सबके सामने खोल कर रख दिया। कुछ दिनों पहले मैंने बेहद निजी लम्हों में डायरी के दोनों पन्नों को मिलाकर बड़े-बड़े अक्षरों में “तू बेवफा है जो मैं जान जाता तुझसे कभी भी………”लिखा था।
“अरे वह ऐसे ही है यार…ये गाना अच्छा लगता है इसलिए लिख दिया.” मैंने टालना चाहा।
अभी बात और बढ़ती इससे पहले शैलेश का फोन बजा।उसकी माँ का फोन है।
“कहाँ हो अभी??”
“एक दोस्त के यहाँ ग्रुप स्टडी चल रही है माँ!! “उसने हाथ में पकड़ी हुई सिगरेट विनय को देते हुए कहा।
जब तक वह फोन रखता तब तक बातचीत का विषय बदल चुका था।
                        #Mr. श्रीवास्तव
                        ◆◆◆◆◆◆◆◆
इस बीच मेरे नए पड़ोसी सामने के हाल नुमा कमरे में रहने आ गए हैं। मैंने उनकी अलमारी और एक बड़ा बक्सा ऊपर चढ़वाने में मदद की है। उनकी फैमिली में उनके बूढ़े पिता, दो लड़के और उनकी कंटाल पत्नी हैं।
शहर में रहना आसान है और मुश्किल भरा भी। अगर आपके पास अच्छी सरकारी नौकरी है, अपना मकान है तो यह शहर आपको हाथों-हाथ लेगा लेकिन अगर आप बेरोजगार हैं या कोई छोटी-मोटी प्राइवेट नौकरी कर रहे  तो यह शहर आपका जीना दूभर कर देगा।
मेरे नए पड़ोसी दिहाड़ी मजदूर हैं। उनका रोज का कमाना-रोज का खाना है। वह और उनका बड़ा बेटा किसी फैक्ट्री में जबकि छोटा बेटा फर्नीचर की दुकान पर काम करते हैं। मिसेज श्रीवास्तव अपने ससुर को दिनभर ताने मारती हैं। वह वृद्ध व्यक्ति दिनभर कमरे के बाहर बैठे रहते हैं।
शहर में बुढ़ापा किसी अभिशाप से कम नही होता खासकर जब परिवार में आय के स्रोत सीमित हों। Mr. श्रीवास्तव अपनी पत्नी को कुछ नही कहते । वह हद दर्जे तक जोरू के गुलाम हैं।
मुझे उन लोगों के यहाँ आने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। मैं वैसे भी अपना रूम बन्द रखता हूँ। उनके कमरे से लड़ाई-झगड़े की आवाजें आती रहती हैं इससे थोड़ी दिक्कत जरूर होती है लेकिन यह मेरे निर्दयी अकेलेपन से तो बेहतर ही है।
                   #मेरा वैरिफिकेशन
                   ◆◆◆◆◆◆◆◆◆
आज शाम सोमू मुझे बुलाने रूम पर आया है। शर्मा अंकल मुझसे बात करना चाहते हैं। मैं थोड़ा डरा।कहीं उन्हें पता तो नही चल गया कि मैं सामने वाली लड़की को ताकता हूँ।
“Good evening Uncle “ji” मैंने अंत मे “जी” जोड़ते हुए कहा। जब मैं डरा हुआ होता हूँ तो सामने वाले व्यक्ति को अधिक सम्मान देने लगता हूँ।
“बैठो!!”उन्होंने पास रखी कुर्सी को थपथपाते हुए कहा।
मैं सकुचाते हुए सावधान मुद्रा में उनके पास बैठ गया।
“किसकी तैयारी कर रहे हो??” उन्होंने पूछा।
“JEE एंट्रेंस की अंकल जी.”
“ये कैसा एग्जाम है?”
 मैंने उन्हें बताया।
मैंने सोचा इन्हें इतना भी नही पता। मुझे थोड़ा सन्देह भी हुआ कि वह सरकारी नौकरी कैसे पा गए।
“कहाँ रहते हो?” उन्होंने पूछा जब मैं अपने ही ख्यालों में गुम था।
मैंने उन्हें अपना पता बताया। वह डायरी में नोट करते रहे।
“कोई ID प्रूफ??”उन्होंने अगला सवाल दागा ।
मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे वह कोई ATS अधिकारी हों और मैं तिहाड़ जेल तोड़कर भागा हुआ मोस्ट वांटेड आतंकवादी, जो उनके मकान में रहते हुए शहर को उड़ाने की योजना बना रहा हो।
“अभी 18 का नही हूँ अंकल जी..अभी पहचान पत्र नही बना”
“हुंह!!”उन्होंने ठोड़ी सहलाते हुए कहा।
“तुम्हारे कुछ दोस्त पिछले दिनों यहां आए थे??” उन्होंने पूछा।
उन तक यह बेहद जरूरी सूचना पहुंचा दी गयी थी।
हां!!वह सभी आतंकवादी हैं। और  जल्दी ही हम इस शहर को राख में बदलने वाले हैं। मैंने गुस्सा होते हुए मन ही मन कहा।
“हां अंकल जी!!ग्रुप स्टडी चल रही थी” मैंने प्रत्यक्ष तौर से कहते हुए शैलेश के शब्द दोहरा दिए। अगर मैं उनसे यह कह देता कि हम पार्टी कर रहे थे तो वह पागल ही हो जाते।
“वो सिगरेट भी पीते हैं???” उन्होंने पूछा।
“न..नही तो अंकल जी!!!” मैंने सोचा उन तक ये बात कैसे पहुंची। क्या सिगरेट की गंध आंटी जी सूंघ रही थीं या फिर कोई smell डिटेक्टर उन्होंने मेरे रूम में लगा रखा है।
“देखो!!तुम पढ़ने आये हो..मेरे मकान में यह सब नही चलेगा।” उन्होंने हिदायत दी।
उन्हें मौज-मस्ती से सख्त नफरत है यह तो मैं जानता था। मैंने सोचा क्या उन्होंने कभी दोस्त बनाये होंगे..मौज-मस्ती की होगी!!! मैंने उनका चेहरा देखा।नही!! इस व्यक्ति ने कभी मौज-मस्ती नही की। उनके चेहरे में एक स्थायी चिड़चिड़ापन है। मुझे नही लगता वह कभी हंसे भी होंगे।
“ठीक है.. अंकल जी” मैंने कहा,यह उम्मीद करते हुए कि जल्दी ही मेरा “सत्यापन” खत्म हो जायेगा।
“ठीक है!!अब तुम जाकर पढ़ाई करो”उन्होंने कहा।
मैंने लम्बी सांस ली और उनके कमरे से बाहर आ गया।
                               #अप्रैल
                               ◆◆◆◆
                     #एग्जाम नजदीक आना
                    ★★★★★★★★★★
एग्जाम के करीब 1 महीने और बचे हैं जैसे-जैसे वह नजदीक आते जा रहे हम सबपर प्रेशर भी बढ़ता जा रहा है। मेरा कोर्स लगभग पूरा हो चुका है।कुछ कठिन चैप्टर ओमर सर ने छुड़वा दिए थे उनको पढ़ना बाकी है। अब रिवीजन और प्रैक्टिस सेट लगातार हल करते रहने हैं।करीब 10 दिन की क्लासेस और बची हैं और इतने ही दिन मुझे इस शहर में रहना है।
निशा अब दिन में मुश्किल से 1-2बार ही दिखती है। ऐसा नहीं है कि मैं उसे देखने की कोशिश नही करता लेकिन एग्जाम भी सिर पर हैं और इस बार मुझे अच्छी रैंक लाना है। यह मेरा खुद से वादा है। अब मैं पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे रहा हूँ हालांकि पढ़ते वक्त बार-बार मन भटकता है और बेचैनी उठती है। ऐसा लगता है जैसे मेरी कोई चीज सामने वाले मकान में छूट गयी है।
                     #कुछ दिन_बाद
                        ◆◆◆◆◆◆
मैं चाहता हूं कि निशा से बात करूं लेकिन कोई जरिया मुझे सूझ नही रहा। मैंने तय किया है कि जब भी वह छत पर आएगी मैं उससे बात करूंगा। अब मैं उसका छत पर इंतजार करने लगा हूँ। मुझे वह कल शाम से नही दिखी। मैंने सोचा शायद पढ़ाई में व्यस्त होगी। आज पूरा दिन यूं ही गुजर गया,वह नही दिखी। आज गुरुवार है और मेरी क्लासेस शनिवार तक ही हैं। संडे को मैं यह कमरा छोड़कर गांव वापस चला जाऊंगा।
                       #शुक्रवार
                      ★★★★
मैंने सोमू को अपने रूम में बुलाया है। मैंने उससे निशा के बारे में पूछा । उसने बताया कि दीदी अपनी नानी के यहां गर्मियों की छुट्टियां बिताने चली गयी हैं। मुझे धक्का लगा है।
“अब वह कब आएंगी?”
“मालूम नही भैया!!शायद 1-2महीने बाद ही आएंगी”
मैं उससे पूछना चाहता हूं कि उसकी नानी कहाँ रहती हैं। लेकिन  मैंने नही पूछा। उसे भी पता नही है।अब कोई फायदा नहीं।
मुझे बहुत अजीब लग रहा है। अब यह जगह,यह कमरा,रेलिंग,उसकी छत सब मेरे लिए व्यर्थ हैं। मैंने सोमू को जाने दिया।
                         #शनिवार
                         ◆◆◆◆◆
पिछली रात मैं बिल्कुल भी सो नही सका हूँ। किताबें सामने खुली रहीं लेकिन कुछ भी नही पढ़ा। सारी रात मेरा दिल और कमरे का बल्ब जलता रहा।
                            #सुबह
                             ◆◆◆
आज कोचिंग का अंतिम दिन है। मैं कोचिंग जाने के लिए तैयार हूँ। मैंने सारा सामान समेट कर रख दिया है। अब मैं यहां वापस लौट कर नही आऊंगा। वैसे मुझे कल तक रुकना था लेकिन अब इच्छा नही है।
मैंने बैग टांगा और रेलिंग का गेट बन्द करने आया। मुझे याद आ गया है ऐसी ही स्थिति में मैंने उसे पहली बार देखा था।मैं वहीं खड़ा हो गया। यहीं से हमारी(sorry!! सिर्फ मेरी) मोहब्बत की शुरूआत हुई थी ।
इसी जगह ने मुझे इन 3 महीनों में अपार खुशियां भी दीं और बेइंतहा दर्द भी दिया। हां!! अब इसे छोड़कर जाना होगा। मेरी आँखें भर आयी हैं। मैं कुछ देर और रुका। रुमाल से आंसू पोंछे और गेट लॉक कर दिया। अलविदा!! अब ये हाथ दोबारा इस गेट को नही खोलेंगे।
मैं कोचिंग आ गया। आज यहां कुछ खास पढ़ाई नही होनी। ओमर सर ने हमे एग्जाम में “क्या करना है” और “क्या नही करना है” इसके बारे में बताते रहे। अंत में उन्होंने हम सभी को शुभकामनाएं दीं।हमने उनका आशीर्वाद लिया और बाहर आ गए। वह कमरा,रेलिंग,कोचिंग सेंटर और ओमर सर को छोड़ने के बाद अब अपने दोस्तों को अलविदा कहने की बारी है। यह मुश्किल है।हम लोगों ने कई यादगार पल एक साथ साझा किए हैं। हम लोगों ने एक-दूसरे के फोन नंबर एक्सचेंज किये और लगातार टच में रहने का वादा किया।
अब मैं जल्द से जल्द इस शहर को छोड़ देना चाहता हूँ। मैं वहां से सीधा हाइवे पर आया और बस पकड़ ली।
                           #गांव_में
                           ◆◆◆◆
मैं गांव आ गया हूँ। अब यहीं रहकर एग्जाम की तैयारी कर रहा हूँ। अब मेरा उस गली,उस मकान, उस कमरे में जाने का मन नही है। मैंने अपने घरवालों और दोस्तों से कहा है कि वह मेरा सामान मेरे रूम से ले आएं जो कि बमुश्किल 2 बड़े बैग में आ जायेगा।
मैं दिन-रात तैयारी में ही लगा रहता हूँ। मैं बस मेहनत और मेहनत करना चाहता हूँ। मैं किताबों मे अपने को डुबो देना चाहता हूँ ताकि गुजरे हुए लम्हों को याद करने का समय ही न मिले। मैं काफी हद तक इसमें कामयाब हुआ हूँ।
हां!! मैं ये भी जानता हूँ कि वह लड़की मेरे दिलोदिमाग में हमेशा बसी रहेगी चाहे लाख कोशिश कर लूं उसकी यादें,उसका चेहरा,उसका मुस्कुराना,रेलिंग पर मेरी ओर चलकर आना ताउम्र भुला नहीं पाऊंगा……..
#DISCLAIMER
  ★★■★★■★■
 मैंने कहानी को कहानी बनाने के लिए काल्पनिकता का खुल कर उपयोग किया है। कहीं-कहीं भावनाएं जाहिर करते वक्त भूल गया हूँ कि कहानी लिख रहा या उपन्यास। इसलिए कहानी थोड़ी लम्बी हो गयी है।आशा है पाठकगण मेरी अनुभवहीनता को समझते हुए”Adjust” कर लेंगे।
#आभार
★★★★
मेरे मकान मालिक को।आपके कमरे में रहते हुए ही मैंने पहली बार”मीठे दर्द” का अनुभव किया।
……….और अंत मे यह उम्मीद करते हुए कि आप दोबारा मुझे कमरा नही देंगे।

(bhupendra142dwizz@gmail.com)

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