मैं अक्सर

मैं अक्सर

मैं अक्सर

 

मैं अक्सर

गली में बजती

तुम्हारी पायल के घुँघरुओं की

रुनझुन से समझ लेता हूँ

तुम्हारा होना……

 

बजती है जब-जब

सुबह-शाम या दोपहर

जगाती है दिल की धड़कन

और देखता हूँ झांक कर

बार बार दरवाजे से बाहर…….

 

बहुत बेचैन करती है मुझे

छनकती तुम्हारी पायल

और खनकती पायल के साथ

धड़कती है मेरी धड़कनें

तुमसे दो बातें करने को……..

 

?

कवि : सन्दीप चौबारा

( फतेहाबाद)

यह भी पढ़ें :

मैं तुम्हारे प्रेम में

 

Similar Posts

  • कितने कर चुकाये | Kitne kar chukaye

    कितने कर चुकाये ( Kitne kar chukaye )   आयकर खाय कर खरीद कर पक गए आम आदमी यहां कर चुकाते थक गए   भूमिकर मकान कर संग दुकान कर दे दिया कितना कमाया उसका भी कर ले लिया   खरीद कर बेच कर सेवा कर रुक गए कितने कर चुकाये कर चुकाते थक गए…

  • बादल आषाढ़ के | Baadal Ashad ke

    बादल आषाढ़ के ( Baadal Ashad ke ) घिर आए फिर बादल आषाढ़ के, हे जलज मेघ तो अब बरसाओ, तपते जेठ से अब त्रस्त हुए सब तुम कुछ राहत तो अब पहुचाओं।। तुम्हारे बिना सुनी थी हरियाली मन में ना कोई भी थी खुशहाली ! प्यासी धारा तप रही चहूं ओर से, तुम बिन…

  • नेह शब्द नही | Neh Shabd Nahi

    नेह शब्द नहीप्रसंग का विषय नहीयह दृष्टिगोचर नही होतायह कहा भी नही जातायह सिर्फ और सिर्फअनुभूत करने का माध्यम हैयह अन्तरतम मेंउठा ज्वार हैनितान्त गहराजिसमें केवल समाहित होना हैउसके बाद फिर होश ही कहाँ रहता हैयह एक ऐसा आल्हाद हैजिसको शब्दातीत, वर्णातीतनही किया जा सकता।यह शब्दों के बंधनों में नहीं बंधतासिर्फ अनुभूत किया जा सकता…

  • मोहब्बत का जादू | Kavita Mohabbat ka Jadu

    मोहब्बत का जादू ( Mohabbat ka Jadu ) तेरी मोहब्बत का जादू, जैसे बहार की पहली किरण, तेरे बिना ये दिल मेरा, जैसे सूनी हो हर बगिया की चिरन। तेरे हंसने की आवाज़, संगीत की मधुर लहर है, तेरे बिना ये जीवन, जैसे बिना रंगों का सफर है। तेरे संग बिताए लम्हे, वो चाँदनी रातों…

  • कर्तव्य पथ पर | Kavita Kartavya Path Par

    कर्तव्य पथ पर ( Kartavya path par )    मैं डट कर स्थिर खड़ी रहूँगी, कर्तव्य पथ पर निरंतर चलूंगी। किसी प्रहार से कोशिश छोडूंगी नहीं। हाथ किसी के आगे जोडूंगी नहीं, वरदान किसी भगवान से माँगूंगी नहीं।। परिस्थितियां चाहे जो कर ले, समय से मात खा कर गिरूँगी नहीं। हवायें चाहे अपना रुख मोड़…

  • मेरे हमसफर | Mere Humsafar

    मेरे हमसफर ( Mere humsafar )   पुष्पक्रम से भरी पगडंडी जो कि– रंगीन फुलवारी से सजी जिसकी भीनी-भीनी महक पूरे वातायन में हवा में तैरती है। वहीं उन पर अनगिनत तितलियाँ मंडराती हुई अहसास कराती तुम्हारे अपने होने का। जहाँ तक देखती हूँ उन्हें कैद कर लेना चाहती हूँ इन रंगीन खुशबू को भी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *