Meri maa par kavita

माँ का अंश | Maa ka ansh par kavita

माँ का अंश

( Maa ka ansh )

 

साँसों का चलना ही जीना होता तो मकसद क्यूं बनते,
आपका जाना भी मकसदों का मिटना है माँ- थोड़े और दिन तो मेरे मकसदों का हिस्सा बनते।
मैंने पाया है चाहे लाख गुना, पर दिल की गुज़ारिशों के आगे सब फीके लगते,
आपका अंश मैं आप ही का हूँ- साँसों की तरह कुछ और दिन मेरे साथ तो चलते।
एक अरसे से आपकी आवाज़ ना सुनी,
कुछ और वक़्त मेरी ख्वाहिशों की आवाज़ तो बनते
राह अधूरी सी लगती है बिन आपके
मंज़िल पाने तक मेरी राह तो बनते।
मेरी हसरतो का मैं क्या करू
जो आप नही हो शामिल इनमे
इन हसरतों मे खुद को शामिल तो करते।
मैं रोवूँ समंदर भरके हरदम
मेरे आंसुओं को आँखों से पोंछकर दूर तो करते।
मैं वाक़िफ़ भी ना था आपके जाने से
कम से कम एक बार जाने का ज़िक्र तो करते
बहते पानी मैं ठहरा सा हूँ मै
मुझे साहिल तक अपने साथ ले चलते।।

अमित कालावत “अमु”
( जयपुर )  राजस्थान

यह भी पढ़ें :-

जीवन यही है | Poem jeevan yahi hai

Similar Posts

  • माता वैष्णो देवी का धाम | Mata Vaishno Devi

    माता वैष्णो देवी का धाम ( Mata Vaishno Devi ka dham )    त्रिकुटा की पहाड़ियों पर एक गुफ़ा में है ऐसा स्थान, काली सरस्वती लक्ष्मी माता वहाॅं पर है विराजमान। करीब ७०० वर्ष पहले बनवाया यें मंदिर आलीशान, पं श्रीधर ऐसे भक्त हुये थें नहीं कोई जिनके समान।। है विश्व प्रसिद्ध मन्दिर यह माता…

  • अहं का नशा

    अहं का नशा नशा मदांध कर देता हैमनुष्य जन्म का मूलउद्देश्य ही भुला देता हैजो उड़ते है अहं के आसमानों मेंज़मीं पर आने में वक़्त नही लगताहर तरह का वक़्त आता है ज़िंदगी मेंवक़्त गुज़रने में वक़्त नही लगता हैंनशा जहर से ज़्यादा घातक हैअहं का नशा हावी हो ही जाता हैऔर उनके विवेक पर…

  • जिंदगी को महकाना | Tyohar Par Kavita

    जिंदगी को महकाना ( Zindagi ko mehkana )   त्योहारों के दिन आते ही गरीब की मुश्किलें बढ़ती जाती है अच्छे कपड़े,अच्छे भोजन नाना प्रकार के सामग्रियों की जरूरत गरीब की कमर तोड़ देती है अभावग्रस्त जीवन चूल्हे की बुझी राख भूख और बेचारगी से बिलखते बच्चे हताशा और निराशा के अंधेरे में तड़फता बिलबिलाता…

  • संदीप कुमार की कविताएं | Sandeep Kumar Hindi Poetry

    अधूरी चाहत, अमर प्रेम तेरे लिए दिल हमारा,कल की तरह ही धड़कता है।साँसें सँवरकर, रुक-रुक कर,तेरी ही बातों पर मरता है। रूप तेरा चाँद-सा,चाहत में हर पल निखरता है।पतझड़, बसंत, बहार-सा,गुलशन में याद तिरी महकता है। धूप में तन्हा, उदास,जल-जलकर मन रह जाता है।तू बदल जा, जा बेख़ौफ़,लेकिन दिल तुझ पर तरसता है। यह दिल…

  • प्यार की लक्ष्मण रेखा | Poem pyar ki lakshman rekha

    प्यार की लक्ष्मण रेखा ( Pyar ki lakshman rekha)    तपती ज्वालाओं के दिन हों या ऋतु राज महीना। मेरे प्यार की लक्ष्मण रेखा पार कभी मत करना। नभ समक्ष हो या भूतल हो, तुम मेरा विश्वास अटल हो, रहे पल्लवित प्रेमवृक्ष यह चाहे पड़े विष पीना।।मेरे.. जब जब फूल लगेंगें खिलने, अंगारे आयेंगे मिलने,…

  • चक्र जो सत्य है

    चक्र जो सत्य है कुछ भी अंतिम नहीं होता,न स्पर्श , न प्रकृति और न कविता ,बस दृष्टिकोण बदल जाता हैक्योंकि, चक्र जीवन , पवन , गुरुत्वाकर्षण काअनवरत सहयात्री बन धरा को थामे ,खड़ा है पंच तंत्र के केंद्र पर तन्हा,पूछताक्या मजहब पेड़ , पानी, धरा, पवन , आकाश का ,लिखा है किसी ने बस…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *