मूहूर्तवाद | Muhurtvad

आज जहां देखो वही मुहूर्त बताने वाले भविष्यवक्ताओं की लाइन लगी हुई है। सुबह-सुबह जब हम टीवी खोलते हैं तो यह भविष्यवक्ता जिनके खुद के भविष्य का कुछ नहीं पता संसार के भविष्य को बताते फिरते हैं। इन भविष्यवक्ताओ ने जितना नुकसान किया है हो सकता है और किसी ने नुकसान नहीं किया हो।

देश की हजारों वर्षों की गुलामी के प्रमुख कर्म में यह भविष्यवक्ता ही जिम्मेदार थे। कहां जाता है महमूद गजनवी ने जब सोमनाथ के मंदिर पर चढ़ाई की ।गजनी की फौज की अपेक्षा राजपूत की सेना कहीं अधिक बड़ी और कहीं अधिक साधन संपन्न थी ।

परंतु जब आक्रमण हुआ तो पंडितों ने कहा ,-” अभी प्रत्यक्रमण करने का मुहूर्त नहीं है । इस समय लड़ेंगे तो हार जाएंगे । इसलिए अभी इतने समय और ठहरना चाहिए । ”

उन दिनों भला ज्योतिषी की बात कौन टाल सकता था। राजपूतों को चुप बैठना पड़ा । फलस्वरुप गजनी का आक्रमण सफल हुआ । उसने शिव प्रतिमा के टुकड़े-टुकड़े कर दिए। प्रचुर संपत्ति लूटा और हजारों नर नारी को कैद कर लिया जिन्हें गजनी के बाजार में गुलाम बनाकर एक-एक रुपए में बेच दिया। इस मुहूर्त वाद के अभिशाप ने भारतीय इतिहास में एक कलंक का पृष्ठ और जुड़ गया।

ऐसे ही एक और ऐतिहासिक घटना है जिसमें मुहूर्तवाद के चक्कर में देश गुलामी की जंजीरों में और जकड़ता गया।

कहा जाता है बख्तियार खिलजी ने बंगाल पर चढ़ाई की ।वहां का राजा ज्योतिषियों का अंधभक्त था। बिना पूछे वह पत्ता भी नहीं तोड़ता था। यह जानकारी खिलजी को मिल गई । उसने राज ज्योतिषियों को गहरी रिश्वत देकर अपने पक्ष में मिला लिया ।

उसने कह दिया अभी लड़ने का मुहूर्त नहीं है । लड़ेंगे तो हार जाएंगे राजा कोई और उपाय न देखकर राज्य छोड़कर चुपचाप भाग गया। और बख्तियार खिलजी बिना लड़ाई किये ही बंगाल का राजा बन गया।

इसी प्रकार की एक और ऐतिहासिक घटना है। जिसका कलंक आज 500 साल बाद धूल सका। कहां जाता है बाबर ने भारत पर आक्रमण किया । लड़ाई प्रारंभ हो गई ।

इसी अवसर पर एक ज्योतिषी ने बाबर से कहा ,-“अभी आप कुछ दिन ठहरे , अभी ग्रह गणित आपके प्रतिकूल है ।अमुक दिन अच्छा मुहूर्त है। तब आप लड़ेंगे तो विजयी होंगे ।”
बाबर ने इस बात को टाल दिया और दूसरा प्रश्न पूछा,–” आप तो ज्योतिष के आधार पर अनेक बातें बता सकते होंगे ।”
उसने कहां ,-“हां !”

बाबर ने अपने सेनापतियों और मंत्रियों को बुलाकर कहा,–” यदि मेरी तलवार से इसका सिर ना कटे तो ज्योतिषी की बात सच्ची मानना चाहिए और लड़ाई रोक देनी चाहिए। पर यदि इसका सिर कट जाए तो समझना चाहिए कि ज्योतिष झूठ है और फिर भविष्य में किसी भविष्यवक्ता की बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए । ”

बाबर ने तलवार के एक ही झटके में ज्योतिषी का सर उड़ा दिया और अपने साथियों से कहा,—” जो अपनी आयु 37 वर्ष बाकी बताता था किंतु एक घंटा भी जीवित न रह सका । उसने भविष्यवक्ताओ की बात पर विश्वास करना मूर्खता समझा और बाबर ने लड़ाई जारी रखी और अंततः वह जीत भी गया।

बाबर की जगह यदि कोई भारतीय राजा होता तो भविष्यवक्ताओं के चक्कर में लड़ाई को बंद कर देता और जीती हुई बाजी हार जाता।

इस प्रकार की ऐतिहासिक घटनाएं हमें यह सचेत करती हैं की शुभ- अशुभ दोनों के जंजाल उलझन में ना तो कोई बुद्धिमता है और ना कोई तथ्य । मनुष्य को चाहिए कि इस प्रकार के मूर्खतापूर्ण भविष्यवक्ताओं का चक्कर छोड़ें।

यह तो ऐतिहासिक घटनाएं थी लेकिन सामान्य दिनों में भी मनुष्य मुहूर्तवाद के चक्कर में अपना धन धर्म सब कुछ गवाता रहता है।

किसी विशेष मुहूर्त में होने वाली शादियों में देखा गया है कि उन दिनों रेल, मोटर गाड़ियों में इतनी भीड़ हो जाती है की जगह मिलना मुश्किल हो जाता है।

बाजार में खाद्य पदार्थों के दाम दुगने से तिगुने हो जाते हैं ।हलवाई ढूंढे नहीं मिलता है। धर्मशाला गेस्ट हाउस सभी भरे रहते हैं। बैंड बाजा डीजे आदि चीज ढूंढे नहीं मिलती। यहां तक की विवाह पढ़ने वाले पंडित तक का अकाल पड़ जाता है।

इस अंधाधुंध भीड़भाड़ में हर किसी को असुविधा होती है। आजकल पढ़ा लिखा भी इस मुहूर्तवाद के चक्कर में अंधा बना हुआ है। कई कई तो ऐसे हैं होते हैं मुहूर्तवाद के नशेड़ी की अपना कोई भी काम बिना मुहूर्त देखें करते ही नहीं चाहे उनका कितना भी नुकसान हो जाए।

अक्सर मुहूर्त बताने वालों के चक्कर में भारत में शादियां परेशानी का कारण ही बनती हैं। जनता को चाहिए कि वह मुहूर्त वाद के चक्कर में न फंसे । सभी दिन परमात्मा ने निर्मित किए हैं। इसलिए कोई भी दिन अशुभ नहीं हो सकता है । सब दिन शुभ ही शुभ है। इन पोथी पत्र लेकर मुहूर्त बताने वालों से जनता को बचाने की आवश्यकता है।

जब से मीडिया का प्रचलन बढ़ा है। मुहूर्त बताने वालों की जैसे भीड़ लग गई है। सुबह-सुबह ही अपना गला फाड़ने लगते हैं। इस राशि वालों के लिए यह शुभ है यह अशुभ है। वास्तविक रुप में देखा जाए तो यह राशिफल कुछ नहीं होता है।

कुल रशियन 12 होती हैं।भारत की जनसंख्या के हिसाब से भी देखा जाए तो एक राशि में 12 करोड़ लोग आते हैं। अब 12 करोड लोगों का एक ही जीवन पद्धति और भविष्य कैसे एक हो सकता है। सामान्य बुद्धि से भी सोचने पर यह दिखाई देता है कि यह मात्र मूर्ख बनाने का धंधा है। इसमें जितना पढ़ा लिखा है , उतना ही अंधा है।

 

योगाचार्य धर्मचंद्र जी
नरई फूलपुर ( प्रयागराज )

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