Mujhe Awaz Dena

मुझे आवाज देना | Mujhe Awaz Dena

मुझे आवाज देना 

( Mujhe awaz dena )

 

बजने लगे मन के सितार, साज सारे मचलने लगे।
मेरा नाम अधरों से जब, शब्द सारे थिरकने लगे।
मुझे आवाज देना साथी, मिल जाऊंगा मैं राहों में।
खुशियों के दीप जलाऊं, प्रिय तुम्हारी निगाहों में।
मुझे आवाज देना

थामें रखना दिल की धड़कन, वादियों बहारों में।
चांद सा दिल तुम्हारा, ढूंढता रहा मैं सितारों में।
जब चले पवन पुरवाई, तुम हवाओं से कह देना।
याद मेरी जब आई, सनम धड़कनों से कह देना।
मुझे आवाज देना

मस्त पवन का मैं झोंका, सावन की घटा बन जाऊंगा।
छूकर तेरे रोम रोम को, खुशियों की छटा बन जाऊंगा।
मुश्किलों का दौर आए, हंसकर बाधाओं को सह लेना।
प्रीत का सागर उमड़ता, तुम भी सरिता बनकर बहना।
मुझे आवाज देना

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

ढलती रात | Dhalti Raat

Similar Posts

  • लगा आज | Geet Laga Aaj

    लगा आज ( Laga Aaj ) लगा आज हँसने का दिन हैै , उसके मन बसने का दिन है . निकल गए जो बच राहों से , फिसल गए बहकी बाहों से . वे लम्हे कसने का दिन है . पड़ी चमेली अब ये झुलसी , तुलसी भी अब लगती हुलसी . गर्मी में चसने…

  • मुह़ब्बत | Muhabbat

    मुह़ब्बत ( Muhabbat ) न हीरों की खानें,न पन्नों के पर्बत। मुह़ब्बत से बढ़ कर नहीं कोई दौलत। बिना इसके कुछ भी नहीं ज़िन्दगी में। न हो यह तो क्या लुत्फ़ है बन्दगी में। यही चैन देती है हर इक नज़र को। इसी से चमकती है इन्सां की क़िस्मत। मुह़ब्बत से बढ़कर नहीं कोई दौलत।…

  • नयनों के तारे आजा | Naino ke Tare Aaja

    नयनों के तारे आजा ( Naino ke Tare Aaja )   नयनो के तारे आजा, बुढ़ापे के सहारे आजा। दूध का कर्ज चुकाने, बेटे फर्ज निभाने आजा। नयनो के तारे आजा खूब पढ़ाया तुमको, लाड लडाया तुमको। अंगुली पकड़कर, चलना सिखाया तुमको। तुतलाती बोली प्यारी, शीश झुकाने आजा। ताक रही आंखें रस्ता, झलक दिखाने आजा।…

  • देख लिया | Geet Dekh Liya

    देख लिया ( Dekh Liya ) अन्तस लहरों में ज्वार उमड़ता देख लिया। उनकी आँखों में प्यार छलकता देख लिया ।। कैसी सुगंध यह फैल रही उर-उपवन में। जब खिला सरोवर में कोई जलजात नहीं। किसने इस मन को बाँध लिया सम्मोहन में। साँसें महकीं या प्राण जले कुछ ज्ञात नहीं । अब डोल रहा…

  • थोड़ा सा | Geet Thoda Sa

    थोड़ा सा ( Thoda Sa ) थोड़ा सा अखबार पढ़ा फिर , बैठ गया तह करके . जो भी मुँह में आया मुखिया , चला गया कह करके . बाएँ – दाएँ देखा उसने , हँसी खोखली हँसकर . निकल गई ज्यों कील जिगर से, कुछ अंदर तक धँसकर . मुख पर थोड़ा दर्द न…

  • सावन आया तू भी आ जा | Geet Sawan Aaya

    सावन आया तू भी आ जा ( Sawan aaya tu bhi aaja ) सावन आया तू भी आ जा। मेरे मन की प्यास बुझा जा। कैसी ह़ालत है क्या बोलूं। तू जो बोले तो लब खोलूं। पल भर मेरे पास में आ कर। मेरी सुन जा अपनी सुना जा। सावन आया तू भी आ जा।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *