नफ़रतों के ये नजारे नहीं अच्छे लगते

नफ़रतों के ये नजारे नहीं अच्छे लगते

नफ़रतों के ये नजारे नहीं अच्छे लगते
खून से लिपटे हमारे नहीं अच्छे लगते

कद्र -जो मात- पिता की न किया करते हैं
अपने ऐसे भी दुलारे नहीं अच्छे लगते

जान लेती हैं हमारी ये अदाएँ तेरी
यूँ सर -ए बज़्म इशारे नहीं अच्छे लगते

जिनमें ज़हरीले से दाँतों की रिहाइश हो बस
साँप के ऐसे पिटारे नहीं अच्छे लगते

होश खोकर जो ज़मीं पर ही गिरा करते हैं
टूटते हमको ये तारे नहीं अच्छे लगते

जो यकायक ही सियासत में निकल आते हैं
इंतेख़ाबों के वो नारे नहीं अच्छे लगते

सादगी भी तो कभी दिल है लुभाती मीना
हर घड़ी चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • प्यार नीलाम हुआ | Ghazal Pyar Neelam Hua

    प्यार नीलाम हुआ ( Pyar Neelam Hua )   प्यार नीलाम हुआ अक्ल के दानाई में जीत का जश्न मनाता है वो हाराई में II चाल पे चाल चला शर्म निगाहों से गुम आज हम चौक गए सोच के तन्हाई में II यक-ब-यक तोड़ रहा आज मरासिम जो वो बेअसर वक्त भी होगा कभी भरपाई…

  • दीप जले | Diwali Hindi Shayari

    दीप जले ( Deep Jale )    बरसों की रस्म पुरानी दीप जले है आयी वो रात सुहानी दीप जले है ख़ुशियों की है आज बहारें हर घर में महकी रात कि ही रानी दीप जले है चैधा वर्ष बाद लौटे है राम अयोध्या उत्सव की एक निशानी दीप जले है बचपन के दिन भी…

  • पयाम-ए-इश्क़ | Payaam-e-Ishq

    पयाम-ए-इश्क़ ( Payaam-e-Ishq ) पयाम-ए-इश्क़ है ये दिल्लगी नहीं प्यारेहै दिल की बात कोई सर-ख़ुशी नहीं प्यारे गुनाह वो करें लेकिन सज़ा मिले हमकोये फ़ैसला भी ख़ुदा का सही नहीं प्यारे चमन से रुठी बहारें हैं एक मुद्दत सेयहाँ पे डाली कोई अब हरी नहीं प्यारे सुनाते दर्द ही दिल का हमेशा महफ़िल मेंये शायरी…

  • सुमन सिंह याशी की ग़ज़लें | Suman Singh Yashi Poetry

    ठोकर लाखों खाई  होगी ठोकर लाखों खाई  होगी । तब आख़िर टकराई होगी। ऐब गिनाने से पहले तुम ढूंढों, कुछ अच्छाई होगी II कितनी उम्मीदें आँखों में I पलती ले अंगड़ाई  होगी II जब आँखें ही मोल न समझे I तब आवाज उठाई होगी II यार खिलौना दिल मत समझो। एक दिन सब भरपाई होगी।।…

  • दिल लगा मत दिल्लगी में

    दिल लगा मत दिल्लगी में है सुकूँ बस दोस्ती में ! चैन उजड़े दुश्मनी में ए ख़ुदा पैसे मुझे दे जी रहा हूँ मुफ़लिसी में कौन मिलता प्यार से है अब नहीं उल्फ़त किसी में दे ख़ुशी अब तो खुदाया ग़म भरे है जिंदगी में हिज्र बस आज़म मिलेगा दिल लगा मत दिल्लगी में शायर: आज़म…

  • आज़म नैय्यर की ग़ज़लें | Aazam Nayyar Poetry

    रोज़ तेरी राह देखें ये नज़र है ? रोज़ तेरी राह देखें ये नज़र है ?हाँ मगर तेरी नहीं कोई खबर है जीस्त में आती नहीं कोई ख़ुशी यूँहाँ लगी कोई बुरी शायद नज़र है लौट आ परदेश से मिलने मुझे तूयार तेरी दोस्ती पक्की अगर है पर कहीं मिलता नहीं तेरा निशाँ भीढूंढ़ता तुझको…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *