कैसे हो दीदार सनम का | Deedar Ghazal

कैसे हो दीदार सनम का

( Kaise ho deedar sanam ka ) 

 

कैसे हो दीदार सनम का
पर्दे में जब प्यार सनम का

रुत मस्तानी हो और यूं हो
बाहें डालें हार सनम का

दिल दीवाना बन जाता है
ऐसा है मेआर सनम का

मीठा दर्द जगाये दिल मे
तीर लगे जब पार सनम का

दिल कहता, इज़हार न करना
जां लेगा इंकार सनम का

दिल जोरों से धड़क उठा है
आ पहुंचा है तार सनम का

फ़ैसल मांगे रब से दुआ ये
गुलशन हो गुलज़ार सनम का

 

शायर: शाह फ़ैसल मुजफ्फराबादी
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

जुमलेबाजी | Jumlebaazi


Posted

in

by

Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *