मुक़द्दर से सामना है मेरा

मुक़द्दर से सामना है मेरा | Muqaddar se Samna hai Mera

मुक़द्दर से सामना है मेरा

( Muqaddar se Samna hai Mera )

बड़े अजीब से मंज़र से सामना है मेरा
बग़ैर कश्ती समुंदर से सामना है मेरा

जहाँ जलाई गईं हसरतें मेरे दिल की
उसी चराग़ उसी दर से सामना है मेरा

अजीब दिल की ये हालत है क्या बताऊं तुम्हें
किसी हसीन के पत्थर से सामना है मेरा

क़दम क़दम पे बिछाये हैं जाल साज़िश के
न जाने कैसे सितमगर से सामना है मेरा

किसी तरह से जुटाया है हौसला मैंने
सितमनवाज़ के खंजर से सामना है मेरा

लुटा था जिसके इशारे पे मेरे दिल का जहां
उसी मिज़ाज के रहबर से सामना है मेरा

ये इम्तिहान है तशनालबी का अब मेरा
सुना है साक़ी ओ साग़र से सामना है मेरा

तमाम कोशिशें बेकार हो गयीं सागर
हुज़ूर अपने मुक़द्दर से सामना है मेरा

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

आज़ादी ऐ वतन का | Ghazal Azadi – e – Watan Ka

Similar Posts

  • माँगने लगे | Mangne Lage

    माँगने लगे ( Mangne lage ) जो देखे थे कभी, सभी वो ख़्वाब माँगने लगेवफ़ाओं का भी हाय, वो हिसाब माँगने लगे कली-कली को चूमते थे भौंरे शाख़-शाख़ पर,मगर जो देखे गुल तो फिर गुलाब मांगने लगे। भुलाके राह सच की, थे गुनाहों के जो देवतामुसीबतें पड़ी तो वो निसाब माँगने लगे चले वफ़ा की…

  • चाहता है तिरंगा | Poem on Tiranga in Hindi

    चाहता है तिरंगा ( Chahta hai tiranga )   सर भी झुकते हैं लाखों नमन के लिए जान देते हैं जो भी वतन के लिए सिर्फ़ नारों से क्या होगा ऐ दोस्तो रौनक़े बख़्श दो अंजुमन के लिए मेरे बच्चों से उनकी ख़ुशी छीन ली और क्या चाहिए राहज़न के लिए पीठ पर गोलियाँ तुम…

  • इस इश्क़ का | Iss Ishq Ka

    इस इश्क़ का ( Iss Ishq Ka ) इस इश्क़ का कोई भी फ़साना तो है नहींऔर गर हो कोई हमको सुनाना तो है नहीं पैग़ाम मिलता ही नहीं हमको ख़ुशी का यूँऔर ग़म मिले हैं कितने गिनाना तो है नहीं इस ज़िंदगी ने साथ हमारा नहीं दियाहम मुफ़लिसों का कोई ठिकाना तो है नहीं…

  • प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता

    प्रेम कभी झूठ नहीं बोलता प्रेम कभी झूठ नहीं बोलताना ही किसी का वो बुरा सोचता शांत कुशल सौम्य एवं संयमीशब्द बिना मौन से है बोलता साथ की आदत है एसी पड़ गयीपल भी अकेला वो नहीं छोड़ता दूर ही रहता है विवादों से वोफूट चुकी मटकी नहीं फोड़ता यार सृजनशील है सपने में भीखंडहरो…

  • जो नज़रों से गिर जाते हैं | Ghazal Shayari in Hindi

    जो नज़रों से गिर जाते हैं ( Jo nazron se gir jaate hain )    वो नफ़रत से घिर जाते हैं जो नज़रों से गिर जाते हैं मस्जिद में हैं अल्लाह वाले मयख़ाने काफ़िर जाते हैं कौन यक़ीं करता है उन पर जो बातों से फिर जाते हैं चालाकी से दूर रहा कर इस रस्ते…

  • जताते नहीं | Jatate Nahi

    जताते नहीं ( Jatate Nahi ) आज कल प्यार क्यों तुम जताते नहींरूठने पर मुझे क्यों मनाते नहीं हारना चाहती हूं मैं सब कुछ मगरप्यार के खेल में तुम हराते नहीं मैं तरसती ही रहती हूं लेकिनकान में चीखकर डराते नहीं मैं हूं तैयार पर आज कल तुम कभीप्रेम से उंगलियों पर नचाते नहीं कौन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *