मुसाफ़िराना है | Ghazal Musafirana Hai

मुसाफ़िराना है

( Musafirana Hai )

हम ग़रीबों का यह फ़साना है
हर क़दम ही मुसाफ़िराना है

यह जो अपना ग़रीबख़ाना है
हमको मिलकर इसे सजाना है

कितना पुरकैफ़ यह ज़माना है
रूठना और फिर मनाना है

बीबी बच्चों की परवरिश के लिए
जाके परदेश भी कमाना है

सारे घर के ही ख़्वाब हैं इसमें
यह जो छोटा सा आशियाना है

ज़ीस्त लेकर वहाँ ही जायेगी
जिस जगह उसका आबोदाना है

एक दूजे के साथ से हमको
मुश्किलों को सरल बनाना है

ज़िंदगी की कड़ी है धूप सही
खैर है सर पे शामियाना है

आज भी गुफ्तगू में ऐ सागर
उसका भाता मुझे लजाना है

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

यह भी पढ़ें:-

हक़दार नहीं थे | Ghazal Haqdaar Nahi The

Similar Posts

  • मेरी तलाश में है | Meri Talash Mein Hai

    मेरी तलाश में है ( Meri talash Mein Hai ) भटक रहा जो बराबर मेरी तलाश में है। सुना है मेरा वो दिलवर मेरी तलाश में है। किसी का प्यार मुकर्रर मेरी तलाश में है। ख़ुशी है मुझको, मुक़द्दर मेरी तलाश में है। ज़रा सा क़तरा हूँ लेकिन नसीब है मेरा, जो ख़ुद ही एक…

  • भागे है सब अदू | Bhaage hai Sab Adoo

    भागे है सब अदू ( Bhaage hai sab adoo )    भागे है सब अदू देख कश्मीर से काट डाले सभी देखो शमशीर से सैनिको ने बिखरे फूल हर राह पर है अमन प्यार की इस तासीर से चैन से हंस रहा देख कश्मीर अब सब मिटा डाले दुश्मन जागीर से दुश्मन आयेगा कश्मीर में…

  • हर लम्हा है हसीन | Ghazal Har Lamha

    मेरी ग़ज़ल ( Meri Ghazal ) मिलती सभी से मेरी ग़ज़ल दिलकशी के साथ शीरीं ज़ुबां है उसकी बड़ी चासनी के साथ हम जीते ज़िंदगी को हैं दरियादिली के साथ हर लम्हा है हसीन फ़क़त मैकशी के साथ बातें करेंगे वस्ल की और इंतिज़ार की इक़रार-ए-इश्क़ की सदा संजीदगी के साथ बीती सुख़नवरी में ही…

  • ग़ज़ल सम्राट विनय साग़र जी

    विनय साग़र जी वही उस्ताद हैं मेरे ग़ज़ल लेखक विनय साग़रजिन्हें है जानती दुनिया ग़ज़ल सम्राट साग़र जी हमारी भी ग़ज़ल की तो करें इस्लाह साग़र जीउसी पथ पर सदा चलता करें जो चाह साग़र जी बड़ा अनभिज्ञ हूँ मैं है नहीं कुछ ज्ञान भी मुझकोमगर हर पथ की बतलाते मुझे हैं थाह साग़र जी…

  • मैं सोचता रहा

    मैं सोचता रहा मैं सोचता रहा उसे जिस पल ग़ज़ल हुईफिर सर से पांव तक ये मुसलसल ग़ज़ल हुई कुछ तो नशा भी चाहिए था काटने को जीस्तऔर ऐक दिन मेरे लिए बोतल ग़ज़ल हुई भड़की है आग बन के जिगर में कहीं,कहींदिलबर के गोरे पांव की पायल ग़ज़ल हुई हफ़्तों कलम उठा न रक़म…

  • वो पहली मोहब्बत | Pehli Mohabbat

    वो पहली मोहब्बत ( Wo pehli mohabbat )   वो पहली मोहब्बत का बीता ज़माना याद आता है, वो छोटी-छोटी बातों पे रूठना मनाना याद आता है! ख्वाबों ख्यालों में रहना आसमान में उड़ने का मज़ा, हो दुनिया से बेख़बर इश्क-ऐ-फ़साना याद आता है! एक दूजे की आगोश में दिन रात का वक़्त गुजरना अपनी…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *