नरेन्द्र कुमार की कविताएं | Narendra Kumar Poetry
जरूरी है यह बात
जीवन में सफलता के लिए जरूरी है यह बात,
कहना न पड़े किसी को अच्छा से करो यह कार्य।
जब आपको प्रत्येक कार्य के लिए पड़े टोकना,
सफलता आपसे कोसों दूर है यह बात तू समझना।
नित्य क्रिया में भी जब नहीं है अनुशासन,
पशु ही हो तुम जो ढ़कता तन खाता है राशन।
दिखावे के चक्कर में जो मनुज फंस जाता,
उसके जीवन से सुख चैन शांति सादगी मिट जाता।
ब्रह्मचर्य का पालन और नित्य जो करता अभ्यास,
सफलता वह पाता सम्मान देता उसे सकल समाज।
इन बातों का रखो ध्यान नरेन्द्र बांध लो गांठ,
बाद में पछताए क्या होगा जब आयु होगी साठ।
गुस्सा में मत आना
आ रहा है गुस्सा? नफरत है किसी से?
स्वयं को तराशो उत्तम बनो दृष्टि से ,
नफरत और गुस्सा को ईंधन बना लो
हो जिस भी क्षेत्र में उच्च परिणाम दो।
न रखो नफरत न रखो बदले की भावना
अपनी ऊर्जा को इधर उधर व्यय करो ना,
है शिखर पर जाना, पाना है सम्मान
शांतचित्त हो निष्ठा के साथ करो श्रम महान।
लोग जो मारें ताना गुस्सा में मत आना
मुस्कान संग हर चुनौती अपनाना ,
निरंतर कर श्रम, छुपकर तैयारी
देख परिणाम, बधाई देगी दुनिया सारी।
रखो धैर्य, परिस्थिति चाहे जैसा रहे
सफल होगा तू काम होगा निश्चय ,
व्यग्र न हो जीवन में न रख संशय
दृढ़ संकल्प से ही मिलता है श्री विजय।
दृढ़ संकल्प से ही मिलता है श्री विजय।
जरूरी है यह बात
जीवन में सफलता के लिए जरूरी है यह बात,
कहना न पड़े किसी को अच्छा से करो यह कार्य।
जब आपको प्रत्येक कार्य के लिए पड़े टोकना,
सफलता आपसे कोसों दूर है यह बात तू समझना।
नित्य क्रिया में भी जब नहीं है अनुशासन,
पशु ही हो तुम जो ढ़कता तन खाता है राशन।
दिखावे के चक्कर में जो मनुज फंस जाता,
उसके जीवन से सुख चैन शांति सादगी मिट जाता।
ब्रह्मचर्य का पालन और नित्य जो करता अभ्यास,
सफलता वह पाता सम्मान देता उसे सकल समाज।
इन बातों का रखो ध्यान नरेन्द्र बांध लो गांठ,
बाद में पछताए क्या होगा जब आयु होगी साठ।
साईकल
साईकल की कहानी
है सदियों पुरानी
किसी ने इसकी पहिया बनाई
किसी ने ब्रेक बनाया
अनेक लोगो ने मिल इसे
सवारा-सजाया ,
इसकी उपयोगिता है अनेक
आमिर गरीब सभी के यहाँ
इसकी है पैठ
इसे न चाहिए लेन न ट्रेक
इसकी इरादा सादा है नेक ,
मानवता से है इसकी नाता
इसके नाम का यस
किसी को नहीं जाता ,
यह न है किसी देवी देवता की सवाड़ी
न है किसी कम्पनी विशेष की गाड़ी
यह वहाँ भी जाती है
जहाँ से मानवता आती है
साईकल की कहानी है
सदियों पुरानी।
“बारह महीने, बारह रंग”
१
चैत्र में फूलें आम के बाग़,
भौंरे गाएं राग-ओ-राग।
वैशाख में गर्मी आए,
नदी किनारे सब नहाए।।
२
ज्येष्ठ में सूरज खूब तपे,
पंखा झलें, सब छाँव में छपे।
आषाढ़ में बादल छाए,
किसान खेत में धान लगाए।।
३
श्रावण लाया भोले भक्ति,
कांवड़ियों की चाल है शक्ति।
भादों में गणपति आए,
ढोल बजाएं, सब नाचें-गाएं।।
४
आश्विन लाया दुर्गा माँ,
दस दिन तक है धूमधाम।
कार्तिक दीपों की रैना,
लक्ष्मी आईं घर में नैना।।
५
मार्गशीर्ष में ज्ञान बढ़ाएं,
गीता की बातें सब दोहराएं।
पौष में सर्दी झकझोर दे,
स्वेटर, टोपी सबको जोड़ दे।।
६
माघ में स्नान करें हर रोज़,
हरि का नाम, मन की सोच।
फागुन में रंगों की बौछार,
होली आई हँसी अपार।।
७
बारह महीने, प्यारे-प्यारे,
सबके रंग हैं न्यारे-न्यारे।
भारत माँ की ये पहचान,
मास सिखाएं प्रेम-ज्ञान।।
“रिश्तों का रिश्ता”
पापा के बड़े भाई हैं हमारे ताऊजी ,
और उनकी पत्नी बनी न्यारी ताईजी ।
पापा के छोटे भाई कहलाते चाचाजी,
उनकी अर्द्धांगिनी हमारी चाचीजी।
माँ के भाई को कहा जाए मामाजी,
संगनी उनकी कहलाती मामीजी।
माँ की बहन होतीं मौसीजी,
संग उनकी जो बैठे वह मौसाजी।
पापा की बहन हैं प्यारी बुआजी,
उनके जीवनसाथी होते फूफाजी।
माँ की माँ हैं, दुलार से भरी नानीजी
और जो शितलता का मिशाल नानाजी।
पूज्य दादा-दादी पापा के माता-पिता
उनके अनुभव से जीवन सरलता में बिता।
भाई हो छोटा या बड़ा, संग है वो खास,
बहन के बिना अधूरी है जीवन की प्यास।
भाभी होती बड़े भाई की जीवन संगिनी,
भावज होती अनुज की प्यारी धर्मपत्नी ।
जीजाजी हैं बहन के प्यारे पति,
हर त्यौहार पर लाएं हँसी खुशी ।
जिनकी होती शादी वह पति-पत्नी कहलाते,
घर गृहस्ती और सृष्टि को यही रिश्ता चलाते।
पत्नी के भाई को कहें सालाजी,
और उसकी पत्नी हो सालिन (सरहज) जी।
साली बनें पत्नी की बहन,
हँसी मज़ाक की हो वो धन।
आओ समझें पत्नी की नजर से और,
जहाँ रिश्तों का है एक भव्य ठौर।
पति के पिता होते हैं ससुरजी,
और माँ होतीं हैं सासु माँ जी।
पति का भाई देवरजी कहलाता,
बड़ा हो तो जेठजी नाम पाता।
जेठानी हैं जेठ की पत्नी महान,
देवरानी देवर की संगिनी जान।
पति की बहन बनती ननद प्यारी,
कभी सहेली, कभी हँसी की फुलवारी।
हर रिश्ता है एक अलग कहानी,
प्रेम आदर अपनापन की निशानी।
भारत की इस मनोहर रिश्तेदारी में,
छुपा है सारा संसार एक रिश्ते की क्यारी में।
हिन्द सेना का शौर्य
हिन्द की सेना कभी न हारी
इस बात को रखिए याद,
आज तक राजनीति जीत न पाई
सहती रही कुठाराघात।
यहाॅं करेंगे लोकतंत्र की बात
आगे रखेंगे राजतंत्र आवाज,
नेहरू जी बोले सेना क्यों चाहिए
शुक्र करो पाक दिखाया जात।
उन्हें अपना सेनापति नहीं चाहिए था
गर्व करो उस उस नायक पर जिसने कहा,
अगर आज प्रधानमंत्री कोई हो गोरा
कैसा लगेगा जरा बताईए आप।
वृहद सेना को लघु कर दिया आपने
सेनापति वरीयता का नहीं रखा ख्याल,
जिस तेवर को सहर्ष किया स्वीकार
नहीं आने दिया सैन्य क्षमता पर आंच।
सन उन्नीस सौ सैंतालीस-अड़तालीस हो
या हो उन्नीस सौ पैंसठ की बात,
सन एकहतर में कृतिमान किया स्थापित
निन्यानवे में दिया पुनः उन्हें मात ।
बासठ की परिणाम ने माथे पर कलंक लगाया
नेतृत्व ने पूर्ण क्षमता से युद्ध नहीं अपनाया,
उन्नीस सौ सड़सठ में उन्हें पिछे हटाया
दो हजार बीस गलवान में भी धुल चटाया।
हर जीत को नेताओं ने हार में बदल दिया
कराची ताशकंद शिमला समझौता से क्या लिया,
पंचशील की बेड़ी में जकड़ भाई भाई का घुंटी दिया
उसे अपना पड़ोसी बना अक्साई का हिस्सा भी दे दिया।
लोकतंत्र में नेता जानते हैं कला
जनता और भूमि को बांटने का,
यही दिलाती है उन्हें कुर्सी व सम्मान
कब समझेगी यह हिन्द की जनता नदान।
बुद्ध और युद्ध
बुद्ध हमारे युद्ध तुम्हारा
दोनों स्थिति में हम खरा,
शांति चाहोगे हम बुद्ध बनेंगे
युद्ध चाहोगे तो कृष्ण बनेंगे ,
युद्ध रचना तेरा स्वभाव
देंगे नहीं रणक्षेत्र भाव,
शिवाजी महाराज महाराणा प्रताप
गुरु गोविंद सिंह मानेकशॉ का प्रभाव,
रण में हम रूकते नहीं झुकते नहीं
स्थिति चाहे कितनी भी हो विकट ,
हर क्षेत्र हर युद्ध में परचम लहराया
साथ विश्व बंधुत्व हमें है भाया,
राम कृष्ण की यह पावन भूमि
शत्रु विजय की यह रणभूमि,
प्रतिउत्तर देंगे चारों प्रहर
अखण्ड भारत ओर अग्रसर।
छोड़ेंगे नहीं
छेड़ोगे तो छोड़ेंगे नहीं ,
कहीं का तुम रहोगे नहीं।
जो कबाड़ आइटम बनाते हैं,
उनकी दोस्ती पर इतरा रहे हो।
अपने बाप को भुलाकर,
ड्रोन वाले को बाप बना रहे हो।
प्रण मां भारती व भवानी की,
महाराणा प्रताप अभिमानी की।
रहोगे नहीं इस धरा पर,
अखण्ड भारत बनेगा यहां पर।
शिवाजी के वंशज को तुने ललकारा है
बप्पा रावल जयमाल संग युद्ध ठाना है।
तुम्हें मुंह की खानी होगी
राम कृष्ण की भूमि के शरणा में आनी होगी।
राम कृष्ण की भूमि के शरणा में आनी होगी।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ
देशद्रोही ही यहाॅं मालामाल भईल बाऽ।
देशहित के भाषा ईहाॅं बहुत कम लोग जाने
विवादित बयान प्रसिद्धि के आधार भईल बाऽ।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
अपन संस्कृति के विरोध कर लोग प्रसिद्ध पावे
पैसा खातीर टीवी पर कोठा चकला चलावे।
हो रहल कुठार घात से लोग अनजान भईल बाऽ
बिना मतलब के बात पर घमासान भईल बाऽ।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
बाहर से ज्यादा अंदर बाड़े दुश्मन
पईसा खातिर ई बेचत बारे चमनऽ।
अपराधी ही समाज के कर्णधार भईल बाऽ
ज्यादातर लोग आज इहवा दलाल भईल बाऽ।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
सब आज एक दूसरा पर अंगुली उठावे
समाज के बाट के लोग कुर्सी पावे।
देश बटे के भी इनका मन में ना कोई मलाल भईल बाऽ
एकता में यहाॅं के सिस्टम ढाल भईल बाऽ।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
भगत चंद्रशेखर सुखदेव राजगुरु सुभाष चंद्र बोस
कोई बनल ना चाहे, गांधी जी के सिर्फ खादी तक जाने,
नेहरू जी के निती पर आज घमासान भईल बाऽ
भीमराव के बात न मनले, उहे मुद्दा से आज देश परेशान भईल बाऽ।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
ना एक देश बा ना एक नियम
बड़का के ना रोक टोक, ना साफ इनकर नियत।
छोटका घोलाटी मारे खाए पिए टांग पसारे
मंझीला सबसे हलकान परेशान भईल बाऽ।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ
देशद्रोही ही यहाॅं मालामाल भईल बाऽ।
देशहित के भाषा ईहाॅं बहुत कम लोग जाने
विवादित बयान प्रसिद्धि के आधार भईल बाऽ।
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
आज देशवा में गजबे बवाल भईल बाऽ…
मजदूर
मजदूर हूँ मजबूर नहीं
अपने कर्म से दूर नहीं,
हर जगह मैं पाया जाता
मजदूर हूँ मैं कहलाया।
अपने कार्य को बखूबी निभाया
सच्चा मजदूर तब बन पाया,
बिन मजदूर यह न जग चले
हम नहीं तो विकास कैसे आगे बढ़े।
मजदूर और मजदूरी का
ना उड़ाओ परिहास,
इनसे सच्चा रिश्ता बनाओ
और करो समाज का विकास।
हम हैं आपके साथ
थोड़ा हाथ बढ़ाइए ,
कुशल आकुशल मजदूरों को
रोज़गार तो दिलाइए।
मजदूरों के विकास में
अपना भूमिका निभाईए
मजदूर करेंगे विकास
सुंदर स्वच्छ होगा समाज।
नव संवत्सर
नव संवत्सर विक्रम संवत आइए मिलकर हर्ष मनाएं हम
चैत्र है प्रथम महीना, शुक्ल प्रतिपदा का आओ हर्ष जताएं हम ।
नव संवत्सर विक्रम संवत झूमे नाचे गाकर उत्सव मनाएं हम
चैत्र मास ही श्री हरि विष्णु ने श्री राम रूप में लिया अवतार,
इसी मास में ब्रह्माजी ने सृष्टि का किया विस्तार।
नव संवत्सर के लिए ईश्वर को धन्यवाद जताएं हम।
चैत्र है प्रथम महीना, शुक्ल प्रतिपदा का आओ हर्ष जताएं हम।
चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को महावीर स्वामी का हुआ जन्म
चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं हम,
राजकुमार ध्रुव तपस्या कर ध्रुव तारा के रूप में हुए स्थापित
मान बढ़ा सम्मान बढ़ा, अंधकार में भी जिससे दिशा पाएं हम।
चैत्र है प्रथम महीना, शुक्ल प्रतिपदा का आओ हर्ष जताएं हम।
शिव कृपा से काम देव पुनर्जन्म पाएं
हर हिन्दू मिल जुलकर नव वर्ष उत्सव मनायें
महिषासुर र्मदनी ने की थी कठोर तपस्या
हम सभी जिनकी करें उपासना आशीष पाएं।
चैत्र है प्रथम महीना, शुक्ल प्रतिपदा को आओ हर्ष जताएं हम।
गौरव गाथा
शेरों जैसी गर्जना जिनकी, रण में बिजली से चमके ,
मातृभूमि पर शीश चढ़ा दें, वे वीर अनोखे दमके।
प्रताप की गाथा गूंज रही, हल्दीघाटी के रण में,
भूपालों ने बलिदान दिया, दुश्मन कांपे क्षण में।
राणा सांगा वीर प्रबल थे, रण में तनिक न झुके,
घाव सहकर भी लड़े सदा, दुश्मन दल सहमीं रहे।
बप्पा रावल सिंह सम थे, हिंद की ढाल कहाए,
अरब, तुर्क, खिलजी को, रण में धूल चटाए।
हम्मीर देव की प्रतिज्ञा, चित्तौड़ की शान बढ़ाए,
रणभूमि में सिंह समान, दुश्मन को झुकाए।
पृथ्वीराज की तीखी दृष्टि, बाणों में जादू थे रखते,
एक तीर से काम तमाम, शत्रु संग्राम में थें डरते।
जयमल-फत्ता के बलिदान, चित्तौड़ की माटी गाए,
रण में लड़े वीरों सम, दुश्मन पीठ दिखाए।
रानी कर्णावती ने भी, राणा कुल की लाज बचाई,
मेवाड़ की माटी के खातिर, सिन्दूर की जोत जलाई।
महाराजा सूरजमल की तलवार, जैसे प्रलय थी चलती,
दिल्ली तक जिसने हिला दिया, वीरता नभ में थी गूंजती।
पद्मिनी जैसी नार यहाँ पर, जौहर की ज्वाला रचती,
शत्रु जब जब पास बढ़े, तब रणभेरी गरजती ।
तेजाजी के घोड़े की टापें, अब भी इतिहास में गूंज रही,
राजपूती रग-रग में शौर्य, हर युग में अमर रही।
सिंहों की संतान ये सारे, रण में कभी नहीं थे झुके,
हर बंधन तोड़ अमर हुए, वे स्वाभिमान में थे जीते।
वीरों की गाथा लिखने को, इतिहास भी अभिमानी है,
जब तक गंगा, जब तक यमुना, तब तक यह कहानी है।
जोगीरा
१
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
सास तिरथ ससुर तिरथ
तिरथ साला साली बा
सढुआरा से बड़ नाता ना
मेहररूए तारणहारी बा
बोलअ हई रे हई रे हा…
२
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
दु दर्जन शाली दु दर्जन सरहज
एको अंग में रंग ना लागल
विस्तर रह गईल खरहर
बोलअ हई रे हई रे हा…
३
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
मरद के मेहरारू मानत नईखी बात
सास ननद के रखस ना तनिको लिहाज
नईहरे में उनकर बसे ला सांस
बोलअ हई रे हई रे हा…
४
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
बेटा बेटी संग मिल माई लगावें ली युक्ती
सभ्यता संस्कृति से उ चाहें ली मुक्ति
गृह देवता कुल देवता न घर के लोग भावे
छिछियात चलत ऊ, येने वोने धावें
बोलअ हई रे हई रे हा…
५
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
बड़का बड़का सब नेता बारें आपसी मित्र
आम जनता के लड़ावें
गरिबों की लड़ाई लड़ते-लड़ते
खुद हो जावे अमीर
बोलअ हई रे हई रे हा…
६
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
बैंकाक में छुट्टी मनावे
बर्थडे हवाई जहाज में
रिश्ता नाता इधर उधर
वोट चाहिए जात पे
बोलअ हई रे हई रे हा…
७
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
कभी धर्म की बात करें
कभी करें जात की बात
बढ़त समाज में बुराई बाटे मिटे नहीं आज
लोग के टुकड़ा में बांट के बनत बारे सरताज
बोलअ हई रे हई रे हा…
८
९
जोगीरा सरा रा.. जोगीरा सरा रा..
कल्हीयों जयचंद रहें आजो जयचंद बाड़े
सनातन संस्कृति के भाग छोड़
पंथ मजहब मन भावें
बोलअ हई रे हई रे हा…
१०
जोगीरा सरा र.. जोगीरा सरा रा..
समाज में आज बाड़े बड़े बड़े बड़ बोल
अपना के योद्धा राजा पुत्र बतावे लोग
मुफ्त आ अनुकम्पा खातिर कटोरा फैलावे दिल खोल
बोलअ हई रे हई रे हा…
होली में हो गया खेला
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला,
केजरीवाल देखत रहें सिएम के सपना
झूठ का राज हो उसका अपना,
जनता ने धड़के धकेला झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।
सब लोग पकावत रहें अपन-अपन पुवा
जनता के छनवटा से छनके,
मुंह झुलस के भईल गुलगुला झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला
झरेला होली में हो गया खेला।
जे पहीड़ के दिखावत रहें घुरमुचल कुर्ता
देश के इज्जत के बनावत रहे भर्ता,
ऊ पहीड़ के घूमता बारे झूला झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।
नेता जी रंग देखी गिरगिट सरमाईल
मुफ्त के झांसा में जनता ना आईल,
नाम उनकर गिरगिटवाल धराईल झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।
सोफा लागल रहे लागल रहे गद्दा
रौशन दान में भी लागल रहे पर्दा,
गरिबी दिखा शिश महल में रहेला झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।
जउन रहे कड़वा उ भईल मिठाई
नीम कड़वाहट केकरो न भाई,
चाहे बिमारी कितनो बढ़ जाई झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।
दश वर्ष कईले उ नाटकीय शासन
पंद्रहवीं वर्ष के लिए चाहत रहें राशन,
जनता सब समझेला झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।
नेता जी का बा बड़े बड़े भाषण
मैदान में भीड़ जुटेले लाखन,
फिर भी राज्य के दिन ना बहुरेला झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।
नेताजी के बड़े बड़े वादा
सेना और राष्ट्रवाद विरोध करें ज्यादा,
भारत की जनता देश की अपमान ना सहेला झरेला
होली में हो गया खेला।
होली में हो गया खेला झरेला
होली में हो गया खेला।

नरेन्द्र कुमार
बचरी (तापा) अखगाॅंव, संदेश, भोजपुर (आरा), बिहार- 802161
यह भी पढ़ें:-







