Nav varsh par kavita

अभिनंदन नववर्ष अभिनंदन | Nav varsh par kavita

अभिनंदन नववर्ष अभिनंदन

( Abhinandan nav varsh abhinandan ) 

 

खुशियां लेकर आया अब प्यारा नूतन वर्ष,
झूमो-नाचो, गाओ सभी मनाओ यारों हर्ष।
अब बीत गया वह वर्ष बनाया जिसने नर्क,
सुख का हुआ आगमन करो स्वागतम वर्ष।।

अभिनंदन है अभिनंदन नववर्ष अभिनंदन,
महके यह सारा जहां हम सब करते वंदन।
बीत गया जो बीत गया ‌न करे कोई मंथन,
ध्यान ईश्वर का करो लगाओ तिलक चंदन।।

सबके लिए सुहानी निकली प्यारी सी धूप,
प्रकृति भी हर्षायी देखकर आज यह रूप‌।
दु:ख-सुख आते जाते है इसका यह काम,
ठान ले यह पक्का इरादा बदल दे स्वरुप।।

अन्धकार अब छट गया है आलस्य त्यागो,
सुबह प्यारी धूप निकली अब सभी जागो।
नया सौन्दर्य, नया जीवन खुशहाली लाया,
अभिनन्दन है नूतन वर्ष का समृद्धि लाया।।

जिसको समझ बैठे थें हम सभी ऐसी हार,
अब नव वर्ष लाया हम सबके लिए बहार।
मैने भी वह पल देखा जब सूना था संसार,
छोड़ो वे बीती हुई बाते कोरोना का प्रहार।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

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