Navabihan
Navabihan

नवभिहान

( Navabihan )

 

बीती रात अब हुआ सवेरा
नवभिहन का अभिनंदन हो
नव रचना से श्रृंगार करो फिर
जग भर भारत का वंदन हो

मानो,आरंभ के गुजरे वर्ष 76
नव स्फूर्ति से आगे अब साल 77
नव उदय मन हो नव कीर्तिमान
ठोस धरा पर हो भारत महान

त्यागो ईर्ष्या द्वेष भेद भाव सब
मिलजुलकर ही अब उत्थान करो
जिस पथ से गौरव का मान मिले
उस पथ के खातिर प्रस्थान करो

समझो यह देश परिवार हमारा
सबमें भिन्न है अपना रिश्ता प्यारा
सीमा का मर्यादित बंधन बना रहे
आत्मिक सम्मान सभी से बना रहे

ज्ञान मे लिप्त ही अर्थ है भारत का
विश्व बंधुत्व का भाव ही भारत का
डिगा नही विश्वास कभी भारत का
होगा फिर स्वर्णिम काल भारत का

 

मोहन तिवारी

( मुंबई )

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