निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं

निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं

निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं

निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं।
तुम्हें अपने जलवे दिखा दूं चलो मैं।

न जाओ मुझे छोड़ कर मयकदा तुम।
के बदनाम हो जाओगे बाख़ुदा तुम।
क़रीब आओ मेरे न यूं दूर जाओ।
मुह़ब्बत की दौलत लुटा दूं चलो मैं।
निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं।

कहीं प्यार ऐसा न पाओगे दिलबर।
पलट कर यहीं फिर से आओगे दिलबर।
कहीं भूल जाओ न तुम मेरी गलियां।
पता तुमको अपना लिखा दूं चलो मैं।
निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं।

सरापा नशा हूं ज़रा देखिए तो।
मैं ग़म की दवा हूं ज़रा देखिए तो।
हरइक ज़ख़्मे उल्फ़त भुलाकर मिरी जां।
तुम्हें मुस्कुराना सिखा दूं चलो मैं।
निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं।

तुम्हें अपने जलवे दिखा दूं चलो मैं।
निगाहों से साग़र पिला दूं चलो मैं।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • कलाम है क्या

    कलाम है क्या ये गोल मोल मुहब्बत भरा कलाम है क्यातमाम उम्र यहीं पर तेरा क़याम है क्या कबूल कैसे मैं कर लूँ बता तेरी शर्तेंबिना ये जाने तुझे लेना मुझसे काम है क्या जो बार बार मुझे हुक्म देता रहता हैसमझ लिया मुझे तूने बता गुलाम है क्या जो हर घड़ी चला आता है…

  • मीरा जैसी कोई अब दीवानी नहीं

    मीरा जैसी कोई अब दीवानी नहीं प्यार की हमको दिखती कहानी नहींमीरा जैसी कोई अब दीवानी नहीं दर्द मुझको भी होता है समझो जरामुझमें भी है लहूँ कोई पानी नहीं वो भी देता है ताना मुझे ख़्वाब मेंप्यार की पास में जो निशानी नहीं धौंस सब पर दिखातें हैं वो ही यहांजिनकी बस में ही…

  • शबाब आया नया – नया है

    शबाब आया नया – नया है शबाब आया नया -नया हैसुरूर गहरा नया- नया है करें गिले किस तरह बताओबना ये रिश्ता नया -नया है कहें तुझे कैसे अलविदा हमअभी नजारा नया- नया है पिला दे उल्फ़त के जाम साकीहुआ दिवाना नया -नया है भडक रहे हैं जिगर में शोलेउठा ये पर्दा नया- नया है…

  • उनका किरदार | Unka Kirdar

    उनका किरदार ( Unka kirdar ) उनका किरदार है क्या उनको बताया जाये आइना अहले -सियासत को दिखाया जाये जलने वालों को ज़रा और जलाया जाये ख़ाली बोतल ही सही जश्न मनाया जाये ज़ुल्म ही ज़ुल्म किये जाता है ज़ालिम हम पर अब किसी तौर सितमगर को डराया जाये इस ग़रीबी से बहरहाल निपटने के…

  • ये दुखदाई है | Ghazal Ye Dukhdai Hai

    ये दुखदाई है ( Ye Dukhdai Hai )   आसमां छूती मेरे मुल्क़ में मँहगाई है मुफ़लिसों के लिए अब दौर ये दुखदाई है सींचते ख़ून पसीने से वो खेती अपनी उन किसानों के भले पाँव में बेवाई है साँस लेना हुआ दुश्वार तेरी दुनिया में अब तो पैसों में यहाँ बिक रही पुरवाई है…

  • विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2

    मुलाक़ात कम नहीं होती अजीब बात है यह रात कम नहीं होतीमेरी निगाह से ज़ुल्मात कम नहीं होती मुझे भी उनसे मुहब्बत है कह नहीं सकतामुहब्बतों पे मगर बात कम नहीं होती वो एक दिन तो मुहब्बत के तीर छोड़ेंगेहमारी उनसे मुलाक़ात कम नहीं होती तेरे हुज़ूर वफाओं का तज़करा क्या होतेरे करम की करामात…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *