Gar do Ijazat

गर दो इजाजत | Gar do Ijazat

गर दो इजाजत

( Gar do Ijazat )

 

गर दो इजाजत तुम पर मर जाऊं,
शब्द बनके स्याही में उतर जाऊं !

गुनगुना सको जिसको महफ़िल में,
ऐसी कविता बन के मैं संवर जाऊं !

मेरा मुझ में कुछ भी ना रहे बाकी,
कतरा-कतरा तुझ में बिखर जाऊं !

दिल-ऐ-समंदर में डूबकर फिर मैं,
तेरी आँखों के किनारे में तर जाऊं !

अधूरी हूँ तेरे बिन, सूनी है ज़िन्दगी,
तू गर छु ले कलि से फूल बन जाऊं !!

 

DK Nivatiya

डी के निवातिया

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