निजता का हनन

निजता का हनन

पति-पत्नी का रिश्ता बेहद खूबसूरत होता है… बशर्ते इसमें प्यार, रोमांस, विश्वास, समर्पण, निष्ठा, सहयोग, समर्थन, समझदारी, विश्वास, ईमानदारी, संवाद, समझौता, गोपनीयता, सहनशीलता जैसी महत्वपूर्ण बातों का.. भावों का होना बेहद जरूरी है।

कुछ ऐसा ही रिश्ता था मानव और दामिनी का। शादी को 4 साल हो गए थे। सब कुछ बेहतरीन चल रहा था। फिर एक दिन ऐसा हुआ कि उनके इस प्रेम व विश्वास के खूबसूरत रिश्ते में दरार पड़ गई।

मानव की गिनती प्रतिष्ठित व्यापारियों में होती थी। उनकी समाज में अपनी इज्जत, प्रतिष्ठा थी। वह अपनी पत्नी दामिनी के लिए तन-मन-धन से पूरी तरह समर्पित थे। दामिनी भी मानव को पति के रूप में पाकर खुद को धन्य व गौरवान्वित महसूस करती थी।

एक दिन दामिनी खुद को ठीक महसूस नहीं कर रही थी। उसके हाथ-पैरों में दर्द, हड़कल हो रही थी तो… मानव ने बंद कमरे में अपने हाथों से दामिनी की मालिश की। इससे दामिनी को बड़ी राहत मिली।

इसके बाद जब कभी भी दामिनी को पैरों में दर्द या दिक्कत महसूस होती तो वे खुशी-खुशी उसके लिए तैयार रहते। उसके पैर दबाते, मालिश करते। उसकी हर इच्छा पूरी करते। उसका हर तरह से ध्यान रखते। कई बार दिक्कत बढ़ जाने पर उन्होंने पूरी-पूरी रात जगकर दामिनी की सेवा की। पति पत्नी का रिश्ता होता ही इसलिए है कि एक दूसरे के सुख दुख में काम आएं।

एक बार मानव को ससुराल पक्ष की एक रिश्तेदारी में पत्नी दामिनी के साथ दावत में समय से पहुंचना था। लेकिन वहां पहुंचने में उनको थोड़ी देर हो गयी। सब लोग उत्सुकता से उनके आने के इंतजार में बाहर गेट पर खड़े थे।

“मानव सर, बड़ी देर लगा दी आने में। आपको तो आज जल्दी आ जाना चाहिए था।” मानव की ससुराल पक्ष के एक रिश्तेदार ने उनसे शिकायत करते हुए कहा।

“हां, देरी तो हो गई है। इसके लिए मैं माफी चाहता हूँ। रास्ते में ट्रैफिक काफी था। निकले तो हम लोग समय से ही थे लेकिन फिर भी देर हो गई।” देरी का स्पष्टीकरण देते हुए मानव बोले।

“अरे सर, हमें बेवकूफ मत बनाओ। हमें सब पता है कि तुम घर पर क्या कर रहे होंगे?”

“क्या मतलब? मैं कुछ समझा नहीं।” हैरानी से मानव बोले।

“ज्यादा भोले मत बनों, हमें पता है कि तुम बंद कमरे में अपनी पत्नी की गुलामी कर रहे होंगे, उनके पैर दबा रहे होंगे। इसलिए घर से निकलने में देर हो गई।”

“ऐसा कुछ नहीं है। शायद तुम्हें गलत खबर है। वैसे आप मजाक अच्छा कर लेते हो।” स्थिति संभालते हुए मानव ने कहा।

“मैं मजाक नहीं कर रहा सर। मजाक तो आप समझ रहे हो। इस पार्टी में मौजूद हर व्यक्ति यह जानता है कि तुम अपनी पत्नी की गुलामी करते हो।” दो टूक मानव को सुनाकर वह रिश्तेदार आगे बढ़ गया। सबकी नज़रे मानव पर थी।

मानव को उस रिश्तेदार का इस तरह सार्वजनिक बोलना… उनकी निजी जिंदगी की बात को सार्वजनिक करना.. बहुत अखर गया। उनका दिमाग खराब हो गया। बमुश्किल 15 मिनट रुक कर वे पार्टी से तुरंत घर वापस लौट आए।

पूरे रास्ते वे समझ नहीं पा रहे थे कि पार्टी में मौजूद हर व्यक्ति को कैसे उनकी जिंदगी के बारे में जानकारी है? मानव ने पूरी पार्टी के दौरान खुद को बहुत अपमानित महसूस किया। कहीं ना कहीं इसका जिम्मेदार उन्होंने अपनी पत्नी को माना और घर पहुँचकर अपनी पत्नी से पूछा-

“हम दोनों के बीच बंद कमरे में क्या होता है?.. यह उस पार्टी में मौजूद हर व्यक्ति को पता था। कैसे? मैंने तो आज तक तुम्हारे पैरों को दबाने वाली बात अपने मां-बाप, सगे संबंधियों या दोस्तों तक से नहीं कही, फिर… तुम्हारे परिवार के उस व्यक्ति ने मुझे सबके सामने पैर दबाने वाली बात बोलकर क्यों अपमानित महसूस करवाया?

मुझे बहुत दुःख हो रहा है। जरूर तुमने ही हमारी निजी जिंदगी की गोपनीयता को भंग किया है? हमारे प्रेम व विश्वास का गला घोंटा है। वहां मौजूद हर व्यक्ति यह जानता था कि मैं तुम्हारे पैर दबाता हूँ, तुम्हारी गुलामी करता हूँ। उन सभी को यह बात कैसे पता चली? मुझे जवाब दो, तुमने ऐसा क्यों किया?”

“आप मुझसे गुस्सा और नाराज मत होइए। हाँ, मैंने पिछले साल अपनी तीनों बहनों व भाभी को आपके द्वारा पैर दबाने की बात बताई थी। मुझे क्या पता था कि बात इतनी बढ़ जाएगी?

उनके पेट में बात ही न रुकेगी और वे हर जगह इसको फैला देंगे और पैर दबाने वाली बात पूरी रिश्तेदारी में हो जाएंगी।? तुम इस बात का ज्यादा बुरा मत मानो। उनकी ओर से मैं आपसे माफी चाहती हूँ।”

“अभी भी तुम अपनी बहनों व भाभी की गलतियां गिना रही हो लेकिन खुद की गलती नहीं मान रही। क्या तुम्हें इतना भी नहीं पता कि पति-पत्नी की अंतरंग बातें कमरे से बाहर नहीं जानी चाहिए?

उनकी अपनी प्राइवेसी होती हैं। हर बात ससुराल पक्ष के लोगों को या अपनी सहेलियों को बताना जरूरी है क्या? पति की ससुराल में इज्ज़त बनाये रखना एक पत्नी की जिम्मेदारी होती है।

वहाँ का हर एक रिश्तेदार मुझे तेरा गुलाम बुला रहा था जो तेरे पैरों में ही पड़ा रहता है, तेरे पाँव दबाता है। तुम्हें इतनी अक्ल तो होनी चाहिए कि पति-पत्नी के रिश्तों में गोपनीयता का होना बहुत जरूरी है। कुछ बातें पति पत्नी के बीच रहें तो ज्यादा अच्छा है। अगर झगड़ा भी हो तो आपस में ही मिलकर सुलझा लेना चाहिए।

हर बात सार्वजनिक करना या ससुराल पक्ष को बताना समझदारी नहीं होती। इससे सम्बन्धों में दरार पड़ती है। तुम्हारी इस हरकत ने मुझे सब लोगों के बीच बहुत अपमानित और नीचा महसूस करवाया है। मुझे बहुत चोट पहुँची है। मुझे तुमसे ऐसी उम्मीद नहीं थी। तुमने मेरे प्रेम व विश्वास का खून किया है।

भविष्य में आइंदा तुम मुझसे इस बात की कतई उम्मीद मत करना कि मैं तुम्हारे पैर दबाऊंगा या तुम्हारी चोट पर मरहम लगाऊंगा। मैं तुम्हें कभी माफ नहीं करूँगा।” अपनी बात बोलकर मानव दूसरे कमरे में सोने चले गए। दामिनी उनके आगे खूब रोई, माफी माँगी लेकिन मानव पर इसका कोई असर न पड़ा।

इस घटना के बाद से दामिनी मानव का पति-पत्नी का रिश्ता वैसा नहीं रहा, जैसा इस घटना से पहले था। मानव ने दामिनी की रिश्तेदारी में जाना ही छोड़ दिया था। वे पति-पत्नी जरूर थे लेकिन नाम के। दामिनी की एक गलती ने उनके प्रेम, विश्वास, समर्पण, सहयोग, निष्ठा, अपनापन आदि सब को खत्म कर दिया था।

प्यार और समर्पण के बीच की रेखा बहुत ही बारीक होती है। जब पति अपनी पत्नी के प्यार में पड़ता है, तो वह उसके लिए किसी भी हद तक जा सकता है। वह उसकी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता है, चाहे वह उसके पाँव दबाना हो या उसकी हर इच्छा को पूरा करना।

लेकिन यह गुलामी नहीं है, बल्कि यह परवाह और प्यार है। पति अपनी पत्नी के प्रति अपने प्यार, परवाह और समर्पण को दर्शाने के लिए ऐसा करता है, न कि किसी दबाव या मजबूरी के कारण। प्यार और समर्पण के लिए हमें अपने आप को बदलने की जरूरत नहीं होती है, बल्कि हमें अपने प्यार और समर्पण को दर्शाने के लिए अपने व्यवहार और कार्यों को बदलना होता है।

उदाहरण के लिए, जब पति अपनी पत्नी का सिर या पाँव दबाता है, खाना बनाता है, कपड़े धोता है या बर्तन साफ करता है या इसके अतिरिक्त जो भी काम करता है तो… यह उसके प्यार और समर्पण को दर्शाता है, न कि उसकी गुलामी को। यह उसके व्यवहार और कार्यों को दर्शाता है जो उसके प्यार और समर्पण को दर्शाते हैं।

पति-पत्नी के बीच की निजता और बेडरूम की बातें बहुत ही व्यक्तिगत और संवेदनशील होती हैं। इन बातों को शेयर करने से बचना चाहिए, क्योंकि इसके परिणाम भयंकर हो सकते हैं। कुछ महिलाएं जान बूझकर दिखावा करते हुए, खुद को दूसरों से सुपर दिखाने की होड़ में पति की समाज में इज्ज़त तक का ख्याल नही करती और निजी बातों या परवाह को सार्वजनिक कर देती हैं। निजी बातें शेयर करने से यहाँ कुछ दिक्कतें हैं जिनका सामना करना पड़ सकता है:

  1. विश्वास की कमी: जब पति-पत्नी के बीच की निजता को शेयर किया जाता है, तो विश्वास की कमी हो सकती है। दोनों में से कोई भी एक दूसरे पर विश्वास करना बंद कर सकता है।
  2. अपमान और शर्मिंदगी: निजता को शेयर करने से अपमान और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ सकता है। दोनों में से कोई भी एक दूसरे को अपमानित महसूस कर सकता है।
  3. संबंधों में तनाव: निजता को शेयर करने से संबंधों में तनाव आ सकता है। दोनों में से कोई भी एक दूसरे से दूरी बना सकता है।
  4. परिवार और समाज में बदनामी: निजता को शेयर करने से परिवार और समाज में बदनामी हो सकती है। दोनों में से कोई भी एक दूसरे को बदनाम कर सकता है।
  5. मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव: निजता को शेयर करने से मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। दोनों में से कोई भी एक दूसरे को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकता है।
  6. संबंधों का टूटना: निजता को शेयर करने से संबंधों का टूटना हो सकता है। दोनों में से कोई भी एक दूसरे से अलग हो सकता है।
  7. कानूनी समस्याएं: निजता को शेयर करने से कानूनी समस्याएं भी हो सकती हैं। दोनों में से कोई भी एक दूसरे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

इन दिक्कतों को देखते हुए, यह बहुत ही महत्वपूर्ण है कि पति-पत्नी दोनों अपनी निजता और बेडरूम की बातों को शेयर करने से बचें।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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