निर्णय

निर्णय

“यह ले 5000 रुपए। आज रविवार है। अपने बच्चों को राजा जी ढाबे पर घुमा लाओ। वहाँ बच्चों के खेलने के लिए बहुत सारे खिलौने हैं, बहुत से गेम्स हैं। बच्चों को वहाँ जाकर अच्छा लगेगा। याद से, बच्चों को थ्रीडी फ़िल्म जरूर दिखाना। 700 रुपये ड्राइवर को दे देना और 1000 का पेट्रोल डलवा लेना। बाकी रुपये बच्चों पर खर्च कर देना।” अचानक से राधा ने छोटे भाई मनीष को रुपये देते हुए कहा।

“ठीक है दीदी। मैं घुमा लाऊंगा? लेकिन आप मुझे रुपये क्यों दे रही हो? इनकी क्या जरूरत है? मेरे पास रुपये हैं।” मनीष ने जवाब दिया।

“नहीं। ये रुपये रखो। बच्चों ने काफी पहले से मुझसे कह रखा था कि बुआ जी, हमें राजाजी ढाबे पर घुमा के लाना, खेल खिलाकर लाना। कल से मेरी तबियत ठीक नहीं है, नहीं तो मैं खुद बच्चों को घुमा लाती।” राधा ने जवाब दिया।

“अच्छा, वैसे रात बच्चे मेरे पास आये थे, पूछ रहे थे कि पापा जी, आप राजाजी ढाबे पर चलोगे? बुआ जी पूछ रही हैं। तब मैने बच्चों से मना करते हुए बोला था कि अभी नहीं। अभी बुआ जी की भी तबीयत ठीक नहीं है, जब उनकी तबियत ठीक हो जायेगी, तब हम सब राजाजी ढाबे पर चलेंगे। बच्चें मान भी गए थे। बच्चों ने यह बात बताई नहीं आपको?”

“बताई थी, लेकिन मुझे बच्चों को और टालना ठीक नहीं लग रहा था। ड्राइवर को यूं अचानक मना करना भी मुझे ठीक नहीं लग रहा था। उसका भी परिवार है। उसने बमुश्किल अपने व्यस्त शेड्यूल से हमारे लिए समय निकाला है आज के लिए।

मना करने पर उसको बुरा लगेगा। इसलिए मैंने सोच-समझकर बच्चों को आज ही घुमाने का निर्णय लिया है। ये अलग बात है कि घुमाने का यह काम अब तुझे करना पड़ेगा। एक काम करना, साथ में अपनी पत्नी को जरूर लेकर जाना। उसका मन भी बहल जायेगा।” बहन ने अपनी बात स्पष्ट रूप से रखते हुए कहा।

बहन की बातें सुनकर मैं सोचने लगा कि बड़ी बहन को सबका कितना खयाल है। पारिवारिक माहौल अच्छा करने के उद्देश्य से उन्होंने मेरे मना करने के बावजूद यह प्लान बनाया था। उनको पता था कि मेरी पत्नी मुझसे नाराज़ चल रही है। बच्चों का तो सिर्फ एक बहाना था।

अगर वे चाहती तो बच्चों के इस कार्यक्रम को अगले किसी और दिन के लिए टाला जा सकता था, लेकिन बहन की दूरदर्शी सोच, बच्चों की खुशी एवं ड्राइवर के जीविकोपार्जन के काम को देखते हुए मुझे उनका यह निर्णय उचित ही जान पड़ रहा था। ड्राइवर के आने पर, मैं बच्चों को साथ लेकर राजाजी ढाबे पर बच्चों को घुमाने के लिए निकल पड़ा।

लेखक:- डॉ० भूपेंद्र सिंह, अमरोहा

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