Laghu Katha Nalayak

नालायक | Laghu Katha Nalayak

“अंकल, हम आपकी बेटी जैसी नहीं लगती जो आप इस घर में इतना तनाव बनाए हुए हैं? पापा मेरे, आपकी बेटी की शादी के लिए प्रतिबद्ध थे कि भाई की बेटी हमारी बेटी होती है। हम किसी भी हाल में अलग नही होंगे।

जब आपकी बेटी की शादी हो गई तो आप अलग होने के लिए तुले हुए हैं। एक इंसान के साथ यही सलूक करते हैं लोग, इस जमाने में?” चिंता में पड़े पिता की श्रेया बेटी ने सवाल किया कि शायद अब भी अंकल अपनी इच्छा बदल दें।

“लोग क्या सलूक करते हैं मुझे पता नहीं लेकिन हम अब किसी भी हाल में एक साथ रहने वाले नहीं हैं, यह मेरा निर्णय है। मेरा निर्णय पत्थर पर लकीर खिंच कर ही दम लेता है।” उसने इतने कठोर शब्दों में कहा।

“तो मेरी शादी के लिए कौन सी लकीर खिंचेंगे आप।” श्रेया ने पूछा
“श्रेया,,,,,।” वे गरज उठे।
“गरजिए मत लायक पिता की बेटी हूँ।” जो पिता कहते वह बात बेटी कह गई।
“इसका मतलब हम,,,,।” उसने सवाल किया।
“हाँ हैं आप, ,,,,,,,,,, वही हैं।” श्रेया ने जबाव देते हुए कहा।
“नदी किनारे वाला खेत तेरी शादी के लिए छोड़ देता हूंँ।” श्रेया जैसी गुड़िया हो उसने उसे भरोसा देना चाहा कि हम बहुत हम दर्द हैं तुम्हारे।
“कौन लेगा वह खेत जो बरसात आते के साथ पानी में डूब जाता है। रखिए अपने पास अपना खेत। जिसने मुझे पैदा किया वह लायक है, मेरे लिए।” श्रेया ने दुबारा चोट की और वहांँ से चली गई।

Vidyashankar vidyarthi

विद्या शंकर विद्यार्थी
रामगढ़, झारखण्ड

यह भी पढ़ें :

बेचना है तो नभ को बेच धरा को रहने दे | Kavita Bechna Hai to

Similar Posts

  • दोस्ती का खून | Dosti ka Khoon

    सन 2000 की बात है। आशु और अंकित दोनों की नई नई दोस्ती हुई थी। दोनों कक्षा 12 में पढ़ते थे। आशु एक अमीर परिवार से ताल्लुक रखता था। उसके पिता एक कंपनी में अकाउंटटेंट के तौर पर कार्य करते थे जबकि अंकित के पिता की सबमर्सिबल की एक छोटी सी दुकान थी। आशु के…

  • एक लड़की को देखा तो | Prem kahani

    एक लड़की को देखा तो… (Ek ladki ko dekha to : Prem kahani )   13 जुलाई 2013 (जब मैंने पहली बार उसे देखा) मैं अपने घर पर था।मैं काफी समय बाद बेंगलुरु से घर आया था ।मैंने आपको बताया या नही मैं बेंगलुरु में जॉब करता हूँ और एक सॉफ्टवेयर कम्पनी(Virgosys software private ltd.) …

  • एक अजनबी के साथ सुनहरा सफ़र

    मैं एक कंपनी में कार्यरत था, जो मेरे घर से सिर्फ १० किलोमीटर दूर थी. बारिश और बिजली अपना रंग दिखा रही थी,११ बज चुके थे, कंपनी की लाइट बहुत देर से नहीं थी,सब काम ठप्प। सभी लोग परेशान, मैंने मेंटिनेंस अभियंता को फ़ोन किया, फ़ोन पर उधर से बड़ा ही असंतुष्ट जवाब था, तुम्हें…

  • भूत बना गोलू का टीचर | Bachon ki kahani

     भूत बना गोलू का टीचर  ( Bachon ki kahani )   एक गांव में एक गोलू नाम का लड़का रहता था उसके परिवार में कुल पांच सदस्य थे । उसकी मम्मी पापा, उसके दादाजी, गोलू और उसकी बड़ी बहन । गोलू की बड़ी बहन पढ़ने में बहुत होशियार थी इसलिए घर और स्कूल में हर…

  • लक्ष्मी | Laxmi

    अरे सुनते हो दीपावली का दिवस आ गया है एन वक्त पर बहुत भीड़भाड़ हो जाती है देखो धन्वंतरि पूजा चतुर्दश धनतेरस छोटी दीवाली बड़ी दिवाली भैया दूज मनाने तक बहुत सारे दिए चाहिए, इसलिए जल्दी चलकर हम लोगों को दिए और जरूरत के सामान खरीद लेने चाहिए। शारदा जी ने थोड़ी तेज आवाज में…

  • धर्मांतरण | Kahani Dharmantaran

    अभी सुबह-सुबह का मुश्किल से 7:00 बजे होंगे। महेश मॉर्निंग वॉक से लौटा ही था कि रास्ते में रुमाल लटकाए हुए बड़ी तेजी से गांव का एक व्यक्ति चला जा रहा था। मनीष को देखने के बाद वह थोड़ी और तेजी चलने लगा जिससे आमने-सामने उसकी टकराहट ना हो। फिर भी टकराहट हो गई। उसने…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *