पड़ोसी धर्म निभाएं | Padosi par Kavita

पड़ोसी धर्म निभाएं

( Padosi Dharm Nibhayen )

 

सीमेंट गारे से बनी
ईंट पाथर से गढ़ी
कस्बे में खड़ी
ये मंदिर मस्जिद बड़ी बड़ी
गिरिजा गुरुद्वारा साहिब भी
नहीं इंसानियत से बड़ी
सदैव काम आएंगे सर्वप्रथम
आपके पड़ोसी ही
उन्हें मिलिए जुलिए घड़ी घड़ी
रिश्तों में बनाए रखें
विनम्रता सादगी और ईमानदारी
माहौल बनेगा सुंदर सद्भावपूर्ण सदाचारी
बालक युवा बनेंगे शिष्टाचारी
जीत होगी सबकी हमारी तुम्हारी
चहुंओर दिखेगा मनोहर फुलवारी।

नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

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