पड़ोसी धर्म निभाएं

पड़ोसी धर्म निभाएं | Padosi par Kavita

पड़ोसी धर्म निभाएं

( Padosi Dharm Nibhayen )

 

सीमेंट गारे से बनी
ईंट पाथर से गढ़ी
कस्बे में खड़ी
ये मंदिर मस्जिद बड़ी बड़ी
गिरिजा गुरुद्वारा साहिब भी
नहीं इंसानियत से बड़ी
सदैव काम आएंगे सर्वप्रथम
आपके पड़ोसी ही
उन्हें मिलिए जुलिए घड़ी घड़ी
रिश्तों में बनाए रखें
विनम्रता सादगी और ईमानदारी
माहौल बनेगा सुंदर सद्भावपूर्ण सदाचारी
बालक युवा बनेंगे शिष्टाचारी
जीत होगी सबकी हमारी तुम्हारी
चहुंओर दिखेगा मनोहर फुलवारी

नवाब मंजूर

लेखकमो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

यह भी पढ़ें : – 

भागीदारी | Bhagidari par Kavita

Similar Posts

  • बचपन का गाँव | Bachpan ka Gaon

    बचपन का गाँव ठण्डी-ठण्डी छांव मेंउस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हूँ।तोडऩा चाहती हूँबंदिश चारों पहर की।नफरत भरी येजिन्दगी शहर की॥अपनेपन की छायामैं पाना चाहती हूँ।उस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती हँ हूँ॥घुट-सी गयी हूँइस अकेलेपन मेंखुशियों के पल ढूँढ रहीनिर्दयी से सूनेपन मेंइस उजड़े गुलशन कोमैं महकाना चाहती हूँ।उस बचपन के गाँव मेंमैं-जाना चाहती…

  • अमेरिका को मिला नया राष्ट्रपति!

    अमेरिका को मिला नया राष्ट्रपति! ****** धन्य अमेरिका, धन्य अमेरिकी जनता.. नफ़रत के ऊपर चुना सद्भावना! कुछ यही है कहता- बाइडेन का चुना जाना। देखिए क्या आगे है होता? 46 लें राष्ट्रपति के रूप में 77 वर्षीय बाइडेन चुने गए हैं, छह बार सिनेटर भी रह चुके हैं। जो डेमोक्रेटिक पार्टी के थे उम्मीदवार, जिनपर…

  • प्रशांत भूषण की निडरता | Prashant Bhushan par kavita

    प्रशांत भूषण की निडरता! ******* यह बोल प्रशांत भूषण के हैं – न झुकेंगे न सच का दामन छोड़ेंगे सच कहते थे सच कहते हैं सच कहते रहेंगे। न सत्ता के आगे घुटने टेकेंगे, न कोर्ट से डरेंगे। ना ही माफीनामा दायर करेंगे, कोर्ट जो सजा देगी- हंस हंस कर सहेंगे। भारत में नागरिक अधिकारों…

  • न जाने क्यूॅं | Na Jane Kyon

    न जाने क्यूॅं? ( Na Jane Kyon )  आज भी जब निकलता हूॅं ब्राह्मणों की गली में तो अनायास ही खड़े हो जाते हैं कान चौकस मुद्रा में और चारों ओर दौड़ती हुईं अपलक आकार में बड़ी हो जाती हैं ऑंखें भौंहें तन जाती हैं फड़कने लगते हैं हाथ-पाॅंव और रगों में चोट-कचोट की मिश्रित…

  • क़लम की ताकत: एक लेखिका की जुबानी

    क़लम की ताकत मेरी क़लम है मेरी जुबां,जिससे कहती हूँ हर दास्तां।हर दर्द, हर खुशी के रंग,इसी से रचती हूँ मैं जीवन के ढंग। यह स्याही नहीं, यह भावना है,जो दिल से निकल, कागज पर थामना है।हर अक्षर में बसती है एक सदी,यह कलम तो मेरे सपनों की नदी। कभी चुप रहकर चीखती है,अन्याय पर…

  • भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी

    भारतरत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी आदर्शों पर अटल हिमालय, सी जिनकी इच्छा शक्ति,कर्त्तव्य पथ पर अडिग, अकम्प आदर्श देश भक्ति,अटल विचारों के स्वामी, सत्य पथिक विहारी थे,ऐसे अटल बिहारी करते नाम की सार्थक अभिव्यक्ति! नवयौवन में गृहत्याग समर्पित, देश को जीवन कर डाला,मानवता की सेवा करने, निस्वार्थ राजधर्म पाला,स्वतंत्रता संग्राम में बढ़ चढ़, जन चेतना…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *