भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है
भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार है भीड़ भक्तों की मय्या तेरे द्वार हैइनकी कश्ती फँसी आज मझधार है जब भी भक्तों पे संकट की आई घड़ीदुर्गे माँ ने लिया तब ही अवतार है दैत्य दानव दरिंदों के संहार कोमाँ उठाती सदा अपनी तलवार है झूमते नाचते धुन पे गरबे की सबहर्ष उल्लास भरता ये …










