• तुम्हारा जवाब नहीं | Tumhara Jawab Nahi

    तुम्हारा जवाब नहीं ( Tumhara jawab nahi ) तुम देखते गए,सम्मान से, प्यार से,इकरार से,जॉ निसार से।अनिमेष आंखों से,कुछ ढूँढ रहे थे, या…!डूबना चाह रहे थे?लालटेन की धीमी,लौ में तुमने देखा,एक हसीन प्यारकी अलौकिक रेखा,तुम देखते जा रहे थे,अनमने होते जा रहे थे,चुपके-चुपके छुपकर,देख लेते रुककर ।तुम्हारा जवाब नहीं,तेरे सिवा कोई ख्याल नहीं।प्रभात पहली किरण…

  • हो रही है | Ho Rahi Hai

    हो रही है ( Ho Rahi Hai ) कहीं उल्फ़त ही उल्फ़त हो रही है।कहीं नफ़रत ही नफ़रत हो रही है। कहीं आराम से सोते हैं लीडर।कहीं मेह़नत ही मेह़नत हो रही है। उन्होंने ह़ाल क्या पूछा हमारा।मुसर्रत ही मुसर्रत हो रही है। न रोटी है न पानी है न बिजली।मशक़्क़त ही मशक़्क़त हो रही…

  • याद रहेगा | Yaad Rahega

    याद रहेगा ( Yaad Rahega ) गुज़रा जहाँ बचपन वो मकाँ याद रहेगाहमको वो मुहब्बत का जहाँ याद रहेगा नायाब जो इक़रार किया इश्क़ का तुमनेइन आँखों को हरदम वही हाँ याद रहेगा इस शह्र ने दी है हमें दो वक़्त की रोटीया रब ये मेरा रोज़ी – रसाँ याद रहेगा हम भूल भी जाएँगे…

  • मेरा देश मेरा कर्तव्य | Mera Desh Mera Kartavya

    मेरा देश मेरा कर्तव्य ( Mera Desh Mera Kartavya ) कथा है , पग – पग बलिदान की lकथा है , पथ – पथ दृढ़ता की llकिस मिट्टी से बने शूर – साहसी ?ना पाना था , ना खोना था lसंकल्प केवल देना था llमेरा देश , मेरा कर्तव्य lअब यहीं एक आवाज है ll…

  • ख़ल्वत-ओ-जल्वत | Khalvat-o-jalvat

    ख़ल्वत-ओ-जल्वत ( Khalvat-o-jalvat ) ख़ल्वत-ओ-जल्वत में यारों फ़र्क ही कितना रहाउसकी यादों का सदा दिल पर लगा पहरा रहा। मुझमें ही था वो मगर किस्मत का लिक्खा देखिएअंजुमन में गैऱ के पहलू में वो बैठा रहा। कुछ कमी अर्ज़ -ए – हुनर में भी हमारी रह गईवो नहीं समझा था दिल की बात बस सुनता…

  • बहुत देखा | Bahut Dekha

    बहुत देखा ( Bahut Dekha ) भरी बज्म में उनको लाचार बहुत देखाबुझी आँखो में तड़पता प्यार बहुत देखा युँ तो हम भी हमेंशा रहे कायल उनकेबिना वजह के रहे शर्मसार बहुत देखा हमने कभी न देखा वादा खिलाफ होतेसामने आने में इंतजार बहुत देखा सामने सच ला न सकें झूठ बोला न गयामुहब्बत की…

  • नहीं हूँ मैं | Nahi Hoon Main

    नहीं हूँ मैं ( Nahi Hoon Main ) पुख़राज़ कोहिनूर या गौहर नहीं हूँ मैंलूटे जो बज़्म तेरी वो शायर नहीं हूँ मैं बूढ़ा हूँ उम्र से हुआ जर्जर नहीं हूँ मैंदीवार-ओ- दर है साथ में खंडर नहीं हूँ मै कमतर नहीं अगर सुनो बदतर नहीं हूँ मैंलेकिन किसी अमीर का चाकर नहीं हूँ मैं…

  • प्रगति दत्त की कविताएं | Pragati Dutta Hindi Poetry

    क़दम क़दम पर रात मिलेगी क़दम क़दम पर, रात मिलेगी ।सुबह हमें ख़ुद , करनी होगी ।जब- जब, छायेगा अंधियारा ।ख़ुद ही रौशनी , भरनी होगी ।क़दम -कदम पर , दीप जलाकर ।खोई राह , पकड़नी होगी ।भुला कर घातों व , प्रतिघातों को ।ज़िन्दगी बसर ये , करनी होगी।क़दम – क़दम पर , रात…

  • हृदय में जो निशानी है

    हृदय में जो निशानी है दिखाता प्रेम की तुमको हृदय में जो निशानी है ।कभी लाओ उसे भी पास जिससे ये कहानी है ।। अधूरे स्वप्न ये मेरे मुझे इतना सताते अब ।अधर कुछ कह नहीं पाते बहाते नैन पानी है ।। अकेले ही पडा रोना मुझे तो इश्क़ में उनके ।हुआ चर्चा अभी जिनका…

  • नन्द किशोर बहुखंडी की कविताएं | Nand Kishore Poetry

    छलावा उनकी प्रेम की बातें सिर्फ़ छलावा है,गंगा, यमुना तहजीब मात्र एक दिखावा है। भाईचारे की बात करके गर्दन काट देते हैं,सेवँई आपको खिलाएँ, दिवाली की मिठाई न खाते हैं। मेहमान, दोस्त बनकर आते दिल में जहर भरे रहते,कब आपको डस डाले, इसी फिराक में सदा रहते। समझो इस धोखे को अब एकजुट सबको रहना…