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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मैं हूँ दीपक एक बदनाम सा
    कविताएँ

    डॉक्टर दीपक गोस्वामी की कविताएं | Dr. Deepak Goswami Poetry

    ByAdmin September 20, 2024June 18, 2025

    रानी लक्ष्मी नही थी कोई लोहे पत्थर से निर्मितनही थी राज भोग विलास तक सीमितनही थी कोई देव नाग कन्याथी सामान्य परिवार की सुकन्याजीवन कर्म अग्नि पथ की धन्याजीती थी अपने जुनून सेसीने से बांध लाल को रंगी खून सेजिद थी जीते जी ना हरगिज हारूँगीचांहे कुछ भी हो पर पर आजादी के सपनों को…

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  • Dastoor
    कविताएँ

    दस्तूर | Dastoor

    ByAdmin September 20, 2024September 20, 2024

    दस्तूर ( Dastoor ) दस्तूर दुनिया का ,निभाना पड़ता है ।अनचाहे ही सही ,सब सह जाना पड़ता है ।सच को ही हमेशा ,हमें छुपाना पड़ता है ।वक्त तो चलता जाता ,हमें रूक जाना पड़ता है ।बिना प्रेम के भी कभी ,रिश्ता निभाना पड़ता है ।आते हैं दुनिया में तो ,जीकर जाना पड़ता है ।जज्बातों को…

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  • Ada ke Naam Pe
    ग़ज़ल

    अदा के नाम पे | Ada ke Naam Pe

    ByAdmin September 20, 2024September 20, 2024

    अदा के नाम पे ( Ada ke Naam Pe ) अदा के नाम पे ये बेहिसाब बेचते हैंकि हुस्न वाले खुलेआम ख़्वाब बेचते हैं जिन्हें शऊर नही है बू ओर रंगत कावो काग़ज़ों के यहाँ पर गुलाब बेचते हैं अमीर लोगो की फितना परस्ती तो देखोजला के घर वो ग़रीबों का आब बेचते हैं मुहब्बतों…

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  • तेरे बग़ैर
    ग़ज़ल

    तेरे बग़ैर | Tere Bagair

    ByAdmin September 20, 2024September 20, 2024

    तेरे बग़ैर ( Tere Bagair ) वीरां यह गुलज़ार है तेरे बग़ैरकरना यह स्वीकार है तेरे बग़ैर हर नफ़स यह कह रही है चीख करज़िन्दगी बेकार है तेरे बग़ैर तेरी यह जागीर लावारिस पड़ीकौन अब मुख़्तार है तेरे बग़ैर मैं मदद को हाथ फैलाऊं कहाँसबके लब इनकार है तेरे बग़ैर क्या सजाऊं जाम पैमाने बताकिसको…

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  • मैं हूँ दीपक एक बदनाम सा
    कविताएँ

    मैं हूँ दीपक एक बदनाम सा

    ByAdmin September 20, 2024September 20, 2024

    मैं हूँ दीपक एक बदनाम सा जलता सदा तम से जंग के लियेरात बढ़ती रही बात गढ़ती रहीजिंदगानी कटी रोशनी के लिएइस कदर यूँ ना हमसे नफरत करोहम भी परछाई है इस वतन के लिएसत्य की परख असत्य की हर खनकजलाती बुझाती रही नई रोशनी के लिएअज्ञानी हूँ सोचता समझता भी नहीदिल मचलता सदा अंतिमजन…

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  • Hindi ke Utsang Mein
    कविताएँ

    हिंदी मेरी मां है, पीपल की छांव है

    ByAdmin September 19, 2024September 19, 2024

    हिंदी मेरी मां है एक रात ख्वाब में आई, हिंदी मांसुनाने लगी अपनी दास्तांमैं तुम्हारी मां हूं, पीपल की छांव हूंसुबह उठती हूं, प्यार से जगाती हूं,लोरी प्रेम की हर दिन सुनाती हूंव्यथित मन अब टूटने लगामुझको सब अब लूटने लगातुम भी चुप, सब कुछ सह जाते हो,जानकर भी अनजान रह जाते होमेरे चंद्र को…

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  • Manzil ki Justuju
    ग़ज़ल

    मंज़िल की जुस्तुजू | Manzil ki Justuju

    ByAdmin September 19, 2024September 19, 2024

    मंज़िल की जुस्तुजू ( Manzil ki Justuju ) मंज़िल की जुस्तुजू थी मैं लेकिन भटक गयामैं शहरे दिल को ढूँढने यूँ दूर तक गया आहट जो आने की मिली मुखड़ा चमक गयादिल याद कर के जल्वों को तेरे धड़क गया रिश्तों का ये पहाड़ ज़रा क्या दरक गयानाराज़ हो वो ख़त मेरे दर पर पटक…

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  • एकांत
    कविताएँ

    एकांत | Ekant

    ByAdmin September 19, 2024September 19, 2024

    एकांत ( Ekant ) यह एकांत जो हमें ,हमसे मिलाता है ।यह एकांत जो हमें ,जीना सिखाता है ।यह एकांत जो हमें ,शक्तिशाली बनाता है ।यह एकांत जो हमारे ,गुणों को बाहर लाता है ।यह एकांत जो हमारे ,ह्रदय में चैन लाता है ।और धीरे धीरे यह ,हमारे जीवन का ,महत्वपूर्ण भाग बन जाता है…

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  • हिन्दी दिवस पर आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन की राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता
    साहित्यिक गतिविधि

    हिन्दी दिवस पर आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन की राष्ट्रीय पत्र लेखन प्रतियोगिता

    ByAdmin September 18, 2024September 18, 2024

    आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय स्तर पर पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई , जिसका विषय था –मेरे हिंदी शिक्षक को पत्रसंस्थान अध्यक्ष अनुपमा अनुश्री के अनुसार इस प्रतियोगिता में भारत के सभी प्रांत राजस्थान ,महाराष्ट्र ,कर्नाटक ,दिल्ली, मध्य प्रदेश , उत्तर प्रदेश आदि राज्यों से लगभग डेढ़ सौ छात्र-छात्राओं…

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  • Dr Jaspreet Kaur Falak
    कविताएँ

    ए ज़िन्दगी! | Aye Zindagi

    ByAdmin September 18, 2024September 18, 2024

    ए ज़िन्दगी! ( Aye Zindagi ) उसे चुन लिया जिसे चाहा नहीं था कभी….. मुझे मुआफ़ कर ए ज़िन्दगी! डॉ जसप्रीत कौर फ़लक( लुधियाना ) यह भी पढ़ें :-

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