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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • डॉक्टर बिटिया रानी थी | Doctor Bitiya Rani Thi
    कविताएँ

    डॉक्टर बिटिया रानी थी | Doctor Bitiya Rani Thi

    ByAdmin August 19, 2024

    ( क्षोम है, दुख है, दुर्भाग्य है…यह कैसी विडंबना! ) डॉक्टर बिटिया रानी थी दिन माह क्षण भूमंडल पर धू धू करती इस अवनी पर आक्रोश, क्लेश संघर्षों का एक पल चैन नहीं मिलता। होना क्या है समय गर्भ में कोई कुछ नहीं कह सकता ऐसा कौन दिन न बिता हो जो, खबर अशुभ नहीं…

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  • चाहने वाले कितने | Ghazal Chahane Wale
    ग़ज़ल

    चाहने वाले कितने | Ghazal Chahane Wale

    ByAdmin August 18, 2024

    चाहने वाले कितने ( Chahane Wale Kitne ) रिन्दो से पूछो न पत्थर हैं उछाले कितने मत गिनो टूटे हैं मय के यहाँ प्याले कितने जोर तूफ़ान का तो शोर कभी लहरों का सीने में ग़म के समंदर है सँभाले कितने कौन सुनता है ग़रीबों की यहाँ पर देखो नज़रें डालो ज़रा पैरों में हैं…

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  • देख लिया
    गीत

    देख लिया | Geet Dekh Liya

    ByAdmin August 18, 2024August 18, 2024

    देख लिया ( Dekh Liya ) अन्तस लहरों में ज्वार उमड़ता देख लिया। उनकी आँखों में प्यार छलकता देख लिया ।। कैसी सुगंध यह फैल रही उर-उपवन में। जब खिला सरोवर में कोई जलजात नहीं। किसने इस मन को बाँध लिया सम्मोहन में। साँसें महकीं या प्राण जले कुछ ज्ञात नहीं । अब डोल रहा…

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  • Geet Sawan Aaya
    गीत

    सावन आया तू भी आ जा | Geet Sawan Aaya

    ByAdmin August 18, 2024

    सावन आया तू भी आ जा ( Sawan aaya tu bhi aaja ) सावन आया तू भी आ जा। मेरे मन की प्यास बुझा जा। कैसी ह़ालत है क्या बोलूं। तू जो बोले तो लब खोलूं। पल भर मेरे पास में आ कर। मेरी सुन जा अपनी सुना जा। सावन आया तू भी आ जा।…

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  • Geet Utho Desh ke Karnadhar
    कविताएँ

    नया भारत | Kavita Naya Bharat

    ByAdmin August 18, 2024

    नया भारत ( Naya Bharat ) पतझड़ का पदार्पण हुआ है हर ओर एक दुःख छाया है उजड़ गया जो उपवन उसे फिर बारिश से हमें खिलाना है अमावस की स्याह रात है एक-दूसरे के हम साथ है अंधियारा मिटाने के लिये मिलकर दीप जलाना है मझधार में फंसी है नाव हमारी फिर भी हिम्मत…

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  • स्वयं को बदले और
    कविताएँ

    स्वयं को बदले और

    ByAdmin August 18, 2024August 18, 2024

    स्वयं को बदले और ज़माने में आये हो तो जीने की कला को सीखो। अगर दुश्मनों से खतरा है तो अपनो पे भी नजर रखो।। दु:ख के दस्तावेज़ हो या सुख की वसीयत। ध्यान से देखोगें तो नीचे मिलेंगे स्वयं के ही हस्ताक्षर।। बिना प्रयास के मात्र हम नीचे गिर सकते है। ऊपर उठ नहीं…

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  • Dr.Amarjit Kaunke
    कविताएँ

    मूल पंजाबी कविता- अमरजीत कौंके | अनुवादक- डॉ. जसप्रीत कौर फ़लक

    ByAdmin August 17, 2024August 24, 2024

    डॉ.अमरजीत कौंके पंजाबी साहित्य के आकाश पर ध्रुव तारे की तरह चमकता हुआ नाम है जिसकी रोशनी में पंजाबी साहित्य मालामाल हुआ है। उनकी रचनाएँ प्रेम के सरोकारों को नए दृष्टिकोण से परिभाषित करती हैं। उनकी कविता की विशेषता है कि यह पाठक से बड़ी ख़ामोशी से हम – कलाम होते हुए उस की रूह…

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  • रक्षा बंधन ये कहे | Raksha Bandhan ye Kahe
    कविताएँ

    रक्षा बंधन ये कहे | Raksha Bandhan ye Kahe

    ByAdmin August 17, 2024August 17, 2024

    रक्षा बंधन ये कहे ( Raksha Bandhan ye Kahe ) रक्षा बंधन प्रेम का, मनभावन त्यौहार। जिससे भाई बहन में, नित बढ़े है प्यार। बहनें मांगे ये वचन, कभी न जाना भूल। भाई-बहना प्रेम के, महके हरदम फूल।। रेशम की डोरी सजी, बहना की मनुहार। रक्षा बंधन प्यार का, सुंदर है त्योहार।। रक्षा बंधन प्यार…

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  • ह़ाजत तुम्हारी
    ग़ज़ल

    ह़ाजत तुम्हारी | Ghazal Hajat Tumhari

    ByAdmin August 17, 2024

    ह़ाजत तुम्हारी ( Hajat Tumhari ) मयस्सर हो गर हमको उल्फ़त तुम्हारी। करेंं हर घड़ी दिल से मिदह़त तुम्हारी। न छूटेगी अब हमसे संगत तुम्हारी। हमें हर क़दम पर है ह़ाजत तुम्हारी। हमारी शिकस्ता सी इस अन्जुमन में। मसर्रत की बाइ़स है शिरकत तुम्हारी। जहां भर की दौलत का हम क्या करें,जब। ख़ुशी दिल को…

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  • आवाज मन की
    कविताएँ

    आवाज मन की | Kavita Awaz Man Ki

    ByAdmin August 17, 2024

    आवाज मन की ( Awaz Man Ki ) ताना-बाना दिमाग का मन से, छुआ-छूत जाति-धर्म मन से । मिटाते भूख नजर पट्टी बांध-, बाद नहाते तृप्त हो तन से। क्या गजब खेल मन का भईया , दुश्मन भी कुछ पल का सईया। उद्घाटित उद्वेलित उन्नत उन्नाव -, उद्विग्न हो नियम की मरोड़ता कलईया। फिर दलित…

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