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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • जो मुमकिन हो | Ghazal Jo Mumkin ho
    ग़ज़ल

    जो मुमकिन हो | Ghazal Jo Mumkin ho

    ByAdmin August 17, 2024

    जो मुमकिन हो ( Jo Mumkin ho ) मिलो जिनसे कभी, लहजा नरम रखना, जमीं पर तुम सदा अपने कदम रखना ।। बहक जाए नहीं इकदाम इशरत मे, अदावत में ज़रा अपना करम रखना ।। मुलाक़ातों का होगा सिलसिला कायम, मिलें नजरें तो आँखो मे शरम रखना।। बनाकर दूरिया चलना मुहब्बत में, फसाने मे हकीकत…

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  • अपनापन
    कहानियां

    अपनापन | Laghu Katha Apnapan

    ByAdmin August 17, 2024

    निशा जी को परिचारिका बड़े प्यार से उनके कमरे में बिठाकर उन्हें सब कुछ समझाकर बाहर निकल गई। निशा जी गौर से कमरे को चारों तरफ से देखने लगीं। कुर्सी से उठकर खिड़की के पास आ गई और बाहर देखने लगीं। बाहर बहुत सुंदर फूलों से सजा बगीचा देख उनके होंठों पर मुस्कान तैर गई।…

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  • रक्षा बंधन के गीतों में भोजपुरी की खुशबू
    विवेचना

    रक्षा बंधन के गीतों में भोजपुरी की खुशबू

    ByAdmin August 17, 2024August 22, 2024

    विदित हो कि रक्षा बंधन 19 अगस्त 2024 को पड़ने वाला है, इस अवसर पर भोजपुरी गीतों का स्वर गूंजने लगा है, और जिंदगी में खुशबू-सी आने लगी है। एक तरफ भोजपुरी गीत की स्वर साधिका सुष्मिता का एक गीत -“सोना में सोहागवा जइसे” और वहीं दूसरा गीत -“सावन मासे ए भइया उचरेला कागवा” श्रोताओं…

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  • Poem on Azadi in Hindi
    कविताएँ

    क्या हम आजाद हैं | Kya Hum Azad Hain

    ByAdmin August 17, 2024

    क्या हम आजाद हैं कहने को आज़ाद तो कहलाते हैं, पर आज़ाद रह नहीं पाते हैं। कोई गुलाम जातिवाद का, कोई राजनीति के गुलाम बन जाते हैं। साम्प्रदायिकता और दलों के फेर में, बंधकर हम रह जाते हैं। अन्याय और अत्याचार सह सहकर, यूं ही घुटकर रह जाते हैं। आज भी देश में दहेज प्रथा,…

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  • मेरे प्यारे भैया | Kavita Mere Pyare Bhaiya
    कविताएँ

    मेरे प्यारे भैया | Kavita Mere Pyare Bhaiya

    ByAdmin August 17, 2024

    मेरे प्यारे भैया ( Mere Pyare Bhaiya ) मेरे प्यारे भैया राखी के वचन निभाना तुम मेरे प्यारे भैया इस बार राखी में नई रित चलाओ तुम। अपनी प्यारी बहना को आत्मरक्षा के गुर सिखाओ तुम। अच्छी नौकरी वाला लड़का ढूंढने के बजाय उसे खुद आत्मनिर्भर बनाओ तुम। जो मुझे चाहे उसे मेरा जीवन साथी…

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  • आओ चले योग की ओर
    विवेचना

    सच्ची स्वतंत्रता आएंगी – योग से

    ByAdmin August 17, 2024

    पूरे देश में स्वतंत्रता के 78वीं वर्षगांठ मनाई जा रहा है। हमें इस विषय पर चिंतन करने की आवश्यकता है। क्या हम स्वतंत्र हैं? स्वतंत्रता का अर्थ है अपना तंत्र, अपना कानून, अपना नियम। देखने की आवश्यकता है कि क्या हम अपने बनाए हुए नियम कानून पर चल पाते हैं। वास्तव में देखा जाए तो…

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  • कभी बदलते नहीं | Kabhi Badalte Nahi
    कविताएँ

    कभी बदलते नहीं | Kabhi Badalte Nahi

    ByAdmin August 17, 2024August 17, 2024

    कभी बदलते नहीं ( Kabhi Badalte Nahi ) बहुत लिखी बहुत सुनी हमने कथा और कहानियाँ। जिसने सच में बदल दी हमारी छोटी सी दुनिया। बहुत कुछ करना और कराना अभी बाकी है। और समाज को अपने बिखरने से बचाना है।। दुख बहुत होता है जब अपने अपनों को लूटते है। और अपने होने का…

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  • जो यहाँ | Ghazal Jo Yahan
    ग़ज़ल

    जो यहाँ | Ghazal Jo Yahan

    ByAdmin August 17, 2024

    जो यहाँ ( Jo Yahan ) हमनशीं हमनवा दिलदार हुआ करते थे इश्क़ के वो भी तलबगार हुआ करते थे लूट लेते थे वो पल भर में ही सारी महफ़िल शेर ग़ज़लों के असरदार हुआ करते थे चंद सिक्को में ये अख़बार भी बिक जाते अब जो कभी सच के तरफ़दार हुआ करते थे सबको…

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  • राखी का त्यौहार
    कविताएँ

    राखी का त्यौहार निराला | Rakhi ka Tyohar Nirala

    ByAdmin August 17, 2024

    राखी का त्यौहार निराला ( Rakhi ka Tyohar Nirala ) राखी का त्यौहार निराला ,जाने ये संसार। सावन की है देख पूर्णिमा ,आनंदित परिवार।। माथे तिलक लगाकर भाई ,बहना चूमे माथ। बाँध कलाई रक्षा बंधन,पाती उसका साथ।। रक्षा बंधन सूत्र नेह का ,पावन होती डोर। वचन भ्रातृ रक्षा का देता ,होकर भाव विभोर। रंग बिरंगी…

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  • हुज़ूर आपका
    ग़ज़ल

    हुज़ूर आपका | Ghazal Huzoor Aapka

    ByAdmin August 17, 2024August 17, 2024

    हुज़ूर आपका ( Huzoor Aapka ) हुज़ूर आपका अंदाज़ क्या निराला है नज़र मिला के ही बस हमको मार डाला है बदल रहे हैं जो मौक़े पे अपने चेहरे को उन्हीं का आज ज़माने में बोलबाला है ज़माना इसलिए पढ़ता है शौक से हमको ग़ज़ल में रंग मुहब्बत का हमने ढाला है लगे न चोट…

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