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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • मृत्यु तुल्य विश्वास | Kavita Mrityu Tulya Vishwas
    कविताएँ

    मृत्यु तुल्य विश्वास | Kavita Mrityu Tulya Vishwas

    ByAdmin August 15, 2024August 17, 2024

    मृत्यु तुल्य विश्वास ( Mrityu Tulya Vishwas ) मृत्यु तुल्य विश्वास पड़ा है ,संजीवन पिलवाओ । रजनी के माथे पर कोई ,फिर बिंदिया चमकाओ।। तुम्हीं शिवा राणा लक्ष्मी हो ,और जवाहर गाँधी । तुमने ही मोड़ी थी बढ़कर ,काल चक्र की आँधी । अर्जुन जैसा आज यहाँ पर , तुम गाण्डीव उठाओ ।। मृत्यु तुल्य…

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  • हमारा वतन | Ghazal Hamara Watan
    ग़ज़ल

    हमारा वतन | Ghazal Hamara Watan

    ByAdmin August 15, 2024

    हमारा वतन ( Hamara Watan ) बहुत खूबसूरत हमारा वतन हमें जान से भी है प्यारा वतन हमें याद रखनी शहादत सभी लहू दे के सबने सँवारा वतन नज़र कोई बद डाल सकता नहीं है आँखों का सबकी ये तारा वतन सभी मज़हबों को यहाँ चैन है जगत भर में है अपना न्यारा वतन है…

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  • Bharat Desh par Kavita
    कविताएँ

    मेरा वतन है जग से न्यारा

    ByAdmin August 15, 2024August 15, 2024

    मेरा वतन है जग से न्यारा मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं पे जन्नत से कम नही।। गंगा, पर्वत झरने, उपवन, हर लेते ये बरबस ही मन, राजा हो या फिर वनवासी, अलग अलग है भाषा भाषी, सूरज चाँद सितारे मिलकर, होने देते कभी भी तम नहीं।। मेरा वतन है जग से न्यारा, जमीं…

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  • इश्क़ जुगनू-सा | Ishq Jugnu sa
    कविताएँ

    इश्क़ जुगनू-सा | Ishq Jugnu sa

    ByAdmin August 15, 2024

    इश्क़ जुगनू-सा ( Ishq Jugnu sa ) जीवन के अंधियारे तिमिर में तुम जुगनू की तरह टिमटिमाये पल भर-प्रेम का दीवा जलाकर फिर कुहासा छाये जलते-बुझते जुगनुओं-सा नेह तुम्हारा पलता है ना आता है ना जाता है बस हल्का-सा स्पंदन देता है। जुगनू जैसे– जलता-बुझता वैसा तुम्हारा प्रेम दिखता है और— वैसे ही तुम भी…

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  • 15 अगस्त (कविता)
    कविताएँ

    मेरा जिगर तिरंगा | Mera Jigar Tiranga

    ByAdmin August 15, 2024

    मेरा जिगर तिरंगा ! ( Mera jigar tiranga ) मेरा अमर तिरंगा है, मेरा जिगर तिरंगा है। रग – रग में यही बसता, ऐसा ये तिरंगा है। मेरी आन तिरंगा है, मेरी शान तिरंगा है, कोई दुश्मन देखे इसे, दहलाता तिरंगा है। तेरा भी तिरंगा है, मेरा भी तिरंगा है, तू नजर उठा के देख,…

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  • Raksha Bandhan Parv
    भोजपुरी कविता

    बहिनिया पुकारे | Bahiniya Pukare

    ByAdmin August 15, 2024

    बहिनिया पुकारे अँखिया के अंगना में रखिहऽ दुलारे ए भइया तोहरी बहिनिया पुकारे । झेंझ नाहीं करी सवनवा में कबो दिल के दरपनवा में देखिहऽ तूँ अबो राखी बान्हे तऽ अरतिया उतारे, ए भइया तोहरी,,,,,। देई के टीका मिठइया खिआवे भइया भइया कही के बतियावे अँखिया में बाकि ना नेहिया निहारे, ए भइया तोहरी,,,,। रोपेआ…

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  • शब्दाक्षर की शाम देश के नाम कार्यक्रम आयोजित
    साहित्यिक गतिविधि

    शब्दाक्षर की शाम देश के नाम कार्यक्रम आयोजित

    ByAdmin August 15, 2024

    नवलगढ़ झुंझुनूं राजस्थान। गायत्री मंदिर परिसर में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था राजस्थान ईकाई द्वारा शब्दाक्षर की शाम देश के नाम कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान ईकाई शब्दाक्षर के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की तथा मुख्य अतिथि नगरपालिका उपाध्यक्ष कैलाश चोटिया विशिष्ट अतिथि…

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  • हम जीतेंगे...हम जरूर जीतेंगे
    कविताएँ

    हर घर-घर में लगा तिरंगा

    ByAdmin August 14, 2024August 14, 2024

    हर घर-घर में लगा तिरंगा हर घर-घर में लगा तिरंगा, डोले अपनी शान में, हर दिल-दिल में बसा तिरंगा, बोले अपने मान में, देखो लाज तुम्हारी हूँ मैं, रखना सदा ये ध्यान में, हर घर-घर में लगा तिरंगा, डोले अपनी शान में, भारत माँ का वसन हूँ मैं, ढँकता उसकी लाज, देशभक्त के साहस का,…

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  • Desh Prem par Kavita
    कविताएँ

    देश प्रेम | Kavita Desh Prem

    ByAdmin August 14, 2024

    देश प्रेम ( Desh Prem ) मां, ऐसी मुझे जवानी दे मर जाऊ, इस देश के खातिर, शाम सूबा ये, पानी दे मां ऐसी मुझे जवानी दे । नही चाहिये हल्दी, चंदन, तन को पीला करने को l देना है तो गर्व से मुझको,  तिलक धारा धूल बलिदानी दो l मां ऐसी मुझे जवानी दो…

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  • स्त्री योद्धा होती है
    कविताएँ

    स्त्री योद्धा होती है | Stree Yoddha Hoti hai

    ByAdmin August 14, 2024

    स्त्री योद्धा होती है ( Stree Yoddha Hoti hai ) खून पानी ही नहीं, अपनी रंगत भी देती है, माँ गर्भ धारण कर, खुशी का संगत देती है। नौ महीने का सफर आसान नहीं, हर बच्चे का ओर(गतिविधि) सामान नहीं। एक में करती बहुत उल्टी, तो दूसरे में खाती मिट्टी। चेहरे पर झाई(दाग), पक गये…

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