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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • अनाथ
    कहानियां

    अनाथ

    ByAdmin June 16, 2025June 16, 2025

    “कहाँ मर गयी? और कितनी आवाज लगानी पड़ेगी? जल्दी से भैया का दूध गर्म करके लेकर आ। देख नहीं रही कि भैया भूख के कारण लगातार रोता जा रहा है।” राधा ने गुस्से से तेज़ आवाज में दस वर्षीय आराध्या से कहा। “बस अभी लायी मम्मी। थोड़ा सा स्कूल का काम बाकी रह गया था,…

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  • शूल शैया
    कहानियां

    शूल शैया

    ByAdmin June 16, 2025June 16, 2025

    शूल शैया पर लेटे भीष्म पितामह के इच्छा मृत्यु के वरदान को आज अभिशप्त साबित करता ये एक-एक पल, एक -एक युग सा भीष्म पितामह को महसूस हो रहा था।         दर्द जिस्म के पोर – पोर  से लहू बनकर सैलाब ला चुका था।       विडंबना यह कि मुख से आह भी निकालना स्वयं का…

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  • Beti or pita par kavita
    विवेचना

    पितृ दिवस: एक दार्शनिक चिंतन

    ByAdmin June 15, 2025June 15, 2025

    पिता, यह केवल एक शब्द नहीं, बल्कि एक ऐसी सत्ता है जो हमारे जीवन के ताने-बाने को बुनती है। मातृ दिवस पर जितना भावुक उद्रेक और काव्यमय अभिव्यक्ति होती है, पितृ दिवस पर उतनी सहजता से नहीं दिखती। शायद इसलिए कि पिता का प्रेम अक्सर मौन, अदृश्य और कठोरता की चादर ओढ़े होता है। यह…

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  • Pita ek kalpavriksha
    कविताएँ

    छाया है पिता

    ByAdmin June 15, 2025June 15, 2025

    छाया है पिता बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। पिता करता नहीं दिखावा कोईआँसू छिपाता अन्तर में अपने।तोड़ता पत्थर दोपहर में भी वोचाहता पूरे हों अपनों के सपने।बरगद की घनी छाया है पिताछाँव में उसके भूलता हर दर्द। भगवान का परम आशीर्वाद हैपिता जीवन की इक सौगात है।जिनके सिर पे…

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  • चतुर्थ वीरेन्द्र कुमार सक्सेना स्मृति सम्मान
    साहित्यिक गतिविधि

    चतुर्थ वीरेन्द्र कुमार सक्सेना स्मृति सम्मान एवं कविसम्मेलन: साहित्य साधकों का हुआ सम्मान

    ByAdmin June 15, 2025June 15, 2025

    मौर्य भवन जवाहरपुरी बदायूं में स्व.वीरेन्द्र कुमार सक्सेना जी की स्मृति में कविसम्मेलन और सम्मान समारोह का आयोजन बरेली के मशहूर उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया गया।काव्यदीप हिन्दी साहित्यिक संस्थान द्वारा यह लगातार चौथा आयोजन है। इस अवसर पर मुख्यातिथि रहे बरेली के मशहूर कवि हिमांशु श्रोत्रिय तथा जानी मानी…

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  • मौन की मुस्कान
    पुस्तक समीक्षा

    “मौन की मुस्कान” – चुप्पियों के शब्दों में गूंजती स्त्री की आत्मा

    ByAdmin June 15, 2025June 15, 2025

    “मौन की मुस्कान” केवल कविताओं का संग्रह नहीं, एक स्त्री की आत्मा से निकली आवाज़ है। प्रियंका सौरभ की रचनाएँ जीवन, प्रेम, संघर्ष, और सामाजिक अन्याय को गहरे संवेदनात्मक और वैचारिक धरातल पर उठाती हैं। हर कविता मौन को भाषा और चुप्पी को प्रतिरोध में बदलती है। चाहे वह सरकारी स्कूलों की आवाज़ हो या…

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  • पौधे की कीमत
    कहानियां

    पौधे की कीमत

    ByAdmin June 12, 2025June 12, 2025

    संध्या मैडम ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “बच्चों कल पर्यावरण दिवस है। कल हम सभी शिक्षक व बच्चें पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेंगे तथा बाकी लोगों व बच्चों को भी पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रेरित करेंगे। पर्यावरण दिवस के अवसर पर सभी बच्चे अपने घर से एक-एक पौधा लेकर आएंगे और उसको स्कूल में…

    Read More पौधे की कीमतContinue

  • सन्तुष्टि
    कहानियां

    ‘सन्तुष्टि’

    ByAdmin June 12, 2025June 12, 2025

    2 साल बाद एक दिन राजेंद्र ने अपने मित्र एवं पूर्व शिक्षक साथी संतोष को कॉल की और उनसे पूछा- “संतोष भाई, कैसे हाल-चाल है? घर परिवार में सब ठीक है?” “सब बढ़िया है राजेन्द्र भाई। तुम सुनाओ।” संतोष ने कहा। “हमारे यहाँ भी घर परिवार में सब ठीक हैं भैया। तुमसे बात किये हुए…

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  • रिश्तों का एटीएम
    आलेख

    रिश्तों का एटीएम: जब प्यार केवल ट्रांज़ैक्शन बन जाए

    ByAdmin June 12, 2025June 12, 2025

    रिश्ते अब महज़ ज़रूरतों के एटीएम बनते जा रहे हैं। डिजिटल दुनिया ने संवाद को ‘रीचार्ज पैकेज’ और मुलाक़ातों को ‘होम-डिलीवरी’ में बदल दिया है। दिलचस्पी कम होते ही लगाव की नींव दरकने लगती है—माँ-बेटे के फ़ोन-कॉल में ‘ऑर्डर डिलिवर्ड’ का नोटिफ़िकेशन रह जाता है, दोस्ती ‘वीडियो क्लिप फ़ॉरवर्ड’ तक सिमट जाती है, और दाम्पत्य…

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  • विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2
    ग़ज़ल

    विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2

    ByAdmin June 12, 2025September 1, 2025

    मुलाक़ात कम नहीं होती अजीब बात है यह रात कम नहीं होतीमेरी निगाह से ज़ुल्मात कम नहीं होती मुझे भी उनसे मुहब्बत है कह नहीं सकतामुहब्बतों पे मगर बात कम नहीं होती वो एक दिन तो मुहब्बत के तीर छोड़ेंगेहमारी उनसे मुलाक़ात कम नहीं होती तेरे हुज़ूर वफाओं का तज़करा क्या होतेरे करम की करामात…

    Read More विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2Continue

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