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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Aachary bhikshu
    कविताएँ

    आचार्य श्री भिक्षु का 299 वाँ जन्म दिवस एवं 267 वाँ बोधि दिवस

    ByAdmin July 11, 2024July 11, 2024

    आचार्य श्री भिक्षु का 299 वाँ जन्म दिवस एवं 267 वाँ बोधि दिवस – प्रातः स्मरणीय महामना आचार्य श्री भिक्षु के 299 वाँ जन्म दिवस तथा 267 वाँ बोधि दिवस मेरा भावों से शत – शत वन्दन । आज के इस अवसर पर मेरी भावना — आचार्य श्री भिक्षु का 299 वाँ जन्म दिवस एवं…

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  • मोहब्बत में अंतर
    कविताएँ

    मोहब्बत में अंतर | Mohabbat me Antar

    ByAdmin July 11, 2024

    मोहब्बत में अंतर ( Mohabbat me Antar ) पहले और अब में बहुत अंतर आ गया है। मिलने मिलाने का अब दौर खत्म सा हो गया है। आत्मीयता का तो मानों अब अंत सा हो रहा है। रिश्तें नाते तो अब सिर्फ टेकनालाजी से निभ रहे है।। वो भी क्या दिन थे जब चुपके चुपके…

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  • रिश्ते-आम कह दूॅ क्या
    कविताएँ

    रिश्ते-आम कह दूॅ क्या?

    ByAdmin July 11, 2024

    रिश्ते-आम कह दूॅ क्या? सुनहरी याद को जाम कह दूँ क्या? इस ह्दय को शमशान कह दूँ क्या ।।1। अब प्रतीक्षा सीमा से ज्यादा हो गई, अवतार कल्कि समान कह दूँ क्या ।।2। रोग पुराना होकर भी पुराना कहाँ? दवा तारीफ की सरेआम कह दूँ क्या ।।3। रास्ते भी मंजिल से खूबसूरत बन जाते, प्रेमी…

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  • बादल आषाढ़ के | Baadal Ashad ke
    कविताएँ

    बादल आषाढ़ के | Baadal Ashad ke

    ByAdmin July 11, 2024

    बादल आषाढ़ के ( Baadal Ashad ke ) घिर आए फिर बादल आषाढ़ के, हे जलज मेघ तो अब बरसाओ, तपते जेठ से अब त्रस्त हुए सब तुम कुछ राहत तो अब पहुचाओं।। तुम्हारे बिना सुनी थी हरियाली मन में ना कोई भी थी खुशहाली ! प्यासी धारा तप रही चहूं ओर से, तुम बिन…

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  • उसी के दिल में
    ग़ज़ल

    उसी के दिल में | तरही ग़ज़ल

    ByAdmin July 11, 2024

    उसी के दिल में ( Usi ke dil me ) उसी के दिल में बसी मेरी जान थोड़ी है अकेली मुझपे वही मेहरबान थोड़ी है हँसी-मज़ाक है , वो बदज़बान थोड़ी है कि मुझसा उसका कोई क़द्रदान थोड़ी है सभी ने हुस्न की मलिका उसे कहा है यहाँ हमारा एक ये तन्हा बयान थोड़ी है…

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  • बोतल
    कविताएँ

    बोतल | Kavita Botal

    ByAdmin July 11, 2024July 11, 2024

    बोतल ( Botal ) ता-ता थैया करती बोतल लाती है बाहर l उसकी ताकधीना-धिन पर नाच रहा संसार l बोतल में है समाया सारे जग का सार l करता है गुलामी बोतल की संसार l बिन बोतल के सूना है संसार बिना बोतल नहीं नहीं है मनुज का उद्धार। बोतल के दम पर आज बच्चा…

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  • बहती रहती जीवन धारा | Bahati Rahti Jeevan Dhara
    कविताएँ

    बहती रहती जीवन धारा | Bahati Rahti Jeevan Dhara

    ByAdmin July 11, 2024July 11, 2024

    बहती रहती जीवन धारा ( Bahati Rahti Jeevan Dhara ) महामृत्यु के आंचल में भी जीवन की रेखाएं। मानव मन की जिजीविषा ही पुष्पित हो मुस्काए। विविधि वर्जनाओं में चलता रहता सर्जन क्रम है। आस्थाओं का दीप प्रज्वलित हरता तम विभ्रम है। नित्य नवीन अंकुरित आशा उत्साहित कर जाती, कर्मठता पलती अभाव में करती रहती…

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  • आओ जी लें प्रेम से कुछ पल
    कविताएँ

    आओ जी लें प्रेम से कुछ पल

    ByAdmin July 11, 2024

    आओ ,जी लें प्रेम से कुछ पल अंतस्थ वृद्धन अंतराल , निर्मित मौन कारा । व्याकुल भाव सरिता, प्रकट सघन अंधियारा । पहल कर मृदु संप्रेषण, हिय भाव दें रूप सकल । आओ, जी लें प्रेम से कुछ पल ।। भीगा अंतर्मन संकेतन, जीवन पथ रिक्ति भाव। अस्ताचल स्वप्न माला, धूप विलोपन छांव । अब…

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  • क्या आचार डालोगे रूप का | Kya Achar Dalogi Roop ka
    कविताएँ

    क्या आचार डालोगे रूप का | Kya Achar Dalogi Roop ka

    ByAdmin July 10, 2024

    क्या आचार डालोगे रूप का आज समोसा बोला कवि से,क्यों इतना घबड़ाते हो। मिलाकर चटनी,खट्टी मीठी,अपना स्वाद बढ़ाते हो। मेरी कैसी दुर्गति होती,क्या तुम कभी लिखपते हो। देख तड़पता मुझको तलते,अपना हाथ बढ़ाते हो।। पहले पानी डाल मजे से,घूंसे से पिटवाते हो। हाथों से फिर नोच नोच कर,बेलन से बेलवाते हो। हरा लाल मिर्चों की…

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  • घर बेटी का | Kavita Ghar Beta Ka
    कविताएँ

    घर बेटी का | Kavita Ghar Beta Ka

    ByAdmin July 10, 2024

    घर बेटी का ( Ghar Beta Ka ) आज घर में सन्नाटा छा गया। जब बेटी ने प्रश्न एक किया। जिसका उत्तर था नही हमारे पास। की घर कौनसा है बेटियों का।। पैदा होते ही घर वाले कहते है। बेटी जन्मी है जो पराया धन है। बेटा जन्मता तो कुल दीपक होता। पर जन्म हुआ…

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