Skip to content
TheSahitya – द साहित्य
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
  • EnglishExpand
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • My ProfileExpand
    • Logout
    • Account
TheSahitya – द साहित्य
  • अपना लिया बेगाने को | Ghazal Apna Liya
    ग़ज़ल

    अपना लिया बेगाने को | Ghazal Apna Liya

    ByAdmin July 8, 2024July 8, 2024

    अपना लिया बेगाने को ( Ghazal Apna Liya Begane ko ) मैंने देखा है न बोतल को न पैमाने को शैख आते हैं मगर रोज़ ही समझाने को जाम पर जाम दिये जायेगी जब उनकी नज़र कौन जा सकता है इस हाल में मैख़ाने को निकहत-ओ-नूर में डूबी हुई पुरक़ैफ फ़िज़ा इक नया रंग सा…

    Read More अपना लिया बेगाने को | Ghazal Apna LiyaContinue

  • विनती करो स्वीकार माँ | वंदना
    कविताएँ

    विनती करो स्वीकार माँ | वंदना

    ByAdmin July 8, 2024

    विनती करो स्वीकार माँ हे शारदे ,वंदन नमन विनती करो , स्वीकार माँ । शुचिता सदा ,उर में भरो प्रज्ञा सुफल , शृंगार माँ ।। श्वेतांबरा ,कर मति विमल अंतर बहे ,धारा तरल । दे लक्ष्य अब ,पावन सकल भर शक्ति रस ,हर भव गरल ।। हो स्नेह की ,भाषा नयन उर में भरो ,संस्कार…

    Read More विनती करो स्वीकार माँ | वंदनाContinue

  • गुप्त नवरात्रि
    विवेचना

    गुप्त साधनाओं एवम् अपने ईष्ट की प्रसन्नता के लिए गुप्त नवरात्रि है विशेष

    ByAdmin July 8, 2024

    नवरात्रि का यदि हम स्मरण करते हैं तो विशेष रूप से नवदुर्गा में दुर्गा पूजा का भाव आता है वैसे हम वर्ष में दो बार दुर्गा पूजा आध्यात्मिक उपासना के साथ धूमधाम से पूजन अर्चन करते हैं लेकिन इसके अतिरिक्त भी साल में दो नवरात्रि आते हैं जिन्हें गुप्त नवरात्रि के नाम से हम सभी…

    Read More गुप्त साधनाओं एवम् अपने ईष्ट की प्रसन्नता के लिए गुप्त नवरात्रि है विशेषContinue

  • टिप टिप बरसा पानी | Geet Tip Tip Barsa Pani
    गीत

    टिप टिप बरसा पानी | Geet Tip Tip Barsa Pani

    ByAdmin July 7, 2024

    टिप टिप बरसा पानी ( Tip Tip Barsa Pani ) टिप टिप बरसा पानी, अब मौसम हुआ सुहाना। रिमझिम रिमझिम बरसे, मेघा गाए नया तराना। टिप टिप बरसा पानी घोर घटाएं अंबर छाई, उमड़ घुमड़ मेघा आए। काले काले बादल बरसे, ठंडी ठंडी बुंदे लाएं। दमके दामिनी नभ में, जब गरजे बरखा रानी। झिरमिर झिरमिर…

    Read More टिप टिप बरसा पानी | Geet Tip Tip Barsa PaniContinue

  • तितली लगती है
    ग़ज़ल

    तितली लगती है | Ghazal Titli Lagti Hai

    ByAdmin July 7, 2024

    तितली लगती है ( Titli Lagti Hai ) माह धनक खुशरंग फ़जा तितली लगती है पाक़ीज़ा फूलों सी वो लड़की लगती है। सौदा बेच रही है वो ढॅंक कर पेशानी बातों से ढब से सुलझी सच्ची लगती है। देख के उसको दिल की धड़कन बढ़ जाती है ना देखूं तो सांस मेरी रुकती लगती है।…

    Read More तितली लगती है | Ghazal Titli Lagti HaiContinue

  • आम
    कविताएँ

    आम | Aam

    ByAdmin July 7, 2024July 7, 2024

    आम ( Aam ) आम सब फलों का राजा मीठा रसीला फलों का राजा जून में लग जाता जोरदार खट्टा मीठा फलों का राजा नाम दाम रंग रूप अनेक स्वाद सुंदर फलों का राजा दशहरी हापूज़ तोता पुरी ताज़ा लंगड़ा केस़र फलों का राजा मिश्री से मीठा मधुर ज़ायक़ा कच्चा पक्का फलों का राजा कच्चे…

    Read More आम | AamContinue

  • धरती की व्यथा | Kavita Dharti ki Vyatha
    कविताएँ

    धरती की व्यथा | Kavita Dharti ki Vyatha

    ByAdmin July 7, 2024

    धरती की व्यथा ( Dharti ki Vyatha ) मैं खुश थी जब धरती न कहला कर सूरज कहलाती थी तुममें समा तुम्हारी तरह स्थिर रह कर गुरुग्रह जैसे अनेक ग्रहों को अपने इर्द गिर्द घुमाती थी पर जबसे तुमने मुझे पृथक अस्तित्व में लाने का प्रण किया तभी से एक नित नया अहसास दिया ।…

    Read More धरती की व्यथा | Kavita Dharti ki VyathaContinue

  • सुमन सिंह ‘याशी’
    ग़ज़ल

    आजमाने लगे हैं | Aazamane Lage Hain

    ByAdmin July 7, 2024July 7, 2024

    आजमाने लगे हैं ( Aazamane Lage Hain ) जिन्हे दोस्त अब तक खजाने लगें हैं । वही दोस्ती आजमाने लगे हैं ।। हरिक झूठ जिनकी मुझे है अकीदत। मिरे सच उन्हे बस बहाने लगे हैं ।। नही मोल गम आसुओं की,तभी तो । बिना वज़्ह हम मुस्कुराने लगे है ।। शजर काटता वो बड़ी जालिमी…

    Read More आजमाने लगे हैं | Aazamane Lage HainContinue

  • मैं हैरान हूं | Main Hairan Hoon
    कविताएँ

    मैं हैरान हूं | Main Hairan Hoon

    ByAdmin July 7, 2024July 9, 2024

    मैं हैरान हूं ( Main Hairan Hoon ) मैं हैरान हूं, आखिर क्यों लोग? मौत का जिम्मेदार, बाबा को नहीं मान रहे , क्यों लोग मात्र , सेवादार और आयोजकों को, दोषी ठहरा रहे हैं। आखिर कौन सा डर , बाबा को दोषी मानने से , रोक रहा है । कहीं बाबा श्राप न देदे…

    Read More मैं हैरान हूं | Main Hairan HoonContinue

  • गाँव बिखर गया
    कविताएँ

    गाँव बिखर गया | Kavita Gaon Bikhar Gaya

    ByAdmin July 7, 2024

    गाँव बिखर गया ( Gaon Bikhar Gaya ) जिंदगी का अब कोई भरोसा नही। कब आ जाये बुला हमें पता नही। इसलिए हँसते खेलते जी रहा हूँ। और जाने की प्रतिक्षा कर रहा हूँ।। जो लोग लक्ष्य के लिए जीते है। उनकी जिंदगी जिंदा दिल होती है। और जो लोग हकीकत से भागते है। जिंदगी…

    Read More गाँव बिखर गया | Kavita Gaon Bikhar GayaContinue

Page navigation

Previous PagePrevious 1 … 182 183 184 185 186 … 832 Next PageNext
  • Home
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • About Us
  • Contact us
  • Sitemap
Facebook X Instagram YouTube TikTok

© 2026 TheSahitya - द साहित्य

  • English
    • Hindi
    • Bhojpuri
    • Nepali
    • Urdu
    • Arabic
    • Marathi
    • Punjabi
    • Bengali
  • Home
  • Write
  • Story
  • Poem
  • Article
  • Login/ Register
Search