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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Ghazal Aaj ki Raat
    ग़ज़ल

    आज की रात | Ghazal Aaj ki Raat

    ByAdmin July 3, 2024July 3, 2024

    आज की रात ( Aaj ki Raat ) आज की रात इधर से वो हो कर गुजरी लाख की बात सहर सी हो कर गुजरी थाम के हाथ चले थे जब भी वो मेरा वक्त के साथ नहर सी हो कर गुजरी मान कर बात कहा था उसने ऐसे ही चाह के हाथ लहर सी…

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  • मन की पीड़ा
    कविताएँ

    मन की पीड़ा | Kavita Man ki Peeda

    ByAdmin July 3, 2024

    मन की पीड़ा ( Man ki Peeda ) मन की पीड़ा मन हि जाने और न कोई समझ सका है भीतर ही भीतर दम घुटता है कहने को तो हर कोई सगा है अपने हि बने हैं विषधारी सारे लहू गरल संग घूम रहा है कच्ची मिट्टी के हुए हैं रिश्ते सारे मतलब की धुन…

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  • मेरे हमसफर
    कविताएँ

    मेरे हमसफर | Kavita Mere Humsafar

    ByAdmin July 3, 2024

    मेरे हमसफर ( Mere Humsafar ) ए मेरे हमसफर देखती हूं जिधर आते हो तुम नजर । कभी दिल की धड़कन बनकर सांसों की डोर से जुड़ जाते हो। कभी आंखों में चुपके से आकर ज्योति बनकर चमकते हो । कभी होठों की मुस्कान बनकर चेहरे का नूर बढ़ाते हो । कभी सूरज की किरण…

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  • sanjh suhani
    कविताएँ

    देखो, आई सांझ सुहानी

    ByAdmin July 3, 2024July 3, 2024

    देखो,आई सांझ सुहानी गगन अंतर सिंदूरी वर्ण, हरितिमा क्षितिज बिंदु । रवि मेघ क्रीडा मंचन, धरा आंचल विश्रांत सिंधु । निशि दुल्हन श्रृंगार आतुर , श्रम मुख दिवस कहानी । देखो,आई सांझ सुहानी ।। मंदिर पट संध्या आरती, मधुर स्वर घंटी घड़ियाल । हार्दिक आभार परम सत्ता, परिवेश उत्संग शुभता ढाल । परिवार संग हास्य…

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  • अपनापन
    कविताएँ

    अपनापन | Kavita Apnapan

    ByAdmin July 2, 2024

    अपनापन ( Apnapan ) सफर करते-करते कभी थकती नहीं, रिश्ता निभाने का रस्म कभी भूलती नहीं, कभी यहाँ कभी वहाँ आनातुर, कभी मूर्खता कभी लगता चातुर्य, समझ से परे समझ है टनाटन, हर हालत में निभाते अपनापन, किसी को नहीं मोहलत रिश्तों के लिए, कोई जान दे दिया फरिश्तों के लिए, कोई खुशी से मिला,कोई…

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  • Soch Badalna Hoga
    निबंध

    बरसात का मौसम : एक प्राकृतिक वरदान

    ByAdmin July 2, 2024July 2, 2024

    प्रस्तावना: बरसात का मौसम, जिसे मॉनसून भी कहते हैं, प्रकृति का एक अनमोल तोहफा है। यह मौसम साल के उन कुछ महीनों में आता है जब आसमान से बूंदों की बारिश होती है और धरती पर हरियाली का विस्तार होता है। यह केवल एक मौसमी बदलाव नहीं है, बल्कि मानव जीवन और पर्यावरण के लिए…

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  • बनारस में साहित्यिक महोत्सव :  “काशी की क़लम” और “बरगद के साये में” पुस्तक का भव्य लोकार्पण
    साहित्यिक गतिविधि

    बनारस में साहित्यिक महोत्सव : “काशी की क़लम” और “बरगद के साये में” पुस्तक का भव्य लोकार्पण

    ByAdmin July 2, 2024July 3, 2024

    बनारस में एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें गिरीश पांडेय बनारसी जी के ग़ज़ल संग्रह ” बरगद के साये में “ और जय प्रकाश मिश्र धानापुरी जी की पुस्तक “काशी की क़लम” का लोकार्पण किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में साहित्य और कविता प्रेमियों का जमावड़ा लगा, जहां सभी ने दोनों लेखकों की साहित्यिक…

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  • हरियाली तुम आने दो
    कविताएँ

    हरियाली तुम आने दो | Kavita Hariyali Tum Aane Do

    ByAdmin July 2, 2024

    हरियाली तुम आने दो ( Hariyali Tum Aane Do ) बारिश को अब आने दो। तपती गर्मी जाने दो।। ये बादल भी कुछ कह रहे। इनको मन की गाने दो।। कटते हुए पेड़ बचाओ। शुद्ध हवा कुछ आने दो।। पंछी क्या कहते है सुन लो। उनको पंख फैलाने दो।। फोटो में ही लगते पौधे। सच…

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  • कौन किसका
    कविताएँ

    कौन किसका | Kavita Kon Kiska

    ByAdmin July 2, 2024

    कौन किसका ( Kon Kiska ) रिश्तों का अर्थ देखो कैसे लोग भूल गये है। होते क्या थे रिश्तें क्या समझाए अब उनको। कितनी आत्मीयता होती थी सभी के दिलों में। मिलने जुलने की तो छोड़ों आँखें मिलाने से डरते है।। कौन किस का क्या है किसको सोचने का वक्त है। मैं बीबी बच्चें बस…

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  • मेरी यह कहानी है जरा हट के, नाम रखे हैं बड़े सोच समझ के
    कहानियां

    मेरी यह कहानी है जरा हट के, नाम रखे हैं बड़े सोच समझ के

    ByAdmin July 2, 2024July 9, 2024

    प्रस्तुत कहानी पूर्ण रूप से काल्पनिक है। इसका किसी भी तरह का किसी से कोई भी संबंध नहीं है। विद्युत उपकरण कंपनी के नाम का इस्तेमाल करके लेखक ने यह कहानी लिखी है। यदि कोई नाम या घटना किसी से मिलती है तो इसे मात्र संयोग समझा जाए। “मेरी यह कहानी है जरा हट के,…

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