• समझ नहीं आता | Kavita Samajh Nahi Aata

    समझ नहीं आता ( Samajh Nahi Aata ) कैसी ये उहापोह है समझ नहीं आता क्यों सबकुछ पा जाने का मोह है समझ नहीं आता लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं फिर भी कैसी ये टोह है समझ नहीं आता खुशियों के संग की चाहत है रिश्तों से फिर क्यों विछोह है समझ नहीं आता शिखा…

  • कर्मठ बनिए | Kavita Karmath Baniye

    कर्मठ बनिए ( Karmath Baniye ) निरन्तर लगाव का भाव रखना , हद और सरहद जमीन की होती है ।।1। भारतीय अंधेरे भी हैं मुट्ठी बांधे , हाथापाई की झड़प चीन की होती है ।।2। शब्द के प्रयोग से प्रभाव शून्य होता, सम्मान सदैव मनहर मौन की होती है।।3। हर युद्ध का पथप्रदर्शक धर्म रहा…

  • खत से इजहार | Kavita Khat se Izhaar

    खत से इजहार ( Khat se izhaar ) दिल की पीड़ा को नारी भली भाती जानती है। आँखों को आँखों से पढ़ना भी जानती है। इसलिए तो मोहब्बत नारी से शुरू होकर। नारी पर आकर ही समाप्त होती है।। मोहब्बत होती ही है कुछ इसी तरह की। जो रात की तन्हाई और सुहाने मौसम में।…

  • दूधवाला | Kavita Doodhwala

    दूधवाला ( Doodhwala ) घर-घर आता सुबह शाम, ड्रम दूध के हाथों में थाम। दरवाजे पर आवाज लगाता, संग में लस्सी भी है लाता। सुबह-सुबह जल्दी है उठता, उठकर दूध इकठ्ठा करता। साफ- सफाई रखता पूरी, तोल न करता कभी अधूरी। मिलावट से है कतराता, दूध हमेशा शुद्ध ही लाता। आंधी, वर्षा, सर्दी, गर्मी, भूल…

  • बारिश | Baarish

    मुझे याद है वो बारिश का पानी और उसके साथ की कहानी उस दिन सुबह से ही बादल गड़गड़ा रहे थे। हम सब कल्लू चाचा के घर भागवत भंडारे मे जाने को तैयार हो रहे थे। सबने नये कपड़े पहने थे मगर मैने पुरानी कमीज ही पहन रखी थी क्योंकी कल मुझे मेरे दोस्त के…

  • व्रीड़ा | Kavita Vrida

    व्रीड़ा (  Vrida ) खोया स्वत्व दिवा ने अपना, अंतरतम पीड़ा जागी l घूँघट नैन समाए तब ही, धड़कन में व्रीड़ा जागी ll अधर कपोल अबीर भरे से, सस्मित हास लुटाती सी, सतरंगी सी चूनर ओढ़े, द्वन्द विरोध मिटाती सी, थाम हाथ साजन के कर में सकुचाती अलबेली सी, ठिठक सिहर जब पाँव बढ़ा तो,…

  • जीवन की सार्थकता | क्या हम सार्थक जीवन जी रहे हैं?

    जीवन की सार्थकता प्रस्तावना: जीवन की सार्थकता एक ऐसा विषय है जो मानव सभ्यता के इतिहास में अनंत काल से चर्चा का विषय रहा है। यह प्रश्न व्यक्तिगत, सामाजिक, और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। 1. व्यक्तिगत दृष्टिकोण: जीवन की सार्थकता प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग हो सकती है। यह उन लक्ष्यों, सपनों,…

  • आज का काव्यानंद | डॉ० रामप्रकाश ‘पथिक’

    जल का बल बढ़ा हुआ है आजकल, नालों का अभिमान।सब पथिकों के मार्ग में, बने हुए व्यवधान।। नदियाँ पोखर ताल सब, बने कष्ट के हेतु।जल के बल ने कर दिए, व्यर्थ बहुत से सेतु।। भारी बम-बौछार समांत— आरपदांत—- बचाओ इस दुनिया कोमात्राभार- २४छंद — रोला भारी बम-बौछार, बचाओ इस दुनिया को।मचता हाहाकार, बचाओ इस दुनिया…

  • चल चित्र | Kavita Chal Chitra

    चल चित्र ( Chal Chitra ) चल चित्र का आज कल क्या हाल हो रहा है। देखो अब दर्शको का टोटा सा पड़ रहा है। एक जमाना था चलचित्रों का जो देखते ही बनता था। पर अब हाल बहुत बुरा है देखों चल चित्रों का।। लड़ते मरते थे दर्शक देखने को पहला शो। हालत ये…

  • इनकी उनकी बात | हंसगति छन्द

    इनकी उनकी बात इनकी उनकी बात , आज क्यों करना । अपने मन के घाव , स्वयं है भरना ।। इनकी उनकी बात … हम सब में है प्यार , और क्या लेना । इन्हें बताओ आप , आज सच है ना ।। जीवन है अनमोल , मानता गहना । खुशी मिलेगी आप , खोजते…