• मेरी ट्रेन यात्रा | Meri Train Yatra

    अभी गर्मी की छुट्टी चल रही है हर काॅलेज और विश्वविधालय में पठन – पाठन का कार्य बंद है कहीं समर कैंप तो कहीं कुछ चल रहा है हम भी गर्मी छुट्टी मनाने के लिए अपने गाँव आए कुछ दिन रहने के बाद मन ही नहीं करता कि वापस विश्वविधालय जाऊँ। लेकिन मेरे चाहने से…

  • क्या कविता क्या गीत | Kya Kavita Kya Geet

    क्या कविता क्या गीत ( Kya Kavita Kya Geet ) ऐसा लगता जीवन सारा, व्यर्थ गया हो बीत। क्या कविता क्या गीत। पीड़ाओं ने मुझको पाला, अभिशापों ने मुझे सम्हाला। अंधियारे भरपूर मिले हैं, अंजुरी भर मिल सका उजाला। आंख झपकते सदा किया है, सपनों ने भयभीत। क्या कविता क्या गीत। कैसा कथन कौन सी…

  • बचपना | बालगीत

    बचपना  ( Bachpana ) पुआल पर दौड़कर जीत जाते हैं, बारिश में भीगकर नाव चलाते हैं। बर्तनों से खेलकर खाना बनाते हैं-, चुपके से चलके याद, बचपन में चले जाते हैं । मुकुट मोर पंखों का लगाकर, कृष्ण बन जाते हैं, नीले आकाश को छूकर धरती पर इतराते हैं। कपड़ा ओढ़ मेढ़क बनकर, बारिश करवाते…

  • अपने और पराये | Kavita Apne aur Paraye

    अपने और पराये ( Apne aur Paraye ) जो कल तक दोस्त थे अब वो दुश्मन बन गये हैं। जो खाते थे कसमें यारों सदा साथ निभानें की। जरा सा वक्त क्या बदला की बदल गये ये सब। और छोड़कर साथ मेरा चले गये कही और।। जो अपने स्वर्थ को तुम रखोगे जब साथ अपने।…

  • संक्षिप्त पाक यात्रा

    दिनांक 4 जून से 19 जून तक 5 जून से 18 जून तक पाक सर ज़मीन पर अपने नज़रिये से सफ़र आसान अरमान के अनुकूल रहा सिंध स़़बे ढाट में हिंदू मुस्लिम एकता भाई-चारा का कनूठा उदाहरण मिला। देहाती इलायके में बुनियादी हु़कू़क़ से मह़रूम है विशेषकर पेयजल के बारे बच्चे बुढ्ढे युवा बुज़ुर्ग महिलाऐं…

  • राष्ट्रधर्म | Kavita Rashtradharm

    राष्ट्रधर्म ( Rashtradharm ) देश काल सापेक्ष संस्कृति का जिसमें विस्तार है। राष्ट्र धर्म है श्रेष्ठ सभी से, सब धर्मों का सार है। प्राप्त अन्नजल जिस धरती से, बनी प्राणमय काया, जिसकी प्रकृति सम्पदा पाकर, हमने सब भर पाया, पवन प्रवाहित हो श्वांसों में, ऊर्ज्वस्वित है करता, अपने विविधि उपादानों से, जीवन सुखद बनाया, करे…

  • समझ नहीं आता | Kavita Samajh Nahi Aata

    समझ नहीं आता ( Samajh Nahi Aata ) कैसी ये उहापोह है समझ नहीं आता क्यों सबकुछ पा जाने का मोह है समझ नहीं आता लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं फिर भी कैसी ये टोह है समझ नहीं आता खुशियों के संग की चाहत है रिश्तों से फिर क्यों विछोह है समझ नहीं आता शिखा…

  • कर्मठ बनिए | Kavita Karmath Baniye

    कर्मठ बनिए ( Karmath Baniye ) निरन्तर लगाव का भाव रखना , हद और सरहद जमीन की होती है ।।1। भारतीय अंधेरे भी हैं मुट्ठी बांधे , हाथापाई की झड़प चीन की होती है ।।2। शब्द के प्रयोग से प्रभाव शून्य होता, सम्मान सदैव मनहर मौन की होती है।।3। हर युद्ध का पथप्रदर्शक धर्म रहा…

  • खत से इजहार | Kavita Khat se Izhaar

    खत से इजहार ( Khat se izhaar ) दिल की पीड़ा को नारी भली भाती जानती है। आँखों को आँखों से पढ़ना भी जानती है। इसलिए तो मोहब्बत नारी से शुरू होकर। नारी पर आकर ही समाप्त होती है।। मोहब्बत होती ही है कुछ इसी तरह की। जो रात की तन्हाई और सुहाने मौसम में।…

  • दूधवाला | Kavita Doodhwala

    दूधवाला ( Doodhwala ) घर-घर आता सुबह शाम, ड्रम दूध के हाथों में थाम। दरवाजे पर आवाज लगाता, संग में लस्सी भी है लाता। सुबह-सुबह जल्दी है उठता, उठकर दूध इकठ्ठा करता। साफ- सफाई रखता पूरी, तोल न करता कभी अधूरी। मिलावट से है कतराता, दूध हमेशा शुद्ध ही लाता। आंधी, वर्षा, सर्दी, गर्मी, भूल…