बचपना | बालगीत

बचपना 

( Bachpana )

पुआल पर दौड़कर
जीत जाते हैं,
बारिश में भीगकर
नाव चलाते हैं।
बर्तनों से खेलकर
खाना बनाते हैं-,
चुपके से चलके याद,
बचपन में चले जाते हैं ।

मुकुट मोर पंखों का लगाकर,
कृष्ण बन जाते हैं,
नीले आकाश को छूकर
धरती पर इतराते हैं।
कपड़ा ओढ़ मेढ़क बनकर,
बारिश करवाते हैं,
चुपके से चलकर यादें,
बचपन में चले जाते हैं।

प्रतिभा पाण्डेय “प्रति”
चेन्नई

यह भी पढ़ें :-

कर्मठ बनिए | Kavita Karmath Baniye

Similar Posts

  • जय हो जय हो कलम तेरी | Jai ho Kalam Teri

    जय हो जय हो कलम तेरी  ( Jai ho jai ho kalam teri )    तीर और तलवार कहां कब कर पाए वह काम कभी कलमों के ताकत के आगे टिका कौन बलवान कभी   जड़चेतन में जान फूंककर पिघल पिघल स्याही लिख दी सिंहनाद सी कलम गरज कर युग की युगभावी लिख दी  …

  • बदरा अब तो बरसो रे | Poem in Hindi on Badal

    बदरा अब तो बरसो रे ( Badra ab to barso re )    प्यारे बदरा अब तो बरसो रे, काले बदरा यू नही तरसा रे। तरस रही हमारी अंखियां रे, झमा झम करते बरस जा रे।। तुझे पूजे सारी यह दुनियां रे, अब बरसों मेघों के राजा रे। नही करो अब कल परसो रे, तुमसे…

  • आदमी है जो | Aadmi hai Jo

    आदमी है जो ( Aadmi hai jo )   आदमी है जो  सबको हॅंसाता रहे खुद भी हॅंसता रहे मुस्कराता रहे।   दूर कर दे हर दुखड़े हॅंसी प्यार से जीत ले सारी मुस्किल सदाचार से   लाख बाधाएं आए उसे भूल कर आगे बढ़ते कदम को बढ़ाता रहे, आदमी है जो  सबको हॅंसाता रहे…

  • त्राहिमाम | Kavita Trahimam

    त्राहिमाम ( Trahimam )   प्रकृति विकृति समाया चलो इसे उबारें उमस गहन छाया चलो आंधियां लाएं सन्नाटा सघन पसरा चलो चुप्पिया॔ तोड़ें चित्कारें चरम छूती चलो चैतन्य पुकारें प्रचंड प्रलय आया चलो गीत-मीत गाएं बेसुध कराहे बसुधा चले पीयूष पिलायें मानव बना दुर्वासा चलो मनुज बनाएं स्याह सबेरा दिखता चलो सोनल चमकायें मन असुरी…

  • दीपावली सबसे प्यारा त्यौहार

    दीपावली सबसे प्यारा त्यौहार दीपावली है दीपोत्सव का सबसे प्यारा त्यौहार,दीपक जलाकर इसे मनाता हैं देखो सारा संसार।जगमगाता है जग, दीपक की ज्योति की लौ से,दीप जलाते,खुशी मनाते हैं, है रंगोली की भरमार।। दीपावली सनातनियों का है सबसे प्यारा त्यौहार,जग के अंधकार मिटाता है होती रोशनी की भरमार ।बुराई से अच्छाई की विजय कर घर…

  • घर | Ghar par kavita

    घर ( Ghar )   सोने बैठने रहने का ठिकाना है सबसे सुंदर आशियाना है घर।। जहां मां बाप भाई हैं बेटा बेटी और लुगाई है जहां अपने है जीवन के सपने हैं जहां हर तरह का बहाना है ऐसा ठिकाना है घर….. थक हार कर जब स्कूल से आते हैं घर पर ही आराम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *