• आचरण | Acharan

    आचरण ( Acharan ) राम कृष्ण हनुमान की करते सब बातें। करे नहीं अमल पर उनके आचरणों को।। आये जब संकट तो याद आये हनुमान। हे संकट मोरचन तुम हरो हमारे कष्ट। मैं अर्पित करूँगा तुम्हें घी और सिंदूर। सुख शांति मुझे दो मेरे पालन हार।। बात करें जब भी हम मर्यादाओं की। याद आ…

  • जुदाई के ज़ख्म | Judai ke Zakhm

    सन् 1971 की हिंद पाक लड़ाई के दौरान बेघर होकर आये पाक विस्थापित लोगों में एक मात्र मैं एक शख़्स़ हूं जो छठ्ठी बार परिवार के लोग सातवीं बार जन्म भूमि की यात्रा कर चुके है प्रथम बार क्रमश: 1980 1999 2ं005 2006 2015 2018 एंव 2024 में वैधानिक रुप से पासपोर्ट वीज़ा से होकर…

  • मानव तन पाकर भजा न प्रभु को

    मानव तन पाकर भजा न प्रभु को मानव तन पा करके, भजा न प्रभु को जो। यह अनमोल जीवन अपना, वृथा ही दिया उसने खो। मानव तन पा करके, भजा न प्रभु को जो। गया ठगा द्वारा ठगिनी माया के। झूठा रंग चढ़ाया अपनी काया पे। छोड़ फूल बीज कांटे का, लिया बो जो। यह…

  • हबीब | Nazm Habib

    हबीब ( Habib ) मुझे लगा था मेरे लिए तुम तो कुछ कहोगे मुझे लगा था तुम तो मुझे जानते ही होगे मुझे लगा था तुम तो समझ पाओगे मेरी व्यथा मुझे लगा था मेरा अस्तित्व तुम्हें तो होगा पता मुझे लगा था मुझे नहीं मिली कभी जो मुझे लगा था कि तुम तो दोगे…

  • ज़माने की हुक्मरानी | Ghazal Zamane ki Hukmarani

    ज़माने की हुक्मरानी ( Zamane ki Hukmarani ) भरी दिमागों में जिन जिन के बेइमानी है उन्हीं के बस में ज़माने की हुक्मरानी है बना रहे हैं ये नेता सियासी मोहरा हमें नशे में मस्त मगर अपनी नौजवानी है सितम शिआर मेरा हौसला तो देख ज़रा कटी ज़बान है छोड़ी न हक़ बयानी है खड़े…

  • जुदाई एक नासूर | Judai ek Nasoor

    बर स़ग़ीर मुल्क भारत के लिये सन् 1946 का विभाजन भारत पाकिस्तान एक अभिशाप के रूप में स़ाबित हुआ भारत से मुस्लिम समुदाय ओर पाकिस्तान से हींदू वर्ग परस्पर पलायन किया जिसका भेंयकर आज तक कोढ़ में खाज बना हुआ है । उसके बाद सनऋ 1965 1971 की भारत पाक की जंग सीमिवर्ती क्षेत्रों में…

  • आज की रात | Ghazal Aaj ki Raat

    आज की रात ( Aaj ki Raat ) आज की रात इधर से वो हो कर गुजरी लाख की बात सहर सी हो कर गुजरी थाम के हाथ चले थे जब भी वो मेरा वक्त के साथ नहर सी हो कर गुजरी मान कर बात कहा था उसने ऐसे ही चाह के हाथ लहर सी…

  • मन की पीड़ा | Kavita Man ki Peeda

    मन की पीड़ा ( Man ki Peeda ) मन की पीड़ा मन हि जाने और न कोई समझ सका है भीतर ही भीतर दम घुटता है कहने को तो हर कोई सगा है अपने हि बने हैं विषधारी सारे लहू गरल संग घूम रहा है कच्ची मिट्टी के हुए हैं रिश्ते सारे मतलब की धुन…

  • मेरे हमसफर | Kavita Mere Humsafar

    मेरे हमसफर ( Mere Humsafar ) ए मेरे हमसफर देखती हूं जिधर आते हो तुम नजर । कभी दिल की धड़कन बनकर सांसों की डोर से जुड़ जाते हो। कभी आंखों में चुपके से आकर ज्योति बनकर चमकते हो । कभी होठों की मुस्कान बनकर चेहरे का नूर बढ़ाते हो । कभी सूरज की किरण…

  • देखो, आई सांझ सुहानी

    देखो,आई सांझ सुहानी गगन अंतर सिंदूरी वर्ण, हरितिमा क्षितिज बिंदु । रवि मेघ क्रीडा मंचन, धरा आंचल विश्रांत सिंधु । निशि दुल्हन श्रृंगार आतुर , श्रम मुख दिवस कहानी । देखो,आई सांझ सुहानी ।। मंदिर पट संध्या आरती, मधुर स्वर घंटी घड़ियाल । हार्दिक आभार परम सत्ता, परिवेश उत्संग शुभता ढाल । परिवार संग हास्य…