श्रीशैल चौगुले की कविताएं | Shrishail Chougule Poetry
प्रेमः अमृत-नमक. नमक ने मुझे ईन्सान बनायानहि तो मै जहरिला बन जाताकिसी के प्रेम कि रुची पाकरदिल देकर जीवन युध्द जीता. कहते है विषलोक में मग्रुरीउसको पाके सच्ची दुनिया देखासारा जहर अहंम का ऊतरापहली नजर में मन को फुंकाईन्सानो में भाव होती है दिल्लगीवीषधारी को प्रेम कभी न भाँता. कारण जवानी के दो रुह एकदोष…










