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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • तेरे पाठ और तेरे गीत | Kavita Tere Paath Aur Tere Geet
    कविताएँ

    तेरे पाठ और तेरे गीत | Kavita Tere Paath Aur Tere Geet

    ByAdmin June 29, 2024

    तेरे पाठ और तेरे गीत पढ़ा रहे हो पाठ कोई, या सुना रहे हो कोई गीत, कुछ भी हो सुंदर हैं दोनों, तेरे पाठ और तेरे गीत, याद रखूंगी पाठ तुम्हारे, याद रखूंगी तेरे गीत, जीवन के लिए जरूरी दोनों, तेरे पाठ और तेरे गीत, सीख जरूरी जीवन में, संगीत जरूरी जीवन में, दोनों ही…

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  • मेघ
    कविताएँ

    मेघ | Kavita Megh

    ByAdmin June 29, 2024

    मेघ ( Megh ) मेघ तुम इतना भी ना इतराना जल्दी से तुम पावस ले आना बारिश की बूंद कब पड़ेंगी मुख पर, तुम मेघ अमृत को जल्दी बरसाना ।। तरस रहे सभी प्राणी ये जग जीवन करते हैं तुम्हारा मिलकर अभिनंदन आजाओ हम बाट निहारें कब से मेघ मल्हार राग भी तुमसे ही सारे…

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  • वे जीवित ही मरते
    कविताएँ

    वे जीवित ही मरते

    ByAdmin June 29, 2024

    वे जीवित ही मरते कर्मशील जीवित रह कर के, हैं आराम न करते। नहीं शिकायत करता कोई, मुर्दे काम न करते। जीवन का उद्घोष निरन्तर, कर्मशीलता होती। कर्मक्षेत्र में अपने श्रम के, बीज निरंतर बोती। है शरीर का धर्म स्वेद कण, स्निग्ध त्वचा को कर दें, अकर्मण्यता ही शय्या पर, लेटी रह कर रोती। जो…

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  • शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था राजस्थान ईकाई  द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन
    साहित्यिक गतिविधि

    शब्दाक्षर राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था राजस्थान ईकाई द्वारा कवि गोष्ठी का आयोजन

    ByAdmin June 29, 2024

    गत सांय अंगिरा गेस्ट हाउस नवलगढ़ में स्वतंत्र पत्रकार पूर्व प्रांतपाल कवि व शब्दाक्षर के प्रचार मंत्री जगदीश प्रसाद जांगिड के 80 वें जन्मदिन पर उनका सम्मान पुष्प माला साफा शाल व उपहारों से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान ईकाई शब्दाक्षर के प्रदेश अध्यक्ष वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ दयाशंकर जांगिड ने की तथा मुख्य अतिथि…

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  • हम पंछी उन्मुक्त गगन के
    कविताएँ

    हम पंछी उन्मुक्त गगन के | Hum Panchi Unmukt Gagan ke

    ByAdmin June 29, 2024June 29, 2024

    हम पंछी उन्मुक्त गगन के ( Hum Panchi Unmukt Gagan ke ) धूप की पीली चादर को, हरी है कर दें, तोड़ के चाॅद सितारे, धरती में जड़ दें, सब रंग चुरा कर तितली के, सारे जहाॅ को रंगीन कर दें, हम पंछी उन्मुक्त गगन के, उड़ें उड़ान बिना पंखों के, अपने काल्पनिक विचारों को,…

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  • कुदरत का करिश्मा
    कविताएँ

    कुदरत का करिश्मा | Kavita Kudrat ka Karishma

    ByAdmin June 29, 2024

    कुदरत का करिश्मा ( Kudrat ka Karishma ) नीचे ऊपर के मिलन से देखो बारिस हो रहा। बदलो का पर्वतो से देखो टकराना हो रहा। जिसके कारण देखो खुलकर वर्षा हो रहा। स्वर सरगम के मिलन से देखो वर्षा हो रहा।। गीत मल्हार के सुनकर खुश हो रहे इंद्रदेव। और खुशी का इजहार कर रहे…

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  • किताबें खुशबू देती हैं | Kavita Kitaben Khushboo Deti Hai
    कविताएँ

    किताबें खुशबू देती हैं | Kavita Kitaben Khushboo Deti Hai

    ByAdmin June 29, 2024

    किताबें खुशबू देती हैं ( Kitaben Khushboo Deti Hai ) किताबें खुशबू देती हैं जीवन महका देती हैं l किताबों में समाया ज्ञान विज्ञान l किताबों का जग करे गुण~गान l किताबों ने निर्मित की है जग में विभूति महान l अकिंचन कालिदास, सूर, तुलसीदास नभ में चमके भानु समान l किताबें गुणों भरी है…

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  • कागा की कविताएं
    कविताएँ

    कागा कारवां | Kaga Karvan

    ByAdmin June 29, 2024September 9, 2024

    हिंदी है हम हिंदी है हम हिंदी राष्ट्र भाषा हमारी लिखना पढ़ना हिंदी में राष्ट्र भाषा हमारी हिंदी आन बान शान जान ज़ुबान आलीशान रोम रोम में बहती धारा भाषा हमारी हर शब्द में प्रेम की ख़ुशबू पावन कल कल करती रस धारा भाषा हमारी बोल चाल में खिलते दिल के कंवल आनंद की चलती…

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  • बचपन लौटा दो
    कविताएँ

    बचपन लौटा दो | Kavita Bachpan lauta do

    ByAdmin June 28, 2024June 28, 2024

    बचपन लौटा दो ( Bachpan lauta do ) मुझे मेरा बचपन लौटा दो, बालपन का पौधा महका दो, आंगन की किलकारियां गुनगुना दो, दादी की पराती सुना दो, मां का आंचल ओढ़ा दो, पापा के खिलौने ला दो, बैग का बोझ घटा दो, कागज का नाव तैरा दो, कान्वेंट से गुरुकुल पहुंचा दो । एकलव्य…

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  • प्रकृति व स्त्री विमर्श
    पुस्तक समीक्षा

    पुस्तक समीक्षा : ” प्रकृति व स्त्री विमर्श “

    ByAdmin June 28, 2024June 28, 2024

    पुस्तक समीक्षा:“प्रकृति व स्त्री विमर्श ” लेखिका: डॉक्टर सुमन धर्मवीर प्रकाशक: पुष्पांजलि विगत दिनों से जब से यह पुस्तक मेरे हाथ में समीक्षा के लिए आई है। तब से मेरे मन में सबसे पहले इसके टाइटल को लेकर कौतुहल था। प्रकृति तो प्रकृति है पर इसके साथ स्त्री विमर्श का क्या औचित्य है। खैर थोड़ी…

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