तेरे पाठ और तेरे गीत | Kavita Tere Paath Aur Tere Geet

तेरे पाठ और तेरे गीत

पढ़ा रहे हो पाठ कोई,
या सुना रहे हो कोई गीत,
कुछ भी हो सुंदर हैं दोनों,
तेरे पाठ और तेरे गीत,

याद रखूंगी पाठ तुम्हारे,
याद रखूंगी तेरे गीत,
जीवन के लिए जरूरी दोनों,
तेरे पाठ और तेरे गीत,

सीख जरूरी जीवन में,
संगीत जरूरी जीवन में,
दोनों ही जीवन के मीत,
तेरे पाठ और तेरे गीत,

पाठ तमस जीवन का हर ले,
गीत रौशनी मन मे भर दें,
यही रौशनी यही हैं दीप,
तेरे पाठ और तेरे गीत।

Abha Gupta

आभा गुप्ता
इंदौर (म. प्र.)

यह भी पढ़ें :-

हम पंछी उन्मुक्त गगन के | Hum Panchi Unmukt Gagan ke

Similar Posts

  • मन मे भेद | Man per Kavita

    मन मे भेद ( Man me bhed )   वैचारिक मतभेद होना स्वाभाविक है हर किसी का व्यक्तिगत संसार है किंतु ,आपसी मन मुटाव कर देता है बाधित कई सफलताओं को…. मन मुटाव भी स्वाभाविक है हक है सभी को अपनी तरह से जीना किंतु ,बात जब परिवार या समाज की हो तब ,आपका मूल्य…

  • तपना होगा | Tapna Hoga

    तपना होगा ( Tapna hoga )    बेतहाशा भागती इस भीड़ मे तुम्हारी विनम्रता की आवाज भी कोई मायने नही रखती ठीक है ,आपकी भावनाओं मैं दया ,ममता ,करुणा सभी हैं फिर भी ,किसी से घायल हुए पंछी को भी आपमे सिद्धार्थ दिखाई नही देगा आसान नहीं है मानव के बीच मानव बनकर रहना जहां…

  • Kavita | कुंभ की धार्मिक महत्व

    कुंभ की धार्मिक महत्व ( Kumbh ka dharmik mahatva )   सनातन धर्म की पौराणिकता को, याद दिलाता है यह कुंभ । बारह वर्षों में एक बार ही , आता है यह कुंभ ।   सभी देवों का धरती पर , होता जिस पल आगमन । संघ साधु संत के सानिध्य का , अवसर दे…

  • ओ भैया प्यारे | O Bhaiya Pyare

    मैं नटखट चंचल हूं बहना   मैं नटखट चंचल हूं बहना भैया की प्यारी हूं बहन एक हाँथ में बाधू राखी दूजे से उपहार है लेना सारे राज छुपा रखे हैं कह दूंगी फिर ना कहना रोज रूठती रोज मनाते झगड़े अपने क्या कहना आज नहीं लडूंगी तुमसे ऐसे ही मुस्कुराते रहना टीका करूं रोली…

  • चुनाव

    चुनाव सही व्यक्ति को – – – – – – ज्यों ज्यों चुनाव आ रहे हैं।नेताजी लाड़ जता रहे हैं। जातिवाद की दुहाई दे रहे ।खुद चरित्र की सफाई दे रहे । वाणी में मधु घुल गया है।ओठों पै गुलाब खिल गया है। दुखती रगें पहचानते हैं।कैसे संतुष्ट करें जानते हैं ? मर्यादाऐं तोड़ रहे…

  • अभी और सधना होगा | Poem abhi aur sadhna hoga

    अभी और सधना होगा ( Abhi aur sadhna hoga )   नहीं  साधना  पूरी  हुई है, अभी और  सधना होगा। अभी कहाँ कुंदन बन पाये, अभी और तपना होगा।।   अभी निशा का पहर शेष है, शेष अभी दिनकर आना अभी भाग्य में छिपा हुआ है, खिलना या मुरझा जाना अभी  और  कंटक  आना  है,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *