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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • कितनी दूर तक जाना होगा
    कविताएँ

    कितनी दूर तक जाना होगा

    ByAdmin June 8, 2024June 8, 2024

    कितनी दूर तक जाना होगा   कितनी दूर तक जाना होगा फासला आज मिटाना होगा। झूठ से बुनियाद हिल जाएगी अपना सच सबसे बताना होगा। काम आए वही है अपना दामन गैरों से बचाना होगा। हम तो चाहत के तलबगार रहें हैं फिर वही धुन बजाना होगा। कुछ भी आसान नहीं है इसमें आग सीने…

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  • आओ पेड़ लगाए | Kavita Aao Ped Lagaye
    कविताएँ

    आओ पेड़ लगाए | Kavita Aao Ped Lagaye

    ByAdmin June 8, 2024June 14, 2024

    आओ पेड़ लगाए ( Aao Ped Lagaye )   आओ पेड़ लगाए मिल हरियाली हम लाएं। हरी भरी धरती को आओ हम स्वर्ग बनाए। पर्यावरण के बन प्रहरी कुदरत को संभाले। प्राणवायु देते हमें आओ फर्ज को निभा ले। एक आदमी एक पेड़ संकल्प हमको लेना। एक वृक्ष मेरी ओर से भी बढ़कर लगा देना।…

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  • गृहिणी जीवन
    कविताएँ

    गृहिणी जीवन | Kavita Grhinee Jeevan

    ByAdmin June 7, 2024June 8, 2024

    गृहिणी जीवन ( Grhinee Jeevan )   प्रबंधन के प्रेरणा सूत्र,गृहिणी जीवन से स्वस्थ स्वच्छ घर द्वार , अथक श्रम अठखेलियां । अनूप निर्वहन विविध भूमिका, ताकत नजाकत अबूझ पहेलियां । परिवार सम्मान अभिरक्षा ध्येय, सदा मंगल स्तुति चितवन से । प्रबंधन के प्रेरणा सूत्र, गृहिणी जीवन से ।। हर सदस्य रूचि ध्यान, पोशाक खान…

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  • पेड़ों को मोहब्बत भरी नजर से देखो तो धूप भी चाँदनी लगेगी
    विवेचना

    पेड़ों को मोहब्बत भरी नजर से देखो तो धूप भी चाँदनी लगेगी

    ByAdmin June 6, 2024

    जिन वृक्षों की छाया में बैठकर लोग विश्राम करते थे,राही सुस्ताते थे,हम तरह-तरह के खेल खेलते थे और परिन्दे अपने घोंसले बनाते थे, फल-फूलों से लदे-सजे वे वृक्ष अब धरती पर कम ही बचे। हमारी लालच ने उन्हें काट डाला। महकते आमों के वृक्ष कहीं दूर-दूर तक नजर नहीं आते। आम की बात छोड़िये बड़े…

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  • पिता का सहारा | Kavita Pita ka Sahara
    कविताएँ

    पिता का सहारा | Kavita Pita ka Sahara

    ByAdmin June 6, 2024

    पिता का सहारा ( Pita ka Sahara ) जिस भी बच्चे के सिर पर पिता का सहारा होता है, दुनिया में खुशनुमा उसके लिए हर एक नजारा होता है। हर एक इच्छा पूरी करते अपने प्यारे बच्चे की, करते दुगनी मेहनत भरपाई करने उसके खर्चे की। मोमबत्ती सा जलकर पिता बच्चों का जीवन रोशन करता…

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  • Kavita Paryavaran aur Ped
    कविताएँ

    पर्यावरण और पेड़ | Kavita Paryavaran aur Ped

    ByAdmin June 6, 2024

    पर्यावरण और पेड़ ( Paryavaran aur ped ) आओ मिलकर पेड़ लगाएं, धरा को फिर से स्वर्ग बनाएं। तेज गर्मी हो या अनावृष्टि, प्रकृति की अनियमितता से बचाएं। बरसों से मानव विकास के नाम पर पेड़ों को है काट रहा। अनजाने में ही वो विनाश का आमंत्रण सबको बांट रहा। पेड़ ही नहीं रहेंगे तो…

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  • वट सावित्री व्रत | Kavita Vat Savitri Vrat
    कविताएँ

    वट सावित्री व्रत | Kavita Vat Savitri Vrat

    ByAdmin June 6, 2024

    वट सावित्री व्रत ( Vat Savitri Vrat ) ( 2 ) अल्पायु सत्यवान का, सावित्री संग व्याह हुआ, दृढ़ संकल्पित सावित्री को, इस बात से भय जरा न हुआ, महाप्रयाण के दिन यमराज, लेने आए जब प्राण सत्यवान, संग सावित्री भी चलीं, तब दिए यमराज वरदान, थी ज्येष्ठ मास की अमावस्या, वट के नीचे सावित्री…

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  • Ram Ram
    दोहे

    प्रभु श्रीराम पर दोहे | Prabhu Shri Ram Par Dohe

    ByAdmin June 6, 2024

    प्रभु श्रीराम पर दोहे ( Prabhu Shri Ram Par Dohe )   कल्प-कल्प अवतार ले,किए विविध प्रभु कर्म। नित प्रति लीला गान से,रघुवर निभता धर्म।।1 रघुवर लीला गान सुन,कवि रचता नव काव्य। श्रेय मिला जग में उसे,हुआ सहज संभाव्य।।2 युगों-युगों होता रहा,पाप पुण्य का खेल। लेखा जोखा की नियति, राम कराएँ मेल।।3 छोड़ द्वंद्व मन…

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  • Suicide is a crime against God
    विवेचना

    आत्महत्या ईश्वर के प्रति अपराध

    ByAdmin June 6, 2024

    प्रेम में असफल होने पर, परीक्षा में फेल होने पर आज का युवा आत्महत्या करने पर उतारू हो जा रहा है। यह कुंठा और हताशा जीवन मूल्यों में आईं गिरावट और आस्था के संकट का परिणाम है। ईश्वर की दी हुई काय को समाप्त करने का अधिकार भी उसे ही है। ऐसे में आत्महत्या मानवता…

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  • हमारा पर्यावरण | Kavita Hamara Paryavaran
    कविताएँ

    हमारा पर्यावरण | Kavita Hamara Paryavaran

    ByAdmin June 6, 2024June 6, 2024

    हमारा पर्यावरण ( Hamara Paryavaran )   मान रखो पर्यावरण का, करो प्रण वृक्षारोपण का, तभी प्रकृति मुस्काएगी, जीवन मे खुशियाॅ लाएगी, पेंड़ पौधे फल फूल क्यारियों से, वन बाग उपवन वाटिका विभूषित हो, नदी झरने ताल समुन्दर स्वच्छ हो, हमारा पर्यावरण दूषित न हो, स्वच्छ साफ धरा रहे, कानन हरा भरा रहें, पर्वत प्रहार…

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