Ram Ram

प्रभु श्रीराम पर दोहे | Prabhu Shri Ram Par Dohe

प्रभु श्रीराम पर दोहे

( Prabhu Shri Ram Par Dohe )

 

कल्प-कल्प अवतार ले,किए विविध प्रभु कर्म।
नित प्रति लीला गान से,रघुवर निभता धर्म।।1

रघुवर लीला गान सुन,कवि रचता नव काव्य।
श्रेय मिला जग में उसे,हुआ सहज संभाव्य।।2

युगों-युगों होता रहा,पाप पुण्य का खेल।
लेखा जोखा की नियति, राम कराएँ मेल।।3

छोड़ द्वंद्व मन के सभी,खोलो मन का द्वार।
राम नाम सुमिरन सदा,पनपे सहज विचार।।4

काम क्रोध मद लोभ से,युक्त सदा संसार।
राम नाम सुमिरन करो,राम करें भव पार।।5

Dr. Sunita Singh Sudha

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
( वाराणसी )
यह भी पढ़ें:-

जिंदगी की कहानी | Ghazal Zindagi ki Kahani

Similar Posts

  • वायदों का झांसा | दोहा

    वायदों का झांसा ( Waydon ka jhansa )   वायदों का झांसा देते नेता जुमले बाज़! जान चुकी जनता इन्हें पोल खुली है आज!! देंगे सबको कहता था पंद्रह पंद्रह लाख! सिंहासन पर बैठ गया चुरा रहा अब आंख!! सत्ता में गुंडे -मवाली बैठे नेताओं संग! भ्रष्ट्रचारी ही लड़ रहे भ्रष्ट्रचार की जंग!! मंदिर -मस्जिद…

  • भावानुवाद विधा दोहा

    भगवान शिव और पार्वती के मध्य हुए रोचक वार्तालाप का भावानुवाद प्रस्तुत है ! कवि का वक्रोक्ति-चमत्कार द्रष्टव्य है। मूल श्लोक इस प्रकार है — कस्त्वं शूली मृगय भिषजं नीलकण्ठ: प्रियेSहम् केकामेकां कुरु पशुपति: नैव दृष्टे विषाणे। स्थाणुर्मुग्धे ! न वदति तरु: जीवितेश: शिवाया: गच्छाटव्यामिति हतवचा पातु वश्चन्द्रचूड़ ।। शिव -गौरा संवाद द्वार बंद शिव…

  • कलियुग का दोहा | Kalyug ka Doha

    कलियुग का दोहा ( Kalyug ka Doha )   फूल रोपिए शूल पाईए झूठ बोलिए सुख रहिए जान लीजिए माल पाइए भला कीजिए बुरा झेलिये पानी मिलायिये रबड़ी खाइये फ़रेब कीजिए कुबेर अरजिए आंचल फैलायिये अस्मिता गंवायिये ठगते रहिए दनदनाते रहिए महल ठोकिए रहम भूलिए दूसरो खाइये आपन बिसारिये देह दिखाईए द्रव्य दर्शाईये शेखर कुमार…

  • नववर्ष दोहे

    नववर्ष दोहे अभिनंदन सबके लिए, लाए ये नववर्ष।हर तबका फूले फले, पहुँचे नव उत्कर्ष।। आशा है नववर्ष में, किस्मत हो रंगीन।प्रेम बढ़े परिवार में, मिटे दु:ख संगीन।। नये साल में कीजिए, नया-नया कुछ काम।छोंड़ के गंदी आदतें, पहुँचो सच्चे धाम।। सदा सत्य अपनाइए, रहो झूँठ से दूर।मिले सफलता आपको, नहीं रहो मगरूर।। रखो स्वच्छ तन-मन…

  • साग़र के दोहे

    साग़र के दोहे 1.सर्दी के आवेग से ,निकली सबकी हाय ।ऐसे में सब ने कहा ,हो जाये अब चाय ।।2.सर्दी में सूझा यही ,सबको एक उपाय।गरम गरम पिलवाइये ,साहब हमको चाय।।3.ठन्डा ,वन्डा रख दिया ,सबने आज उठाय ।सबके मन को भा रही , गरम गरम ही चाय ।।4.सर्दी में क्या पूछना , क्या है किस…

  • स्वाध्याय | Svadhyaya par doha

    स्वाध्याय ( Svadhyaya )   स्वाध्याय जो नित्य करें, मनन करें सुविचार। चित उज्जवल पावन बने, बहे नेह रसधार। उर उजियारा हो सखे, जगे ज्ञान यशदीप। महके चमन जीवन का, मधुर बजे संगीत। पठन अरू पाठन करे, मनन करे दिन-रात। बुध्दिबल यश वैभव बढ़े, मिले सुधीजन साथ।   रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन नवलगढ़ जिला झुंझुनू ( राजस्थान…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *