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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • सियासत में आ गये
    ग़ज़ल

    सियासत में आ गये | Ghazal Siyasat Mein Aa Gaye

    ByAdmin June 10, 2024

    सियासत में आ गये ( Siyasat Mein Aa Gaye )   सारे अज़ीज़ उनकी हिमायत में आ गये मजबूर होके हम भी सियासत में आ गये हाँलाकि ख़ौफ़ सबको सितमगर का था बहुत कुछ लोग फिर भी मेरी वकालत में आ गये इतने हसीन जाल बिछाये थे आपने हम ख़ुद शिकार होके हिरासत में आ…

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  • कभी सोचता हूँ मैं | Kabhi Sochta Hoon Main
    कविताएँ

    कभी सोचता हूँ मैं | Kabhi Sochta Hoon Main

    ByAdmin June 10, 2024

    कभी सोचता हूँ मैं ( Kabhi sochta hoon main )   कभी सोचता हूँ मैं, नहीं है जरूरत तेरी। मगर क्यों मुझे फिर भी, आती है याद तेरी।। कभी सोचता हूँ मैं———————।। मुझको मिलते हैं हर दिन, यहाँ चेहरें हसीन। जो नहीं तुमसे कम, लगते हैं मेहजबीन।। मगर इन आँखों में तो, बसी है तस्वीर…

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  • Kavita Saal ke Barah Maah
    कविताएँ

    साल के बारह माह | Kavita Saal ke Barah Maah

    ByAdmin June 9, 2024

    साल के बारह माह ( Saal ke Barah Maah ) चमके सूरज चैत मे, ताप बढ़े वैशाख जेठ तपन धरती जरे, बरे पेड़ सब राख। गरमी से राहत मिले, बरसे जब आषाढ़ सावन रिमझिम मेघ से,भादो लागे बाढ़ । क्वार द्वार सूखन लगे,मौसम की नव आस गर्मी में नरमी आए, शीतल कार्तिक मास । अगहन…

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  • शब्दाक्षर साहित्यिक संस्था ने दी पूर्व विधायक सांवरमल बासोतिया को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
    साहित्यिक गतिविधि

    शब्दाक्षर साहित्यिक संस्था ने दी पूर्व विधायक सांवरमल बासोतिया को पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

    ByAdmin June 9, 2024

    गत सायं जांगिड अस्पताल परिसर में शब्दाक्षर साहित्यिक संस्था व अलायंस क्लब लार्ड कृष्णा के तत्वावधान मे नवलगढ के पूर्व विधायक पूर्व चेयरमेन पत्रकार व एडवोकेट सांवरमल बासोतिया की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अंतराष्ट्रीय अध्यक्ष व शब्दाक्षर के राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष डाॅ दयाषंकर जांगिड ने की। मुख्य…

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  • उस दर पे कदम मत रखना
    कविताएँ

    उस दर पे कदम मत रखना

    ByAdmin June 9, 2024

    उस दर पे कदम मत रखना जहाँ नहीं मिलता है प्यार तुम्हें। जहाँ नहीं मिलता सम्मान तुम्हें।। उस दर पे कदम मत रखना। उस घर में कदम मत रखना।। जो नहीं दे सकते तुमको खुशी। जज्बात तेरे जो समझे नहीं।। उस दर पे कदम———————।। तुझमें नहीं है कुछ भी कमी। क्यों उनकी गुलामी करता है।।…

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  • पुरस्कारों की बंदर बांट | Puraskaron ka Bandar Baant
    विवेचना

    पुरस्कारों की बंदर बांट | Puraskaron ka Bandar Baant

    ByAdmin June 9, 2024

    आखिर क्यों सही से काम नहीं कर पा रही साहित्य अकादमियां? पिछले दशकों में पुरस्कारों की बंदर बांट कथित साहित्यकारों, कलाकारों और अपने लोगों को प्रस्तुत करने के लिए विशेष साहित्यकार, पुरोधा कलाकार, साहित्य ऋषि जैसी कई श्रेणियां बनी है। जिसके तहत विभिन्न अकादमियां एक दूसरे के अध्यक्षों को पुरस्कृत कर रही है और निर्णायकों…

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  • Laghu Katha Pramanikta
    कहानियां

    प्रामाणिकता | Laghu Katha Pramanikta

    ByAdmin June 9, 2024

    रेल छोटे से रेलवे स्टेशन पर ठहरी. रामू ने चायवाले से चाय ली. चायवाले को २०० ₹ की नोट दी। चायवाला बाकी रकम गिनकर वापस करे। उस से पहले ट्रेन रवाना हो गयी। ट्रेन के रवाना होते ही पास बैठी मेरी पत्नी मेरे पर झल्लाने लगी की आप से एक काम ढंग से नहीं होता।…

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  • दलबदल
    कविताएँ

    दलबदल | व्यंग्य रचना

    ByAdmin June 9, 2024

    दलबदल ( Dalbadal ) शर्म कहां की, कैसी शराफत, सिध्दांत सभी, अपने बदल ! मिलेगी सत्ता, समय के साथ चल! दे तलाक़, इस पक्ष को, उसमें चल ! हो रही है, सत्ता के गलियारे, उथल-पुथल! तू भी अपना, मन बना, वर्ना पछताएगा कल! सब करते हैं, तू भी कर! चिंता कैसी, किसका डर? पंजा नहीं,ना…

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  • Geet Kanchan Kaya
    गीत

    कंचन काया | Geet Kanchan Kaya

    ByAdmin June 9, 2024

    कंचन काया ( Kanchan Kaya ) संयम के आधारों से अब ,फूटे मदरिम फव्वारे हैं कंचन काया पर राम क़सम, यह नैना भी कजरारे हैं तेरे नयनों में मचल रही, मेरे जीवन की अभिलाषा कुछ और निकट आ जाओ तो,बदले सपनों की परिभाषा है तप्त बदन हैं तृषित अधर,कबसे है यह तन मन प्यासा ।।…

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  • भारतीय संस्कृति और सभ्यता
    कविताएँ

    भारतीय संस्कृति और सभ्यता

    ByAdmin June 9, 2024

    भारतीय संस्कृति और सभ्यता   हमारी संस्कृति है महान देवताओं का वरदान l सरलता सादगी में आता है जीना l छोटी-छोटी बातों छोटी-छोटी खुशियों की हमें कोई कमी ना। वृक्ष ,पर्वत, नदियों से है गहरा नाता l कण-कण में हमें ईश्वर है नजर आता l जहां पराया दुख अपना लगता हैl भाईचारे का रखे सबसे…

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