• नदिया | Kavita Nadiya

    नदिया ( Nadiya )   नदिया बही जा रही धीरे धीरे दरिया की ओर बढ़ी जा रही धीरे धीरे लगी है भीड़ नहाने की देखो कोई डूब रहा कोई डूबा रहा देखो चली ये कैसी हवा धीरे धीरे जहर हि दवा बनी धीरे धीरे बचना नहीं है किसी को नदी से चली आ रही हकीकत…

  • है बहुत कुछ | Kavita Hain Bahot Kuch

    है बहुत कुछ ( Hain Bahot Kuch )   है बहुत कुछ मन में कहने को लेकिन मन में संभाल कर रखा हूं तेरे पास अपना दिल गिरवी मैने देख भाल कर रखा हूं तुम्हें क्या लगती है अंजान में तुम्हें चुना हूं नहीं नहीं मैंने बहुत कुछ देखा फिर तेरे लिए ख्वाब बुना हूं…

  • अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

    अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस   प्रकृति से प्रीत कर,खुशियों को पंख लगाएं पेड़ पौधे जीव जन्तु, सदैव मनुज परम मित्र । नदी पर्वत व सागर सह, स्वर्ग सदृश सुनहरे चित्र । सहेज मातृ वत्सल आभा, परिवेश उत्संग आनंद पाएं । प्रकृति से प्रीत कर,खुशियों को पंख लगाएं ।। नैसर्गिक सानिध्य अंतर, जीवन सदा आह्लादित ।…

  • मरघट की ओर | Marghat ki Or

    मरघट की ओर ( व्यंग्य रचना ) बज उठा, चुनावी बिगुल! निकल पड़े हैं मदारी, खेल दिखाने! बहलाने, फुसलाने, रिझाने, बहकाने! उज्जवल —— अपना भाग्य बनाने! जनता का दु:ख -दर्द, जानकर भी, बनते हैं जो अनजाने! आओ दु:खियारों, चलो -चलें, मरघट की ओर, इन मक्कारों की, मिलकर चिता जलाने! जमील अंसारी हिन्दी, मराठी, उर्दू कवि…

  • सादगी अच्छी नहीं | Saadgi Shayari

    सादगी अच्छी नहीं ( Saadgi Achi Nahi )   हद से ज़्यादा सादगी अच्छी नहीं बेहिसों से बंदगी अच्छी नहीं। पास है दरिया समंदर मांगता देख इतनी तिश्नगी अच्छी नहीं। जानकर सब नासमझ बनता है वो बस अदा उसकी यही अच्छी नहीं तू न हो जिसमें तेरा जलवा न हो मौत सी वो ज़िंदगी अच्छी…

  • पूर्ण बेटी से वो हसरत हो गई

    पूर्ण बेटी से वो हसरत हो गई   ज़र जमीं की जब वसीयत हो गई । टेढ़ी उन बेटो की नीयत हो गई ।। ठीक वालिद की तबीयत हो गई । जान को उनकी मुसीबत हो गई ।। जिस तरह औलाद खिदमत कर रही । हर किसी को देख हैरत हो गई ।। चाहते तो…

  • हीरा मंडी और इंस्टाग्राम

    दोस्तों आज आपके सामने एक विचार लेकर प्रस्तुत हूं ये आज हमारे बीच आई एक वेब सीरीज है हीरा मंडी । मेरा मानना है हीरामंडी जैसी पिक्चर बनाने और देखने तक ही सीमित रहें तो ठीक हैं। परंतु इसको अपने बच्चों के जीवन से दूर रखने के लिए हमको ही प्रयासरत होना पड़ेगा। आर्टिस्टो की…

  • पर्यावरण बचाना है

    पर्यावरण बचाना है पर्यावरण बचाना है तो , पीपल, बरगद, नींम लगाएं ! तपती धरती को अपने हम, आवर्षण से मुक्ति दिलाएं !! जाड़ा, गर्मी, बरसात और ऋतु चक्र सही हो जाएगा ! रोग दोष से मुक्ति मिलेगा, घर खुशियों से भर जाएगा !! पर्यावरण संतुलित होगा, धरती हरी भरी होगी ! लहराएंगी फसलें चहुंदिश,…

  • प्रकृति सिद्धांत प्रतिपादन

    एक सा वातावरण में रहते-रहते हम सब बहुत कुछ अपने जीवन में ग्रहण करते हैं।यही प्रकृति,पूर्व मानव के बीच का भी सिद्धांत है। ब्रह्मांड की संरचना मानव के अनुकूल हुई है । प्रकृति से ही शिक्षा-ग्रहण कर हम सभ्यता की गाड़ी को बहुत ऊपर ले आए।जितना विकास किए वह सारे के सारे आधारित प्राकृतिक सिद्धांत…

  • भानुप्रिया देवी की कविताएं | Bhanu Priya Devi Hindi Poetry

    ताजमहल सा इश्क ताज महल सा इश्क जीवन में दुर्लभ सबको। नसीब से मिलता है धरा से गुजर जाने के बाद भी हृदय में यादें और दिल में स्थान। उनके बारे में अच्छी सोच, अजूबा सा ताजमहल बना जाते हैं,यादगार स्वरूप। जीवन पर्यंत देख उसे मल्लिका की जिंदगी को याद कर करते जीवन ताजा। शहंशाह…