• काशी | Kavita Kashi

    काशी ( Kashi )   वसुधा का सिंगार है काशी ज्ञान ध्यान भंडार है काशी बहती जहां गंग की धारा जिसका पावन कूल किनारा अर्धचंद्र शिव के माथे पर बहती चंद्राकार है काशी गायन वादन नृत्य विहंगम सुर लय ताल छंद का संगम मन को मुग्ध करें स्वर लहरी बना हुआ रसधार है काशी गूंज…

  • इश्क दर्द है | Ishq Dard Hai

    इश्क दर्द है  ( Ishq Dard Hai )   इश्क दर्द है इश्क जवानी है इश्क में हो रहा …. पानी-पानी है इश्क जान है इश्क जहान है इश्क महसूस करो तो इश्वर, अल्लाह, भगवान है इश्क न काला है इश्क न गोरा है इश्क में ………. ने बेदर्दी से खुद को पाला है इश्क…

  • आइसक्रीम | Kavita Ice Cream

    आइसक्रीम ( Icecream ) आइसक्रीम तो सभी की पसंदीदा कहलाती है, सर्दी गर्मी बारिश हर मौसम में खायी जाती हैं। बचपन में मटका कुल्फी की टन टन हमें बुलाती थी, उसके पास पहले पहुँचने की होड़ हम में लग जाती थी। ऑरेंज, वनीला, रास्पबेरी मैंगो कितनी प्यारी लगती थी, सॉफ्टी कोन की तो फिर भी…

  • गिरदावरी | Girdawari

    शहर के नए पटवारी सोहनलाल जी हाल ही में ज्वाइन होकर अपने आफ़िस में काम पर आए थे । अगले महीने राज्य के मुख्यमंत्री जी स्वयं उनके शहर आने वाले थे, क्योंकि मुख्यमंत्री जी को पिछले साल मौसम के कारण ख़राब हुई फ़सल के लिए वहाँ के चुनिंदा किसानों को मुआवजा राशि वाले चेक प्रदान…

  • महात्मा बुद्ध जयंती पर कवि गोष्ठी में कवियों ने समां बांधा

    कल सायं पवित्र दिवस बुद्ध जयंती के अवसर पर जांगिड अस्पताल परिसर में बुद्ध की मूर्ति का अनावरण प्रसिद्ध समाजसेवी महेश मिश्रा ने मूर्ति को माला पहनाकर मंत्रोच्चार कर किया। डाॅ मनीष व डाॅ मीनाक्षी की देखरेख मे बनी भव्य धवल प्रतिमा सभी के मन भा गई। इस अवसर पर महात्मा बुद्ध के जीवन पर…

  • 21 वीं सदी का यथार्थ

    21 वीं सदी का यथार्थ देव संस्कृति देव भाषा देव लोक की विदाई मानव का प्रौद्योगिकीकरण जड-चेतन का निशचेतन छायावाद का प्रचलन चार्वाक का अनुकरण कृत्रिम इच्छा का सृजन कृत्रिम मेधा का उत्पादन बाजारों के बंजारें आत्ममुग्धता की उपभोक्तायें मानवता का स्खलन सभ्यता का यांत्रिकरण बिलगेटस,मस्क का खगोलीकरण अंबानी,अडानी का आरोहण मूल्यों-नीतियों का मर्दन रक्तबीजों…

  • सीता मैया | Sita Maiya

    जानकी देवी कई वर्षों बाद बिहार के छोटे से कस्बा नुमा गांव लोदमा में अपनी छोटी बहन रूपाली के यहां कल रात्रि में आई और आज सवेरे सवेरे प्रातः बेला छोटी बहन के मकान के सामने खाली जमीन पर लगी हुई सब्ज़ियों कुछ गोभी कुछ मूली के पौधे कुछ धनिया पत्ती कुछ टमाटर कुछ बैगन…

  • बुद्ध हो गयें । Buddh ho Gaye

    बुद्ध हो गयें ( Buddh ho Gaye ) तन से मन से वचन से कर्म से मर्म से धर्म से जो शुद्ध हो गयें बुद्ध हो गयें। नरेन्द्र सोनकर ‘कुमार सोनकरन’ नरैना,रोकड़ी,खाईं,खाईं यमुनापार,करछना, प्रयागराज ( उत्तर प्रदेश ) यह भी पढ़ें :- माँ पर नरेन्द्र सोनकर की ४ कविताएँ

  • मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग

    मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग   मुझको पसंद करते हैं लाखों हजार लोग । अब वाह-वाह करके लुटाते हैं प्यार लोग ।। सुनकर ग़ज़ल पसंद उसे कर रहे सभी । मेरी नई ग़ज़ल का करें इंतजार लोग ।। कुछ ख़ास लोग याद रखेंगे मुझे सदा । गिनती में कम-से-कम वो रहेंगे हजार लोग…

  • निगाहें मिलाकर | Ghazal Nigahen Mila Kar

    निगाहें मिलाकर ( Nigahen Mila Kar )   देखों ना सनम तुम यूँ नज़रे घुमाकर करों ना सितम यूँ निगाहें मिलाकर ! करोगी कत्ल तुम कई आशिको का, ये जलवें हसीं यार उनको दिखाकर ! घटाओं सी जुल्फ़े बनाती है कैदी, करोगी हमें क्या कैदी तुम बनाकर ! ज़रा सा ये दिल है इसे बख़्श…