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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार की कविताएं | Dr. Preeti Singh Parmar Poetry
    कविताएँ

    डॉ प्रीति सुरेंद्र सिंह परमार की कविताएं | Dr. Preeti Singh Parmar Poetry

    ByAdmin April 10, 2025June 4, 2025

    “कुंभलगढ़ के शेर” (महाराणा प्रताप पर समर्पित एक भावनात्मक, प्रेरणादायक और गौरवपूर्ण कविता) कुंभलगढ़ की गोद में जन्मा, मेवाड़ का लाल, वीर प्रताप, सिंह सा गर्जे,  जिसने रण में ढाया काल। धूप-छाँव में पला बढ़ा वो स्वाभिमानी माटी का गौरव राजपूताना की शान बना, जो झुका नहीं, बना प्रमाण। पिता उदयसिंह के आँगन में, जयवंता…

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  • highness
    कहानियां

    उच्चता

    ByAdmin April 10, 2025April 10, 2025

    उच्चता कितना आकर्षक शब्दकिन्तु जितना आकर्षकउतना ही दूर यह हैपुरुषार्थ और लगन सेकोई भी कार्य बेहतर होता हैसंकल्प और प्रतिबद्धतासे होता बेहतरीनकार्य को श्रेष्ठता काजामा पहनाने के लिएरहना पड़ता है सदैवउसमें तन-मन से लीनप्रतिभा और क्षमता केयोग से वो उच्चता पाता हैअपनी अलग पहचान बनाता हैचाहे जीवन विकास काकार्य हो याचाहे हो किसी मेंयोग्यता प्रदर्शन…

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  • अहिंसक आंदोलन के सूत्रधार: महावीर स्वामी
    आलेख

    अहिंसक आंदोलन के सूत्रधार: महावीर स्वामी

    ByAdmin April 10, 2025April 10, 2025

    मानव समाज में हिंसा आतंक की जड़े बड़ी गहरी हैं। घर परिवार में बात बिना बात के बड़ों द्वारा छोटे को मारना, पति द्वारा पत्नी बच्चों को मारना पीटना छोटी-छोटी बातों में पिटाई कर देना सामान्य बात है। ऐसे ही सामान्य दिनचर्या में भी बात-बात में लड़ाई झगड़ा करना हिंसा के उदाहरण हैं। वर्तमान समय…

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  • हिंदी ग़ज़ल और उर्दू ग़ज़ल में विभिन्नताएं
    आलेख

    हिंदी ग़ज़ल और उर्दू ग़ज़ल में विभिन्नताएं

    ByAdmin April 9, 2025April 9, 2025

    एक आलोचनात्मक अध्ययन ग़ज़ल भारतीय उपमहाद्वीप की एक विशिष्ट काव्य विधा है, जिसकी जड़ें फारसी साहित्य में हैं और जिसकी शाखाएँ उर्दू और हिंदी साहित्य में समृद्ध रूप से फैली हुई हैं। यद्यपि हिंदी और उर्दू ग़ज़लों का मूल स्रोत समान है, फिर भी समय, भाषा, शैली, भाव-व्यंजना और सांस्कृतिक संदर्भों के कारण दोनों में…

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  • हनुमान जन्मोत्सव
    कविताएँ

    हनुमान जयन्ती

    ByAdmin April 8, 2025April 8, 2025

    हनुमान जयन्ती शांति,गीत,श्रद्धा,समर्पणआदि गरिमामय जीवनऔर व्यक्तित्व सेधर्म का सुंदर समन्वयज्ञान सागर लहराने वालेआनंद के लोक में ले जाने वालेक़लम के कृति रत्न समुद्दभूतहनुमान जी को मेरा भावोंसे वंदन -अभिनंदन !शत- शत नमन ! प्रणाम !जो ज्ञाता है वहस्वयं अज्ञात है ।अज्ञात को ज्ञात करनेका प्रयत्न होना चाहिएविभिन्न माध्यमों के द्वाराक्योंकि आत्मा को भी अपनासही से…

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  • ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी को दी श्रद्धांजलि
    संस्मरण

    ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी को दी श्रद्धांजलि

    ByAdmin April 8, 2025April 8, 2025

    स्वतंत्रता सेनानी परिवार कल्याण महापरिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने ब्रह्माकुमारीज चीफ दादी रतनमोहिनी के शरीर छोड़कर परमात्मा शिव की गोद लेने पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। आध्यात्म और रूहानियत के क्षेत्र में बड़ी शख्सियत राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी ने श्रीगोपाल नारसन की कई पुस्तकों का विमोचन विभिन्न अवसरों पर किया था। गत…

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  • अंधविश्वास तथ्य एवं वैज्ञानिक सत्य
    आलेख

    अंधविश्वास तथ्य एवं वैज्ञानिक सत्य

    ByAdmin April 8, 2025April 8, 2025

    जिक परिवेश में प्रचलित अंधविश्वास की परंपराएं उसके व्यवहार एवं अन्य क्रियाकलापों को प्रभावित करते हैं । इससे यह स्पष्ट होता है कि अंधविश्वासी व्यवहार के पीछे अंधश्रद्धा , अज्ञान , विवेकशीलता की कमी, भ्रम ,वहम, भय अबौद्धिक परंपराएं, वैज्ञानिक चेतना का अभाव आदि मनो सामाजिक कारक मौजूद रहते हैं। यह भी मनोवैज्ञानिक तथ्य है…

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  • मन
    कविताएँ

    मन

    ByAdmin April 8, 2025April 8, 2025

    मन बहुत शक्तिशाली हैव्यापक हैउसका साम्राज्यउसकोचुनौती देने वालाकोई नहीं हैअतः भलाई हैप्रकृति के नियम केसाथ चलने में हीसार नहींविपरीत दिशा में कोईमन में कालुष्य न आयेकर्म काट करइतना हिम बनकरचले कि खुद केसंगति वह जो नीति सिखायेवैराट्य प्रकट होवाणी में वैर-भावन उगने पायेराग- द्वेष से दूरहो जायें औरध्रुवतारा -सी चमकलिए सारे जगत मेंचमक सही सेआत्मा…

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  • हिंदी और ग़ज़ल
    आलेख

    हिंदी और ग़ज़ल: एक आत्मीय संबंध की संभावनाएँ

    ByAdmin April 8, 2025April 8, 2025

    हिंदी भाषा भारत की आत्मा है, जिसकी विविधता, गहराई और सांस्कृतिक समृद्धि अद्वितीय है। यह भाषा न केवल संवाद का माध्यम है, बल्कि एक जीवंत परंपरा, साहित्य और भावनाओं की अभिव्यक्ति का स्रोत भी है। मुझे हिंदी से अत्यंत प्रेम है, क्योंकि यह मेरी मातृभाषा है – मेरे सोचने, महसूस करने और व्यक्त करने की…

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  • साहित्यिक शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होते हैं
    आलेख

    साहित्यिक शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होते हैं

    ByAdmin April 7, 2025April 7, 2025

    शिक्षक कभी भी साधारण नहीं होता I प्रलय और निर्माण उसकी गोद में खेलते हैं, आचार्य चाणक्य के ये शब्द आज भी उतने ही प्रासंगिक हैंI तक्षिला के आचार्य चाणक्य ने किस तरह पूरे भारत के इतिहास को बदला था, ये सभी जानते हैंl श्रेष्ठ साहित्य किसी ज्ञानवान की ही कृति होती आई हैंl भारत…

    Read More साहित्यिक शिक्षक राष्ट्रनिर्माता होते हैंContinue

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