राम जी के दरबार मे
आज तौबा गर्दी थी.. इतनी की पैर धरने तक कि जगह नही.. तिल तिल लोग खिसक रहे थे.. पसीने से सरोबार हो रहे थे.. हर मनुष्य दूसरे मनुष्य से लगभग रगड़ कर ही चल रहा था.. और यह गर्दी होनी भी थी.. प्रभु श्री रामचंद्र के जन्मोत्सव की घड़ी थी.. रामजी की भक्ति में दुनिया…










