• कपटी दुकानदार

    6 माह पुरानी बात है। स्कूल जाते समय मैंने एक किराना दुकानदार से 25 रुपए की नमकीन का एक पैकेट लिया और भुगतान करने को दुकानदार को 200 का नोट दिया। पेमेंट करके मैं दुकान से बाहर निकल गया। लगभग 3 किलोमीटर दूर जाने पर मुझे ध्यान आया कि दुकानदार ने मुझे 75 रुपये वापिस…

  • कवियों ने गाई धमाल, पुस्तक विमोचन, सम्मान समारोह आयोजित

    राजस्थान पेंशनर समाज जिला शाखा झुंझुनू कार्यालय में साहित्य स्पंदन समूह जयपुर के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा राही के संयोजन में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता लियाकत खान पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी , मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि बीएल सावन, विशिष्ट अतिथि पेंशनर समाज के अध्यक्ष नेमीचंद पूनिया, खुर्शीद हुसैन…

  • “बुरा न मानो, होली है” | मस्ती और ठिठोली का त्योहार होली।

    होली एक जीवंत और रंगीन उत्सव है जो प्रेम, एकता और एकजुटता का प्रतीक है। यह हमारे मतभेदों को दूर करने और सद्भाव, क्षमा और खुशी को अपनाने का समय है। यह सर्दियों के अंत का आभार व्यक्त करने का एक रंगीन तरीका है और वसंत के आगमन का प्रतीक है। यह बुराई पर अच्छाई…

  • मेरा सपना

    “कोई सपना देखा क्या?” पत्नी ने पति को नींद में बड़बड़ाते हुए देखकर… नींद से उठाकर कहा। “हाँ, मैंने सपने में देखा कि मैं एक बहुत महँगी कार में बैठा जा रहा हूँ। अचानक सामने एक विशालकाय दैत्य आया। वह दैत्य मुझे कार सहित निगल गया है। उसके नुकीले दांतों से बचता हुआ मैं उसके…

  • नरेन्द्र कुमार की कविताएं | Narendra Kumar Poetry

    जरूरी है यह बात जीवन में सफलता के लिए जरूरी है यह बात,कहना न पड़े किसी को अच्छा से करो यह कार्य। जब आपको प्रत्येक कार्य के लिए पड़े टोकना,सफलता आपसे कोसों दूर है यह बात तू समझना। नित्य क्रिया में भी जब नहीं है अनुशासन,पशु ही हो तुम जो ढ़कता तन खाता है राशन।…

  • कर्म का फल

    प्राचीन काल में एक छोटे से गाँव में एक युवक रहता था जिसका नाम आर्यन था। आर्यन एक बहुत ही धार्मिक और नेक दिल व्यक्ति था। वह हमेशा अपने आस पास के लोगों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। आर्यन के पिता का नाम विक्रांत था और वह एक बहुत ही मेहनती और…

  • काश!

    काश! कर्म न जाने ,धर्म न जाने फिर सोचे यही बातकाश ! ये करता ,काश! वो करताकाश ! ये होता, काश ! वो होताकाश -काश कश्मकश में उलझा है इंसान ,माया के इस चक्रव्यूह में फंसा हुआ है नादान। सत्य ना बोले ,नित्य ना होवे,फिर सोचे यही बातकाश ये सुनता ,काश वो सुनताकाश ये होता,…

  • जब मैं खुद को ठीक कर रही थी

    रात का अंधेरा घना था, लेकिन अंदर का अंधेरा उससे भी ज्यादा। मैं आईने के सामने खड़ी थी, अपनी ही आँखों में झाँकने की कोशिश कर रही थी। वहाँ एक थकी हुई स्त्री खड़ी थी—जिसने दूसरों को खुश रखने में खुद को खो दिया था। लेकिन उस रात, कुछ बदल गया। मैं अपने भीतर उठती…

  • एक दिन का सम्मान

    महिला दिवस पर सोशल मीडिया पर बधाइयों की बौछार थी। हर ओर से संदेश आ रहे थे—“नारी शक्ति को प्रणाम,”“बिना महिलाओं के ये दुनिया अधूरी है,”“हर नारी का सम्मान करें,”और न जाने क्या-क्या! रिया के फोन पर भी बधाइयों का तांता लगा हुआ था। उसके दफ्तर के पुरुष सहकर्मी, मोहल्ले के लोग, रिश्तेदार—सबने महिला दिवस…

  • चेतावनी गीत

    चेतावनी गीत सही चिकित्सा करनी होगी ,बहसी और दरिन्दों की ।शीघ्र व्यवस्था करनी होगी ,बस, फांसी के फन्दों की ॥ अभी अधखिली कली ,फूल बनने की थी तैयारी में ।अपनी खुशबू से गुलशन को ,महकाने की बारी में ।किन्तु खिलने से पहले ही ,बेरहमी से मसल दिया ।बनना था उसको प्रसून ,पर कैसे रूप में…