• प्रेमचंद जयंती

    (साहित्य का दीप और समय का दर्पण) प्रत्येक युग में समय की धारा को दिशा देने वाले कुछ युगद्रष्टा जन्म लेते हैं, जो अपनी लेखनी से न केवल साहित्य का विस्तार करते हैं, अपितु समाज की चेतना को जाग्रत कर, उसे एक नई दृष्टि प्रदान करते हैं। मुंशी प्रेमचंद ऐसे ही कालजयी साहित्यकार थे, जिनके…

  • शुभम साहित्यिक संस्था ने शुभम जयंती पर कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया

    बरेली- शुभम साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था ने शुभम की जयंती पर कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन मेयर कार्यालय के सभागार में उस्ताद शायर विनय साग़र जायसवाल की अध्यक्षता में आयोजित किया। इस अवसर पर मुख्यातिथि वरिष्ठ कवि रणधीर प्रसाद गौड़ धीर रहे तथा विशिष्ट अतिथि रहे अक़ीम उद्दीन बिजनौर व रईस अहमद राज़…

  • नाग पंचमी सांस्कृतिक आस्था और पर्यावरणीय चेतना का पर्व

    भारत की संस्कृति विविधताओं से भरी हुई है, जहाँ प्रत्येक पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, अपितु लोकमानस की गहराइयों से जुड़ा एक जीवन-दर्शन होता है। नाग पंचमी भी ऐसा ही एक पर्व है, जो आध्यात्मिक श्रद्धा, प्रकृति के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त प्रतीक है। नाग पंचमी का उल्लेख अनेक पुराणों और महाभारत…

  • नरेन्द्र सोनकर की कविताएँ | Narendra Sonkar Poetry

    रोटी बड़ी या देश बड़ा? संसद गूंगीसांसद गूंगान्यायालय गूंगान्यायाधीश गूंगासत्ता गूंगीशासन गूंगादल-दल गूंगागण-गण गूंगाबस्ती गूंगीघर-घर गूंगाजन-जन गूंगाकण-कण गूंगाधरम-करम का परचम गूंगापढ़ें-लिखें का दमखम गूंगाइस देश का सिस्टम गूंगा अशिक्षा का ग्राफ न पूछो?महंगाई की भाप न पूछो?बेरोज़गारी ज़िंदा डसतीछात्र लटकते हैं फांसी परहताशा, निराशा इतनी खून, मांस, लोग बेचें किडनी! नगर-सिटी क्या,बस्ती क्या,लोग भटकते दर-बदररोटी…

  • लघुकथा – महंगी शादी

    मास्टर शिवप्रसाद की ज़िंदगी भर की कमाई आज बेटी की शादी में दांव पर लगी थी।घर के आँगन में सजी रंग-बिरंगी लाइटें, मंडप में बैठे पंडित, और हाथ में चेकबुक लिए मास्टर साहब —सब कुछ कुछ खोखला-सा लग रहा था। लड़के वालों की माँगें दिन-ब-दिन बढ़ती गईं।“गहने हल्के हैं… फ्रिज छोटा है… कार पुरानी है…”और…

  • बहुजन जागरण चालीसा

    बहुजन जागरण चालीसा 01. ❝ कहें गर्व-अधिकार से,नारी दलित यतीम।    नाम नहीं नारा नहीं, धम्म-दीप हैं भीम।। ❞ 02. ❝ जन्म हुआ रे भीम का,खुशी महल-खपरैल।     धम्म-घोष है न्याय का, तिथि चौदह अप्रैल।। ❞ 03. ❝ समता औ’ सम्मान ही, संविधान की थीम।  सृजन किए अंबेडकर,बोलो जय जय भीम।। ❞ 04.  ❝…

  • मदद बनी मुसीबत

    इंटर कॉलेज के प्रधानाध्यापक राकेश सर ने प्रार्थना सभा में ही कक्षा 11 के छात्र सोहन को खड़ा करके प्रश्न किया- “बेटा सोहन, कल मैंनें तुम्हें अतरासी चौराहे पर बाइक से जाते हुए देखा था। तुम्हारे पीछे एक व्यक्ति बैठा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि उसने शराब पी रखी थी। वह क़ई बार…

  • “उम्मीद”

    सर्दियों की एक धुंधभरी सुबह थी। कोहरे में लिपटा स्टेशन ठंड से सिहर रहा था। प्लेटफ़ॉर्म नंबर तीन पर एक वृद्धा बैठी थी—बिलकुल चुप, जैसे किसी ने जीवन की आवाज़ छीन ली हो। सिर पर जर्जर ऊनी चादर, गोद में पुराना टिफिन डिब्बा, और आँखों में एक जमी हुई प्रतीक्षा। पास ही खड़े एक युवक…

  • मनोज की शादी

    राम अवतार जी एक कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्यरत थे। वे प्रातः 4 बजे उठकर दैनिक क्रियाकलापों से निवृत होकर, नहा धोकर, साइकिल से 2 किलोमीटर दूर नियमित महादेव जी के मंदिर पर जल चढ़ाने जाते थे। भगवान की पूजा-अर्चना करके माथे पर एक बड़ा सा पीला-लाल रंग का टीका लगाते थे और…

  • सकारात्मक सोच

    सर्द अंधेरी रात थी। रात के दस बज रहे थे। सुनसान सड़क पर…घर पहुंचने की जल्दी में नितिन तेजी से बाइक चलाकर सरपट चला जा रहा था। रास्ते में एक पुल के ऊपर चढ़ते समय अचानक उसकी बाइक सड़क पड़े हुए एक बड़े से पत्थर से टकरा गयी। नितिन अपना संतुलन खो बैठा और बाइक…