भानुप्रिया देवी की कविताएँ

भगवान बुद्ध में भगवान बुद्ध में दया,करुणा कूट-कूट कर भरा हुआ था। सबके लिए उमड़ती चिंता मन में, सभी के कष्ट को अपना कष्ट। इसलिए तो मृत,रोगी,वृद्ध देख मन हुए...

बुद्ध वाणी | Kavita Buddha Bani

बुद्ध वाणी ( Boudha Bani )   सुन प्राणी बुद्ध की वाणी बुद्ध शरण गच्छामि सुन प्राणी धम्म शरण गच्छामि संघ शर्ण गच्छामिसुन प्राणी चार आर्य सत्य दुख...

नदिया | Kavita Nadiya

नदिया ( Nadiya )   नदिया बही जा रही धीरे धीरे दरिया की ओर बढ़ी जा रही धीरे धीरे लगी है भीड़ नहाने की देखो कोई डूब रहा कोई...

है बहुत कुछ | Kavita Hain Bahot Kuch

है बहुत कुछ ( Hain Bahot Kuch )   है बहुत कुछ मन में कहने को लेकिन मन में संभाल कर रखा हूं तेरे पास अपना दिल गिरवी मैने...

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस

अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस   प्रकृति से प्रीत कर,खुशियों को पंख लगाएं पेड़ पौधे जीव जन्तु, सदैव मनुज परम मित्र । नदी पर्वत व सागर सह, स्वर्ग सदृश सुनहरे चित्र...

मरघट की ओर | Marghat ki Or

मरघट की ओर ( व्यंग्य रचना ) बज उठा, चुनावी बिगुल! निकल पड़े हैं मदारी, खेल दिखाने! बहलाने, फुसलाने, रिझाने, बहकाने! उज्जवल ------ अपना भाग्य बनाने! जनता का दु:ख -दर्द, जानकर भी, बनते हैं जो अनजाने! आओ...

सादगी अच्छी नहीं | Saadgi Shayari

सादगी अच्छी नहीं ( Saadgi Achi Nahi )   हद से ज़्यादा सादगी अच्छी नहीं बेहिसों से बंदगी अच्छी नहीं। पास है दरिया समंदर मांगता देख इतनी तिश्नगी अच्छी नहीं। जानकर...

पूर्ण बेटी से वो हसरत हो गई

पूर्ण बेटी से वो हसरत हो गई   ज़र जमीं की जब वसीयत हो गई । टेढ़ी उन बेटो की नीयत हो गई ।। ठीक वालिद की तबीयत...

हीरा मंडी और इंस्टाग्राम

दोस्तों आज आपके सामने एक विचार लेकर प्रस्तुत हूंये आज हमारे बीच आई एक वेब सीरीज है हीरा मंडी ।मेरा मानना है हीरामंडी जैसी...

पर्यावरण बचाना है

पर्यावरण बचाना हैपर्यावरण बचाना है तो , पीपल, बरगद, नींम लगाएं ! तपती धरती को अपने हम, आवर्षण से मुक्ति दिलाएं !! जाड़ा, गर्मी, बरसात और ऋतु चक्र सही...