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TheSahitya – द साहित्य
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TheSahitya – द साहित्य
  • Bewafa shayari for gf
    शेरो-शायरी

    ऐ सनम तूने क्यों प्यार ये बेवफ़ा कर दिया | Bewafa shayari for gf

    ByAdmin May 11, 2022

    ऐ सनम तूने क्यों प्यार ये बेवफ़ा कर दिया ( Ae sanam tune kyon pyar ye bewafa kar diya )     ऐ सनम तूने क्यों प्यार ये बेवफ़ा कर दिया! उम्रभर के लिए क्यों मुझे यूं जुदा कर दिया   बेवफ़ा से बहुत दिल ख़फ़ा है यहाँ इसलिए तोड़कर प्यार से ही भरा दिल…

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  • कवि सम्मेलन
    साहित्यिक गतिविधि

    हृदयांगन संस्था द्वारा हनुमान जन्मोत्सव पर आयोजित कवि सम्मेलन संपन्न

    ByAdmin May 10, 2022May 22, 2022

    17 अप्रैल को सायंकाल 7 बजे सुप्रसिद्ध संस्था हृदयांगन साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संस्था (पंजीकृत) मुंबई द्वारा हनुमान जन्मोत्सव पर यादगार कवि सम्मेलन सम्मेलन आनलाइन संपन्न हुआ, जिसमे देश के कई प्रान्तों के कवियों ने अपनी उपस्थित दर्ज की। सर्वप्रथम मंच संचालक मुंबई से श्री उमेश चंद्र मिश्र प्रभाकर जी ने हनुमान जन्मोत्सव की…

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  • Ghazal yaad ki
    शेरो-शायरी

    याद की दिल में किसी की रोज़ ख़लिश है बहुत | Ghazal yaad ki

    ByAdmin May 10, 2022May 10, 2022

    याद की दिल में किसी की रोज़ ख़लिश है बहुत! ( Yaad ki dil mein kisi ki roz khalish hai bahut )     याद की दिल में किसी की रोज़ ख़लिश है बहुत! रोज़ जिसको ही भुलाने की की कोशिश है बहुत   वो बनेगा ही नहीं मेरा हक़ीक़त में कभी उठ रही दिल…

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  • Poem dev bhoomi ki sair
    कविताएँ

    देव भूमि की सैर | Poem dev bhoomi ki sair

    ByAdmin May 10, 2022May 10, 2022

    देव भूमि की सैर ( Dev bhoomi ki sair )   यूं ही नहीं बसती जिंदगानी यहां, यूं ही नहीं समाती बर्फ की आगोश में वादियां। यूं ही नहीं लुभाती सैलानियों को जन्नत की घाटियां। कुदरत भी सफेद चादर सी बिछा देता है उनके आगमन में, कुछ तो बात है मेरे उत्तराखंड में, कुछ तो…

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  • Poem aadmi badhne laga
    कविताएँ

    आदमी बढ़ने लगा | Poem aadmi badhne laga

    ByAdmin May 9, 2022

    आदमी बढ़ने लगा ( Aadmi badhne laga )   आदमी से आदमी ही, आजकल डरने लगा । रौंदकर रिश्तों को जब, आदमी बढ़ने लगा ।।   नीम, इमली और बरगद पूछते, कब आओगे.? छोड़कर वो गांव जब, परदेश को चलने लगा ॥   दूरियाँ उसने बना ली, जो कभी परछाई था मुफलिसी का जब अंधेरा,…

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  • Poem jal sanrakshan
    कविताएँ

    जल संरक्षण | Poem jal sanrakshan

    ByAdmin May 9, 2022

    जल संरक्षण ( Jal sanrakshan )   सोचल्यो समझल्यो थोड़ा हिवड़ा म ध्यारल्यो पाणी घणों मान राखै मन म बिचारल्यो   मोतिड़ा सा दमकै ज्याणी पाणी री आब ज्यूं सांसा री डोर संभळै पाणीड़ा री धार सूं   सूखरया तळाब कुआं लूंवा चालै बारनै पाणीड़ो बचाणो भाया जमाना र कारणै   ठण्डों ठण्डो पाणी मिलज्या…

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  • राणा वीर जब्बर
    कविताएँ

    रणबंका राणा वीर जब्बर | Kavita marwadi

    ByAdmin May 9, 2022May 9, 2022

    रणबंका राणा वीर जब्बर ( Ranbanka rana veer jabbar )   आजादी रो दीवानो हूं मैं देशभक्त मतवाळो हूं भारत मां को लाडलो मायड़ रो लाल रुखाळो हूं   तीर चलै तलवार चलै वारा रा ऊपर वार चलै रणबांकुरा रण म कूदै रणवीरां री हुंकार चलै   चित्तौड़ शान सूं खड़यो मुगलां सूं टक्कर लेतो…

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  • Marwadi poem
    कविताएँ

    लाय बरस री | Marwadi poem

    ByAdmin May 9, 2022

    लाय बरस री   सन सन करती लूंवां चालै आकांशा सूं अंगारा चिलचिलाती दोपारी म बिलख रहया पंछी सारा   आग उगळती सड़कां तपरी बळती लाय पून चलै झूळस ज्यायै काळजो सगळो ताती रेतां पग बळै   गरम तवा सी तपै धरती च्यारूं चोखटां लाय बळै पाणी ढूंढता फिरै पंछीड़ा भरी दोपारी दिन ढळै  …

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  • पर्यावरण चेतना
    कविताएँ

    पर्यावरण चेतना | Marwadi Rachna

    ByAdmin May 9, 2022

    पर्यावरण चेतना ( Paryavaran chetna )   बिना दरख्तां क आ धरती सूनी सूनी लागै है आसमान सूं बादळिया भी परै परै ही भागै है   आओ सगळा मिलकै रूंखड़ल्या री खैर लेवां साढ़ सावण झूमकै बरसै इंदर राजा री महर लेवां   हरी भरी हरियाळी धरती कूंचा कूंचा हरसावै है मस्त चालै भाळ मोकळी…

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  • Ghazal waqt ka masala
    शेरो-शायरी

    वक्त का एक मसअला हैं हम | Ghazal waqt ka masala

    ByAdmin May 8, 2022

    वक्त का एक मसअला हैं हम ( Waqt ka ek masala hai hum )   वक्त का एक मसअला हैं हम ! चल रहा एक काफिला हैं हम!!   मौज के साथ हैं हवा हैं हम चलती साँसों का सिलसिला हैं हम !!   दर्द भी जिसके साथ हँसते हैं ज़िन्दगी ऐसा हौसला हैं हम…

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